करवा चौथ पर न छूटे कोई सामग्री: छलनी से लेकर मिट्टी के करवे तक, पूजा की थाली सजाने की पूरी लिस्ट और विधि| Karwa Chauth puja samagri

Nandani | Nedrick News Ghaziabad Published: 28 अक्टूबर 2026, 03:50 AM Updated: 28 अक्टूबर 2026, 03:50 AM
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Karwa Chauth puja samagri: सुहागिन महिलाओं के सबसे बड़े और आस्था से जुड़े पर्व करवा चौथ को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं। इस साल करवा चौथ का पावन व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को पूरे देश में पारंपरिक उल्लास और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस खास दिन महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं। शाम के समय माता करवा और रात में चंद्रदेव की विधि-विधान से पूजा का विशेष विधान है। शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, अगर पूजा की थाली में सभी जरूरी पवित्र सामग्रियां सही तरीके से शामिल न हों, तो पूजा अधूरी मानी जाती है। ऐसे में किसी भी अंतिम समय की भागदौड़ से बचने के लिए महिलाओं को पहले से ही अपनी थाली की सामग्री तैयार रखनी चाहिए।

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थाली में कौन-कौन सी पूजन सामग्री है जरूरी? Karwa Chauth puja samagri

करवा चौथ की पूजा को पूर्ण और फलदायी बनाने के लिए एक साफ-सुथरी और सुंदर थाली सजाई जाती है, जिसमें इन मुख्य सामग्रियों का होना बेहद जरूरी माना गया है:

  • माता करवा की प्रतिमा: चौकी पर स्थापित करने के लिए माता करवा का चित्र या प्रतिमा।
  • मिट्टी का करवा: शुद्ध जल से भरा हुआ मिट्टी का पारंपरिक करवा, जो इस पूरे पर्व का मुख्य प्रतीक माना जाता है।
  • अक्षत और रोली: तिलक और अर्पण के लिए बिना टूटे साबुत चावल (अक्षत), रोली और चंदन।
  • सुहाग का सामान: माता को चढ़ाने के लिए सोलह श्रृंगार की चीजें, जिनमें मुख्य रूप से लाल चूड़ियां, सिंदूर, महावर और बिंदी शामिल हों।
  • दीपक और धूपबत्ती: वातावरण को पवित्र और सुगंधित करने के लिए धूप-बत्ती तथा शुद्ध देशी घी का दिया व माचिस।
  • प्रसाद: भोग लगाने और व्रत के बाद बांटने के लिए आटे या चीनी से बनी पारंपरिक मिठाइयां।
  • छलनी और जल का पात्र: चंद्र दर्शन के लिए साफ छलनी (चलनी) और चंद्रदेव को अर्घ्य अर्पित करने के लिए एक साफ लोटा या छोटा कलश।

चांद के दीदार और व्रत खोलने का सही नियम

रात में जब आसमान में चंद्रमा निकलता है, तब व्रत खोलने की अंतिम और सबसे अहम रस्म शुरू होती है। इस समय पूजा की थाली में साफ छलनी का होना जरूरी है, जिससे पहले चांद के दर्शन किए जाते हैं और फिर उसी छलनी से पति का चेहरा देखा जाता है। इसके बाद जल से भरे लोटे से चंद्रदेव को अर्घ्य दिया जाता है। अर्घ्य देने के बाद पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर और मीठा खिलाकर व्रत पूरा करवाते हैं। इसलिए व्रत खोलते समय थाली में शुद्ध पेयजल और मिठाई या भोग की चीजें पहले से मौजूद होनी चाहिए। इन सामग्रियों के बिना व्रत के पारण की प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती।

बायना देने की रस्म: सास का आशीर्वाद और रिश्तों की मिठास

करवा चौथ के दिन बायना (बायना निकालने) की रस्म का विशेष महत्व होता है। यह परंपरा परिवार में सास या बुजुर्ग महिलाओं के प्रति आदर और कृतज्ञता व्यक्त करने का सुंदर माध्यम है। पूजा संपन्न होने के बाद एक थाली में फल, मेवे, मिठाई, सुहाग की सामग्रियां और वस्त्र सजाकर सास या घर की किसी आदरणीय महिला को भेंट किए जाते हैं।

इसके बाद महिलाएं उनके पैर छूकर आशीर्वाद लेती हैं और बुजुर्ग महिलाएं उन्हें ‘अखंड सौभाग्यवती भव’ का मंगल आशीर्वाद देती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बड़ों का यह आशीर्वाद व्रत को सफल बनाने के साथ-साथ परिवार में प्यार और सौहार्द को भी गहरा करता है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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