Guru Nanak Jayanti 2022: जानिए गुरु नानक जयंती को क्यों कहा जाता है प्रकाश उत्सव और क्या है इस पर्व का महत्व

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 07 नवम्बर 2022, 05:30 AM Updated: 07 नवम्बर 2022, 05:30 AM
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गुरु नानक जयंती, जानिए सिख धर्म में क्यों मनाया जाता है ये पर्व

सिख (sikh) धर्म के संस्थापक और पहले सिख गुरु नानक जी (Guru Nanak Ji) की जयंती का पर्व मनाया जाने वाला है और देश में ये पर्व  8 नवम्बर को मनाया जाएगा. गुरु नानक जी का जन्म साल 1469 में कार्तिक पूर्णिमा के दिन हुआ था. इसलिए पूरी दुनिया में हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को गुरु नानक जयंती मनाई जाती है. वहीं इस दिन को प्रकाश उत्सव या गुरु पर्व भी कहा जाता है.

जानिए कौन थे सिख गुरु नानक जी

गुरु नानक जी सिख धर्म के संस्थापक और पहले सिख गुरु थी. वहीं कहा जाता है कि जब हिंदू धर्म (Hindu Dharam) पर मुगलों द्वारा अत्याचार किए जा रहे थे तब गुरु नानकदेव ने ही सिख धर्म की स्थापना की। सिक्ख एक तरह से हिंदू धर्म को बचाने वाली एक सेना है। वहीं हर साल कार्तिक पूर्णिमा पर गुरु नानकदेव की जयंती (Guru Nanak Dev Jayanti 2022) बड़ी ही धूम-धाम से मनाई जाती है।

इस वजह इस इस दिन को कहते हैं प्रकाश उत्सव

इस  तिथि को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र मानी गई है। इस तिथि पर नदी, तालाब व घरों में दीपक लगाकर प्रकाश किया जाता है। साथ ही इस दिन देव दीपावली का पर्व भी मनाया जाता है। वहीं इस वजह से इस दिन को  प्रकाश उत्सव भी कहा जाता है.

वहीं इस  प्रकाश पर्व पर गुरु द्वारों में विशेष पूजा और अरदास की जाती है। गुरुद्वारों पर रोशनी की जाती है साथ ही कई सारी प्रार्थना सभाओं का भी आयोजन होता है । प्रकाश पर्व के पहले दिन अखंड पाठ किया जाता है और दूसरे दिन भव्य चल समारोह निकाला जाता है, जिसमें निहंग हथियारों से हैरतअंगेज करतब दिखाते चलते हैं। इसके बाद लंगर का आयोजन किया जाता है। जिसमें सभी लोग मिलकर भोजन करते हैं और जरूरतमंदों को भोजन का दान भी किया जाता है।

जानिए क्यों है ये पर्व खास

सिख धर्म के अनुयायियों के लिए यह जयंती काफी खास होती है. वहीं गुरु नानक जयंती उत्सव पूरनमाशी दिवस या पूर्णिमा दिवस से दो दिन पहले शुरू हो जाता है. इसमें अखंड पाठ, नगर कीर्तन आदि जैसे अनुष्ठान शामिल हैं.  

आपको बता दें, कार्तिक पूर्णिमा साल भर की पवित्र पूर्णमासियों में से एक है. इस दिन किए गए दान-पुण्य के कार्य विशेष फलदायी होते हैं. इस दिन दीपदान करना बहुत शुभ माना जाता है.

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