BSP से कांग्रेस में शामिल हुए विधायकों के निशाने पर सचिन पायलट, सीएम गहलोत में जताई आस्था

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 16 जून 2021, 12:00 AM 🔄 Updated: 16 जून 2021, 12:00 AM
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देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थिति कथित तौर पर दिन प्रतिदिन बदतर होती जा रही है। पार्टी के भीतर चल रही अंदरुनी कलह की वजह से अभी तक कई बड़े नेता कांग्रेस का दामन छोड़ चुके हैं। कांग्रेस शासित राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2018 के बाद से ही बवाल जारी है। 

कांग्रेस ने सचिन पायलट के नेतृत्व में राजस्थान में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। लेकिन कांग्रेस नेतृत्व ने अशोक गहलोत को सीएम बना दिया और सचिन पायलट उप मुख्यमंत्री बने। जिसके बाद से ही राजस्थान कांग्रेस दो गुटों में बंट गई। 

पिछले साल सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच चल रहा मनमुटाव जग जाहिर हो गया, जब सचिन पायलट अपने गुट के विधायकों के साथ दिल्ली पहुंच गए और राजस्थान की गहलोत सरकार पर संकट के बादल मंडराने लगे। तब इस बात का अंदेशा लगाया जा रहा था कि अल्पमत में होने के कारण गहलोत सरकार धराशायी हो जाएगी। 

उस समय बीएसपी से पाला बदलकर कांग्रेस में शामिल हुए 6 विधायकों ने गहलोत सरकार को बचा लिया था। अब इन विधायकों ने एक बार फिर सचिन पायलट को निशाने पर लेते हुए अशोक गहलोत में आस्था जताई है।

पायलट गुट के खिलाफ कार्रवाई की मांग

बीएसपी से कांग्रेस में शामिल हुए विधायक संदीप यादव ने कहना है कि गहलोत सरकार से बगावत करने वाले 19 विधायक गद्दार थे। जिनकी वजह से सरकार गिरने वाली थी वो कांग्रेस हाईकमान पर किस हक से दबाव बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि आलाकमान को अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं करनी चाहिए और उनके खिलाफ  कार्रवाई करनी चाहिए।

विधायक संदीप यादव ने कहा, हमने सरकार बचाई थी। सरकार को स्थिर किया, हमें इसका इनाम मिलना चाहिए न कि सरकार गिराने की कोशिश करने के वालों के दबाब में हाईकमान को आना चाहिए। उन्होंने कहा कि वो किस हक से कार्यकर्ताओं के काम होने की बात कर रहे हैं, वो तो छोड़कर चले गए थे।

दूसरी ओर कांग्रेस के एक अन्य विधायक राजेंद्र गुढ़ा का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान को असली और नकली में पहचान करनी होगी। हम असली हैं जिन्होंने सरकार बचाई। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत हमारे नेता हैं, उनके कोई शिकायत नहीं है। हाईकमान को समझना होगा कि जिन 19 विधायकों ने गद्दारी की उनकी सुनने के बजाय हमारी बात मानी जाए।

सचिन पायलट के बयान के बाद मचा हंगामा

बता दें, पिछले साल राजस्थान कांग्रेस में चल रही कलह के बीच सचिन पायलट अपने गुट के 19 विधायकों के साथ दिल्ली पहुंच गए थे। जिसके बाद कांग्रेस के शीर्ष नेताओं के बीच बचाव के बाद वह कुछ शर्तों पर मान गए। कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने इस मामले के समाधान के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया। 

पिछले दिनों सचिन पायलट ने इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि हमसे किए वादे 10 महीनें बाद भी पूरे नहीं हुए। जिस पर सत्ताधारी पार्टी के कई नेताओं ने प्रतिक्रिया दी थी और यह मामला एक बार फिर से तूल पकड़ता नजर आ रहा है।

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