Farmers Protest: 'सरकार वहम में ना रहें…', रेले रोको अभियान के बीच केंद्र पर बरसे राकेश टिकैत, जानिए क्या कहा?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 18 फ़रवरी 2021, 05:30 AM Updated: 18 फ़रवरी 2021, 05:30 AM
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नए कृषि कानून के विरोध में किसानों का आंदोलन खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। बीते साल नवंबर महीने से शुरू हुआ ये आंदोलन अब तक जारी है। 26 जनवरी को हुई हिंसा के बाद जहां ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि आंदोलन धीरे धीरे कमजोर पड़ सकता है। वहीं इसके बाद काफी कुछ हुआ, जिसके चलते कमजोर पड़ रहे आंदोलन को एक बार फिर से संजीवनी मिली। 

किसानों का रेल रोको अभियान

कभी चक्का जाम कर, तो कभी रेल रोककर किसान अपने आंदोलन को लगातार रफ्तार देने की कोशिश कर रहे हैं। 6 फरवरी को हुए चक्का जाम के बाद आज किसानों ने 4 घंटों के लिए रेल रोको अभियान भी चलाया। जिसके तहत दोपहर 12 से 4 बजे तक रेल रूट को जाम किया गया। इस दौरान किसानों ने हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी यूपी समेत कई जगहों पर रेल रोकी। 

राकेश  टिकैत की सरकार को चेतावनी

इस अभियान के बीच ही राकेश टिकैत ने एक बार फिर से बड़ा बयान दे दिया है। इस दौरान वो केंद्र को खुली तौर पर धमकी देते हुए भी नजर आए। राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार कह रही है कि दो महीने में आंदोलन अपने आप ही खत्म हो जाएगा, क्योंकि किसान फसल काटने के लिए गांव चले जाएंगे। लेकिन सरकार को किसी भी गलत धारणा में नहीं रहना चाहिए। हम फसल के साथ-साथ विरोध करेंगे। 

राकेश टिकैत ने आगे कहा कि सरकार अगर जोर देती है तो हम अपनी फसलों में आग लगा देंगे, लेकिन आंदोलन खत्म नहीं होगा। हम फसल भी काटेंगे और आंदोलन भी करेंगे। हिसार में महापंचायत को संबोधित करते हुए टिकैत बोले कि किसानों का अगला टारगेट 40 लाख ट्रैक्टरों का है। देशभर से 40 लाख ट्रैक्टर इकट्ठा करेंगे। अगर ज्यादा समस्या खड़ी की तो ट्रैक्टर भी वहीं है और किसान भी वही। ये किसान दोबारा दिल्ली जाएंगे। इस बार हल क्रांति होगी, जो खेत में औजार इस्तेमाल होते हैं, वे सब जाएंगे।

कब सुलझेगा ये विवाद?

गौरतलब है कि किसानों का आंदोलन बीते ढाई महीने से भी ज्यादा वक्त से जारी है। नए कृषि कानून के विरोध में किसान ये आंदोलन कर रहे हैं। किसानों की मांग है कि नए कृषि कानून को वापस लिया जाए और MSP के लिए कानून बनाया जाए। जबकि सरकार इसे किसानों के लिए फायदेमंद बताते हुए कानून वापस लेने की मांग मानती नजर नहीं आ रही। 

इस पूरे विवाद को सुलझाने के लिए किसान नेताओं और सरकार के बीच कई दौर की बातचीत भी हो चुकी है, जो अब तक असफल रही। वहीं 26 जनवरी को निकाली गई ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई हिंसा की वजह से आंदोलन की छवि भी खराब हुई। हालांकि किसान अभी भी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। देखना होगा कि आखिर कब तक किसानों और सरकार के बीच जारी ये खींचतान खत्म हो पाती है…?

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