Kharge demands CEC resignation: कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की मंगलवार को हुई अहम बैठक में चुनावी निष्पक्षता, वोटर लिस्ट में कथित धांधली और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया गया। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार व चुनाव आयोग पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। खरगे ने दो टूक कहा कि पिछले 12 सालों में लोकतांत्रिक नींव को सुनियोजित तरीके से कमजोर किया गया है और आज देश के संविधान व लोकतंत्र की रक्षा की जिम्मेदारी एक बार फिर पूरी तरह कांग्रेस के कंधों पर आ टिकी है।
‘कठपुतली बने CEC, पीएम दें इस्तीफा’| Kharge demands CEC resignation
मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्हें सत्तापक्ष की ‘कठपुतली’ करार दिया। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने खुद सीईसी की कार्यशैली को मनमाना और पक्षपाती बताया है। खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त को फौरन पद से हटाने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग कर डाली।
खरगे ने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत गरीबों और आम लोगों के नाम वोटर लिस्ट से गायब किए जा रहे हैं। उन्होंने इसकी तुलना नोटबंदी से करते हुए कहा, “नोटबंदी के वक्त गरीब बैंकों की कतारों में खड़ा था, लेकिन आज ‘वोटबंदी’ के जरिए उस गरीब को वोट डालने की लाइन से ही बाहर धकेला जा रहा है।”
युवाओं के हक पर वार: Form-6 में बदलाव का आरोप
युवाओं के मताधिकार का जिक्र करते हुए खरगे ने याद दिलाया कि दिसंबर 1988 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने वोटिंग की उम्र 21 से घटाकर 18 साल की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार युवाओं को मतदान के अधिकार से वंचित करने के लिए Form-6 के नियमों में चोरी-छिपे गैरकानूनी बदलाव कर रही है। खरगे ने तंज कसते हुए कहा, “सरकार युवाओं को नौकरियां तो दे नहीं पाई, अब उनके हाथ से वोट डालने का बुनियादी हक भी छीनना चाहती है।” उन्होंने महादेवपुरा, अलंद, हरियाणा और महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट विसंगतियों को मजबूती से उठाने के लिए राहुल गांधी की पीठ भी थपथपाई।
चुनाव आयोग के सामने रखीं 5 बड़ी मांगें
कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा कि आयोग में एसआईआर (SIR) का फैसला आखिर किसने लिया और दो चुनाव आयुक्तों को आंतरिक पोर्टल से बाहर क्यों रखा गया? इसके साथ ही कांग्रेस ने 5 शर्तें सामने रखीं:
- वोटर लिस्ट में किए गए सभी बड़े फेरबदल का पूरा डेटा सार्वजनिक हो।
- जिन मतदाताओं के नाम कटे हैं, उन्हें नोटिस और अपील का पूरा मौका मिले।
- सभी राजनीतिक पार्टियों को चुनावी आंकड़े सरल और समझने योग्य फॉर्मेट में समय पर दिए जाएं।
- गंभीर गड़बड़ियों और शिकायतों की तय समयसीमा के भीतर स्वतंत्र जांच कराई जाए।
- चुनावी फैसलों और आंकड़ों में सौ फीसदी पारदर्शिता बरती जाए।
राहुल गांधी का बड़ा दावा: ‘2024 का चुनाव पूरी तरह मैच फिक्सिंग’
वहीं, पार्टी सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी ने 2024 के आम चुनाव की वैधता पर ही सवाल खड़े कर दिए। राहुल ने दावा किया कि 2014 और 2019 के चुनावों में कुछ स्तर पर गड़बड़ियां थीं, लेकिन 2024 का लोकसभा चुनाव पूरी तरह ‘फिक्स’ और फर्जी था। उन्होंने कहा कि पहले ईवीएम (EVM) और फिर वोटर लिस्ट के जरिए खेल किया गया।
राहुल ने आगे कहा कि अगर सांसद ही ऐसी गड़बड़ियों से जीतकर आए हैं, तो संसद से पास होने वाले कानूनों की वैधता पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। उन्होंने नेताओं को सड़क पर उतरकर जन-आंदोलन खड़ा करने को कहा और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का उदाहरण देते हुए कहा कि लगातार दबाव बनाने से ही सरकार झुकेगी। उन्होंने आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखते हुए ‘सड़क से संसद तक’ इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों को साथ लेकर पूरी ताकत से लड़ने का आह्वान किया।














































