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आर्य vs द्रविड़ का कॉन्सेप्ट कहां से आया, क्या है इसके पीछे का इतिहास

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 05 Sep 2023, 12:00 AM | Updated: 05 Sep 2023, 12:00 AM

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने एक बयान दिया है और ये बयान सनातन धर्म को लेकर दिया है. जिसके बाद इस बयान को लेकर उनका विरोध हो रहा है तो वहीं इस बयान को लेकर विवाद शुरू हो गया है. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के बेटे ने आर्य धर्म को लेकर ये बयान द्रविड़ मूवमेंट से जुड़े होने का कारण है. वहीं इस पोस्ट के जरिए हम आपको इस द्रविड़ मूवमेंट के कॉन्सेप्ट और इसके पीछे का इतिहास के बारे बताने जा रहे हैं.

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जानिए क्या है द्रविड़ मूवमेंट

द्रविड़ मूवमेंट हिंदू धर्म की किसी ब्राह्मणवादी परंपरा और संस्कृति या रिवाज को नहीं मानता है और साउथ की राजनीती इसी द्रविड़ मूवमेंट से जुडी हुई है. ब्राह्मणवाद में जहाँ किसी शख्स की मृत्यु होने पर दाह संस्कार करते हैं तो वहीं इस द्रविड़ मूवमेंट से जुड़े लोगों को दफनाया जाता है. वहीं ये द्रविड़ का कांसेप्ट कई सालों पुराना है और इस द्रविड़ मूवमेंट की शुरुआत ब्राह्मणवाद के विरोध में शुरू हुई.

जानिए क्या है आर्य और द्रविड़ों के संघर्ष का इतिहास

द्रविड़ मूवमेंट की भेदभाव और छूआछूत रहा है और इसके पीछे की कहानी त्रावणकोर महाराज से जुड़ी हुई हैं और आज़ादी के बाद इस द्रविड़ मूवमेंट को  राजनीतिक और सामाजिक रूप से नयी पहचान मिली. रिपोर्ट के अनुसार, केरल में त्रावणकोर के राजा के मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर दलितों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया. जिसके बाद दलितों को ये बात अच्छी नहीं लगी और उन्होंने इसका विरोध किया और फिर उन लोगो को उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और इस तरह आन्दोलन शुरू हो गया.

पेरियार ने दी द्रविड़ मूवमेंट को पहचान

इसी आंदोलन में पेरियार शामिल हुए जिन्होंने दलितों के हक की लड़ाई लड़ी, अपने मित्र रहे त्रावणकोर राज का विरोध किया और महीनों तक जेल में सजा भी काटी. वहीं इसके बाद एक समान व्यवहार करने को लेकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाया और गैर-ब्राह्मणों जिन्हें द्रविड़ कहा उन्हें एक नयी पहचान मिली. साउथ की राजीनति में द्रविड़ आन्दोलन से जुडी हुई है और आज के समय में कई नेता जो इस द्रविड़ आन्दोलन को फॉलो करते हैं तो कई नेता ऐसे हैं जो इस द्रविड़ आन्दोलन के विरोध में हैं.

सनातन धर्म को खत्म करने का दिया बयान

जहाँ भारत की करीब अस्सी फीसदी जनसँख्या सनातन संस्कृति को मानता है, उसी सनातन संस्कृति के खिलाफ तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और तमिनलाडु सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन ने जहर उगला उदयनिधि ने कहा है कि सनातन धर्म डेंगू मलेरिया और कोरोना की तरह है जिसे खत्म कर देना चाहिए. वहीं उनके इस बयान को लेकर जहाँ विरोध शुरू हो गया तो वहीं बाद में उन्होंने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा, “मैंने कभी भी सनातन धर्म का पालन करने वालों के नरसंहार की अपील नहीं की. सनातन धर्म एक ऐसा सिद्धांत है जो जाति और धर्म के नाम पर लोगों को बांटता है. सनातन धर्म को जड़ से उखाड़ना मानवता और समानता को कायम रखना है.

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