BJP Mission 2029: 2027 के विधानसभा चुनावों की रणनीति तय करने के बाद अब केंद्र सरकार का पूरा फोकस ‘मिशन 2029’ पर है। संसद के मौजूदा बजट सत्र को अचानक गुरुवार तक बढ़ाए जाने के बाद कयासों का बाजार गर्म है। अब 16 से 18 अप्रैल के बीच होने वाली लोकसभा और राज्यसभा की विशेष बैठकों में सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े मास्टरस्ट्रोक की तैयारी में है।
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क्या है सरकार की योजना?
भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस खास सत्र में कुछ ऐतिहासिक संविधान संशोधन करने की तैयारी में है। खबरों के मुताबिक बताया जा रहा है कि सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम में सुधार कर इसे 2029 से पहले प्रभावी बनाने वाला बिल ला सकती है। इसके साथ ही, जल्द परिसीमन (डिलिमिटेशन) शुरू करने की योजना भी सामने आ रही है, ताकि ये कदम सीधे तौर पर 2029 के रण से पहले चुनावी नक्शा बदला जा सके।
इसमें मौजूद मुख्य बिंदुओं की पुष्टि हालिया रिपोर्टों से भी होती है:
- नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन: सरकार Nari Shakti Vandan Adhiniyam में बदलाव कर आरक्षण को जनगणना के इंतजार के बिना लागू करने का रास्ता साफ कर सकती है।
- परिसीमन (Delimitation): चर्चा है कि सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए बिल ला सकती है।
- सीटों की संख्या: इस योजना के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़कर 816 होने की संभावना है, ताकि महिलाओं के लिए 33% (करीब 273 सीटें) आरक्षित की जा सकें।
33% महिला आरक्षण पर जोर
सरकार का वर्तमान फोकस महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को धरातल पर उतारने का है। योजना के अनुसार बताया जा रहा है कि लोकसभा और विधानसभाओं में 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जानी हैं। हालांकि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ सितंबर 2023 में ही पारित हो चुका था, लेकिन इसके लागू होने की शर्त नई जनगणना और परिसीमन से जुड़ी थी। अब सरकार उन तकनीकी बाधाओं को हटाकर इसे सीधे लागू करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ा रही है।
परिसीमन से बदल जाएगी देश की राजनीति
परिसीमन यानी सीटों का नया बंटवारा राजनीति की दिशा और दशा बदलने वाला बड़ा मुद्दा बनने जा रहा है। अनुमान है कि 2027 तक यह प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। यदि ऐसा होता है, तो लोकसभा की कुल सीटें वर्तमान 543 से 50% बढ़कर लगभग 816 हो सकती हैं।
इसमें सबसे बड़ा बदलाव महिलाओं की भागीदारी में दिखेगा, क्योंकि करीब 272 सीटें सीधे तौर पर महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह कदम न केवल संसद का स्वरूप बदलेगा, बल्कि भारतीय राजनीति के इतिहास का सबसे बड़ा बदलाव साबित होगा।
दक्षिण भारत की चिंताओं का समाधान भी है जरूरी
परिसीमन को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों में लंबे समय से चिंता जताई जा रही है। उनका तर्क है कि जनसंख्या नियंत्रण के उनके सफल प्रयासों के कारण कहीं उनकी लोकसभा सीटें कम न हो जाएं। ऐसे में सरकार इस बात पर गंभीरता से विचार कर रही है कि सीटों के नए बंटवारे में राज्यों के बीच शक्ति का संतुलन (Power Balance) बना रहे और किसी भी क्षेत्र को राजनीतिक नुकसान न उठाना पड़े।
मिशन 2029′ की नई रणनीति
साल 2014 से पहले BJP के कोर एजेंडे में राम मंदिर, अनुच्छेद 370 और समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे मुद्दे शीर्ष पर थे। लेकिन अब पार्टी एक नए और बड़े सुधारवादी एजेंडे के साथ आगे बढ़ रही है। ‘मिशन 2029’ के लिए भाजपा अब महिला आरक्षण, परिसीमन और ‘एक देश-एक चुनाव’ (One Nation, One Election) जैसे विषयों को सबसे बड़े चुनावी और संवैधानिक सुधारों के रूप में पेश कर रही है। यह नए भारत की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है।
संवैधानिक और राजनीतिक बदलाव
केंद्र सरकार आने वाले समय के लिए एक बड़े ‘संवैधानिक और राजनीतिक बदलाव’ की जमीन तैयार कर रही है। यदि महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे फैसले धरातल पर उतरते हैं, तो 2029 का लोकसभा चुनाव देश की अब तक की सबसे अलग तस्वीर पेश करेगा। BJP इन ऐतिहासिक सुधारों को अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर करोड़ों महिला मतदाताओं को स्थायी रूप से अपने पाले में लाने की पुरजोर कोशिश में है।
क्या कहते है राजनीति विशेषज्ञ
राजनीति विशेषज्ञों का मानना है कि BJP का यह कदम एक सोची-समझी ‘पॉलिटिकल इंजीनियरिंग’ है, जिसका उद्देश्य 2029 में महिला वोट बैंक पर पूरी तरह कब्जा करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 816 करने का तर्क दरअसल पार्टी के भीतर पुरुष सांसदों के असंतोष को रोकना है, ताकि उनकी सीटें छीने बिना महिलाओं को जगह दी जा सके।
हालांकि, विश्लेषक यह चेतावनी भी दे रहे हैं कि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन करने से उत्तर और दक्षिण भारत के बीच राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विवाद गहरा सकता है, जिसे संभालना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।






























