MP B.Ed College Scam: मध्य प्रदेश में नर्सिंग घोटाले की गूंज अभी थमी भी नहीं थी कि अब बीएड और शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेजों को लेकर एक और बड़ा मामला सामने आ गया है। जांच में ऐसे कई निजी कॉलेजों की हकीकत उजागर हुई है, जो कागजों पर तो पूरी तरह संचालित दिख रहे हैं, लेकिन जमीन पर उनका अस्तित्व ही सवालों के घेरे में है। कहीं कॉलेज की जगह खाली खेत मिला, कहीं स्कूल के छोटे से परिसर में बीएड संस्थान चलता मिला, तो कहीं एक ही जमीन पर कई संस्थानों के नाम दर्ज पाए गए। सबसे हैरानी की बात यह है कि ऑन-स्पॉट जांच में गंभीर गड़बड़ियां मिलने के बावजूद बरकतउल्ला विश्वविद्यालय (BU) ने केवल नोटरी से सत्यापित शपथ पत्र के आधार पर 125 निजी बीएड कॉलेजों को प्रवेश प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति दे दी।
खाली खेत में मिला कॉलेज का पता|MP B.Ed College Scam
जांच के दौरान भोपाल के विदिशा रोड स्थित ग्राम मुगलिया कोट का मामला सबसे चौंकाने वाला रहा। रिकॉर्ड के मुताबिक यहां खसरा नंबर 148/149/2/1 पर श्रीराम कॉलेज संचालित होना चाहिए, जहां हर साल 150 छात्र बीएड और बीएससी-बीएड की पढ़ाई करते हैं। लेकिन मौके पर पहुंचने पर वहां कॉलेज का कोई नामोनिशान नहीं मिला। संबंधित खसरा नंबर पर केवल खेती होती मिली। आसपास मौजूद इमारतों पर दूसरे संस्थानों के बोर्ड लगे थे, जबकि एक भवन निर्माणाधीन था। इसके बावजूद वर्षों से यहां दाखिले, परीक्षाएं और डिग्रियां जारी रहने के दावे सवाल खड़े कर रहे हैं।
स्कूल परिसर और एक कमरे से चल रहे संस्थान
गड़बड़ियां सिर्फ एक कॉलेज तक सीमित नहीं रहीं। भोपाल के बावड़िया कलां में सेवियर कॉलेज एक छोटे स्कूल परिसर में संचालित मिलता है। कॉलेज प्रबंधन ने स्वीकार किया कि पहले लाइब्रेरी और अन्य सुविधाओं में कमियां थीं, जिन्हें बाद में पूरा किया गया। वहीं छात्रों की नियमित उपस्थिति भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं होने की बात सामने आई।
इसी तरह साकेत नगर में कागजों पर दर्ज कमलनाथ बीपीएड कॉलेज के पते पर केवल एक कमरा मिला। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि संस्थान दूसरी जगह संचालित हो रहा है और वर्षों पहले स्थान परिवर्तन के लिए आवेदन किया गया था। सवाल यह है कि बिना नए पते का सत्यापन किए इतने वर्षों तक प्रवेश और मान्यता कैसे जारी रही।
निरीक्षण में खामियां मिलीं, फिर भी मिल गई मंजूरी
बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के अधीन 129 बीएड कॉलेज हैं, जिनमें 127 निजी संस्थान शामिल हैं। कार्यपरिषद के निर्देश पर हुए भौतिक निरीक्षण में 25 कॉलेजों में गंभीर कमियां, पांच में भारी अनियमितताएं, दो कॉलेज पंजीकृत पते पर नहीं मिले और तीन दूसरे स्थानों से संचालित पाए गए। इन निष्कर्षों के बाद कार्रवाई की उम्मीद थी, लेकिन विश्वविद्यालय ने 24 जून की बैठक में कॉलेजों से सिर्फ नोटरीकृत हलफनामा लेकर 125 निजी कॉलेजों को सशर्त संबद्धता और प्रवेश प्रक्रिया की अनुमति दे दी। संस्थानों ने शपथ पत्र देकर दावा किया कि वे सभी मानकों का पालन कर रहे हैं और भविष्य में कमी मिलने पर कार्रवाई स्वीकार करेंगे।
मंत्री की नोटशीट से बढ़ा विवाद
मामले ने तब नया मोड़ लिया जब उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार की एक नोटशीट सामने आई। दस्तावेजों के अनुसार, मंत्री के निर्देश के बाद 82 बीएड कॉलेजों की प्रोफाइल ई-प्रवेश पोर्टल पर पहले ही ‘ओके’ कर दी गई थी। इससे कार्यपरिषद की अंतिम मंजूरी से पहले ही इन कॉलेजों के लिए प्रवेश का रास्ता खुल गया। इस पर परिषद के कुछ सदस्यों ने आपत्ति भी दर्ज कराई।
रजिस्ट्रार प्रो. समर बहादुर सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि जिन कॉलेजों को पोर्टल पर मंजूरी दी गई, वे निरीक्षण में मानकों के अनुरूप पाए गए थे। हालांकि इससे यह सवाल बना हुआ है कि यदि कॉलेज पूरी तरह योग्य थे, तो उनसे शपथ पत्र लेने की जरूरत क्यों पड़ी।
दो कॉलेजों पर जांच, लेकिन उठ रहे बड़े सवाल
कार्यपरिषद ने श्रीराम कॉलेज और बगलामुखी कॉलेज के मामले में जांच कराने का फैसला लिया है। एक सेवानिवृत्त जिला एवं प्रधान न्यायाधीश पूरे मामले की जांच करेंगे। यह पता लगाया जाएगा कि यदि निर्धारित स्थान पर कॉलेज मौजूद नहीं था, तो वहां के छात्रों ने परीक्षाएं कैसे दीं और डिग्रियां किस आधार पर जारी हुईं।
करोड़ों के शिक्षा कारोबार पर उठे सवाल
उच्च शिक्षा मंत्री का कहना है कि छात्रों का भविष्य प्रभावित न हो, इसलिए शपथ पत्र लेकर प्रवेश प्रक्रिया जारी रखने का निर्णय लिया गया। लेकिन प्रदेश में करीब 600 शिक्षक प्रशिक्षण कॉलेज और 58 हजार से ज्यादा बीएड सीटों के बीच यह मामला पूरे निजी शिक्षा तंत्र पर सवाल खड़े कर रहा है। हर साल हजारों छात्र लाखों रुपये की फीस देकर इन संस्थानों में दाखिला लेते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या शिक्षा व्यवस्था में कागजी औपचारिकताएं जमीनी सच्चाई से ज्यादा अहम हो गई हैं, और क्या छात्रों का भविष्य सिर्फ हलफनामों के भरोसे छोड़ा जा सकता है?
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