जगन्नाथ पुरी का वो रहस्यमयी कुआँ, जिसका पानी आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक अनसुलझी पहेली है! Gurudwara Baoli Sahib

Shikha Mishra | Nedrick News Puri Published: 04 जुलाई 2026, 09:35 PM Updated: 04 जुलाई 2026, 09:43 PM
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Gurudwara Baoli Sahib:  जब भी हम ओडिशा के पुरी का नाम सुनते हैं, तो हमारे मन में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा और विशाल समंदर की तस्वीरें आती हैं। ओडिशा का पुरी शहर जगन्नाथ मंदिर के लिए तो विश्व प्रसिद्ध है ही, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी पावन धरती पर सिखों के पहले गुरु, श्री गुरु नानक देव जी के पवित्र चरण भी पड़े थे? लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसी पवित्र पुरी की धरती पर सिखों के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी का एक ऐसा चमत्कार छिपा है, जिसे देखकर आज के वैज्ञानिक भी हैरान हैं? एक ऐसा कुआँ, जहाँ चारों तरफ खारा समंदर होने के बावजूद, पीने का अमृत जैसा मीठा पानी निकलता है! आज के लेख में हम चलेंगे गुरुद्वारा बाओली साहिब और जानेंगे इसके पीछे का बेहद दिलचस्प इतिहास।

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जब गुरु नानक देव जी समंदर के किनारे बैठे

दरअसल, यह बात है सन 1510 की, जब गुरु नानक देव जी अपनी ‘उदासी’ यानी धार्मिक यात्रा के दौरान अपने शिष्यों, भाई मरदाना और भाई बाला के साथ जगन्नाथ पुरी पहुंचे थे। कहा जाता है कि गुरु नानक देव जी ने महाप्रभु जगन्नाथ के मंदिर में जाकर ‘आरती’ भी की थी, जहाँ उन्होंने ब्रह्मांड की आरती का वो प्रसिद्ध शबद गाया था— “गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने तारिका मंडल जनक मोती…”। मंदिर के दर्शन के बाद, गुरु नानक देव जी समंदर के किनारे इस जगह पर आकर ध्यान में बैठ गए।

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खारे समंदर के बीच से मीठे पानी सोता

अब कहानी में आता है एक बड़ा मोड़। पुरी में हर तरफ समंदर होने के कारण वहाँ का पानी बहुत खारा (नमकीन) था। भाई मरदाना जी को बहुत तेज प्यास लगी। उन्होंने गुरु जी से कहा, “गुरु जी, यहाँ तो चारों तरफ पानी है, लेकिन पीने लायक एक बूंद नहीं है।” गुरु नानक देव जी ने मुस्कुराते हुए जमीन की तरफ इशारा किया और भाई मरदाना से वहाँ की रेत हटाने को कहा। जैसे ही वहाँ गड्ढा खोदा गया, खारे समंदर के बीच से मीठे पानी का एक चश्मा (सोता) फूट पड़ा!
यही वो पवित्र कुआँ है जिसे आज हम ‘बाओली साहिब’ (Baoli Sahib) के नाम से जानते हैं। आज भी इस कुएं का पानी उतना ही मीठा और शुद्ध है।

आज इस पवित्र स्थान पर एक बेहद खूबसूरत गुरुद्वारा साहिब (Gurdwara Sahib) बना हुआ है, जिसकी देखरेख शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) और स्थानीय संगत करती है। यह गुरुद्वारा जगन्नाथ मंदिर से मात्र डेढ़ से दो किलोमीटर की दूरी पर, चक्रतीर्थ रोड पर स्थित है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु इस पवित्र बाओली का जल ‘अमृत’ के रूप में ग्रहण करते हैं। यह स्थान हिंदू-सिख एकता और गुरु जी की महिमा का एक अद्भुत प्रतीक है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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