Sonam Wangchuk Protest: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के मुद्दे पर पिछले 19 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी पर सवाल उठाए हैं।
सचिन पायलट ने X पर की अनशन खत्म करने की अपील| Sonam Wangchuk Protest
सचिन पायलट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं और इसका उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने लिखा कि वह वांगचुक से आग्रह करते हैं कि वे अपना अनशन समाप्त करें। पायलट ने कहा कि आंदोलन के पीछे जो मुद्दा है, वह बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन लगातार भूख हड़ताल के कारण वांगचुक की सेहत तेजी से बिगड़ रही है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
पिछले 19 दिन से सोनम वांगचुक जी केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की माँग को लेकर अनशन पर बैठे हुए हैं, जिससे उनके स्वास्थ पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। मैं उनसे आग्रह करता हूँ कि वे अपना अनशन समाप्त करें।
पेपरलीक और विभिन्न अनियमितताओं के मामलों के कारण छात्रों और उनके परिवारों…
— Sachin Pilot (@SachinPilot) July 16, 2026
‘यह सिर्फ भावनात्मक मुद्दा नहीं, छात्रों के भविष्य का सवाल’
अपने बयान में सचिन पायलट ने कहा कि पेपर लीक और विभिन्न परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को गहरी चिंता में डाल दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूरी पार्टी का मानना है कि देश के युवा ही भारत का भविष्य हैं। ऐसे में उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय स्वीकार नहीं किया जा सकता।
पायलट ने कहा कि छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और केंद्र सरकार को इस पूरे मामले पर जवाब देना होगा। उनके मुताबिक यह केवल भावनात्मक बहस नहीं है, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।
19 दिन से जंतर-मंतर पर जारी है भूख हड़ताल
सोनम वांगचुक 28 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। वह ‘कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)’ के बैनर तले चल रहे उस प्रदर्शन में शामिल हुए थे, जो NEET परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के विरोध में आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की है। उनका आरोप है कि परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताओं की जवाबदेही तय होनी चाहिए और छात्रों के साथ न्याय होना चाहिए।
डॉक्टरों ने जताई स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता
लगातार 19 दिनों से भूख हड़ताल पर रहने की वजह से सोनम वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है। उनके डॉक्टरों के अनुसार, उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक कम हो चुका है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक भोजन न लेने के कारण उनका शरीर अब गंभीर अवस्था में पहुंच रहा है और यदि स्थिति ऐसी ही बनी रही तो उनके महत्वपूर्ण अंग भी प्रभावित हो सकते हैं। इसी वजह से उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिए मेडिकल निगरानी के निर्देश
वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने भी मामले में हस्तक्षेप किया है। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे हर दिन उनके स्वास्थ्य की निगरानी करें और जरूरत पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएं। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि किसी भी नागरिक का जीवन बेहद मूल्यवान है और सरकार का दायित्व है कि उसकी सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएं।
केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्हें वांगचुक की नियमित मेडिकल जांच और स्वास्थ्य निगरानी कराने पर कोई आपत्ति नहीं है।
अब निगाहें सरकार और आंदोलन दोनों पर
सोनम वांगचुक का आंदोलन अब केवल एक व्यक्ति की भूख हड़ताल तक सीमित नहीं रह गया है। यह NEET परीक्षा, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य जैसे मुद्दों पर राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन चुका है।





























