Pune Moshi Accident: महाराष्ट्र के पुणे जिले के पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका क्षेत्र में स्थित मोशी कचरा डिपो में हुए दर्दनाक हादसे के बाद 81 घंटे तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन रविवार सुबह पूरा कर लिया गया। कचरे का विशाल पहाड़ अचानक भूस्खलन की तरह खिसकने से कई लोग मलबे में दब गए थे। बचाव अभियान के दौरान 9 लोगों के शव बरामद किए गए, जबकि 14 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
इस हादसे ने एक बार फिर कचरा प्रबंधन व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद प्रशासन ने मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है। साथ ही महाराष्ट्र सरकार ने मामले की जांच के आदेश भी दिए हैं।
बारिश के बीच अचानक खिसका कचरे का पहाड़| Pune Moshi Accident
यह हादसा 8 जुलाई बुधवार दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ था। उस समय इलाके में लगातार बारिश हो रही थी। इसी दौरान मोशी कचरा डिपो में जमा कई साल पुराने कचरे का विशाल ढेर अचानक खिसक गया। यह घटना इतनी तेज थी कि कुछ ही सेकंड में पूरा कचरे का पहाड़ भूस्खलन की तरह नीचे आ गया।
कचरे का मलबा वहां मौजूद तीन मंजिला प्रशासनिक इमारत पर जा गिरा, जिससे पूरी इमारत दब गई। हादसे के वक्त इमारत के आसपास करीब 23 लोग मौजूद थे, जो इस घटना की चपेट में आ गए। कचरे का भारी ढेर गिरते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन को सूचित किया गया, जिसके बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंचे और मलबा हटाने का काम शुरू किया गया।
NDRF और सेना ने संभाला मोर्चा, जहरीली गैस बनी चुनौती
हादसे की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और सेना की टीमों को भी रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया गया। दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस ने भी बचाव कार्य में लगातार सहयोग किया। रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कचरे के मलबे से निकल रही जहरीली मीथेन गैस थी। गैस के कारण बचावकर्मियों के लिए लंबे समय तक वहां काम करना जोखिम भरा था। इसके अलावा लगातार बारिश की वजह से राहत कार्य में भी कई मुश्किलें आईं।
मलबे को हटाने के लिए आधुनिक मशीनों जैसे पोकलेन और जेसीबी की मदद ली गई। वहीं दबे हुए लोगों का पता लगाने के लिए डॉग स्क्वॉड की भी सहायता ली गई। बचावकर्मियों ने बेहद सावधानी के साथ कंक्रीट संरचना और कचरे के भारी ढेर को हटाया।
81 घंटे बाद खत्म हुआ बचाव अभियान
बुधवार से शुरू हुआ यह रेस्क्यू ऑपरेशन रविवार सुबह तक लगातार चलता रहा। करीब 81 घंटे तक चले इस अभियान के बाद प्रशासन ने इसे आधिकारिक रूप से समाप्त करने की घोषणा की। इस दौरान कुल 9 लोगों की मौत की पुष्टि हुई, जबकि 14 लोगों को सुरक्षित बचाया गया। हालांकि हादसे में कई परिवारों ने अपने प्रियजनों को खो दिया।
पीड़ित परिवारों को 25 लाख मुआवजा और नौकरी का आश्वासन
हादसे के बाद प्रशासन और संबंधित प्रोजेक्ट कंपनी ने मृतकों के परिवारों के लिए 25 लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है। इसके अलावा परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन भी दिया गया है। महाराष्ट्र सरकार ने घटना की जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि हादसे के कारणों और जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके। प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों के बीच अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
मोशी कचरा डिपो हादसे ने शहरों में कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इतने बड़े कचरे के ढेर के रखरखाव और सुरक्षा इंतजामों को लेकर अब जिम्मेदार विभागों पर भी सवाल उठ रहे हैं।































