One Case One Data System: भारतीय न्यायपालिका में डिजिटल क्रांति की शुरुआत करते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने ‘वन केस वन डेटा’ (One Case One Data) सिस्टम लॉन्च किया है। 11 मई 2026 को शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य देश की सभी अदालतों-तालुका से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक-के डेटा को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाना है, ताकि न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता आए और मामलों में होने वाली देरी को कम किया जा सके।
देश की न्यायिक व्यवस्था को ज्यादा तेज, आसान और तकनीक से जोड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इन बड़ी डिजिटल पहलों की घोषणा की। कोर्ट की कार्यवाही शुरू होने से पहले इस सिस्टम की जानकारी देते हुए बताया गया कि अब भारतीय न्यायपालिका पूरी तरह से ‘एकीकृत डिजिटल सिस्टम’ की ओर बढ़ रही है, जिससे आम नागरिक और वकील घर बैठे केस की पूरी हिस्ट्री देख सकेंगे
‘One Case One Data System’ से एक जगह मिलेगी पूरी जानकारी
वन केस वन डेटा’ से एक जगह मिलेगी पूरी जानकारीसीजेआई सूर्यकांत (CJI Surya Kant) ने बताया कि न्यायपालिका ने “वन केस वन डेटा” नाम की नई डिजिटल पहल शुरू की है। इसके तहत देशभर के हाईकोर्ट, जिला अदालतों और तालुका अदालतों की जानकारी को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसी भी केस से जुड़ी जानकारी अलग-अलग अदालतों में खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का पूरा रिकॉर्ड एक ही जगह उपलब्ध होगा। इससे केस ट्रैक करना और उसकी निगरानी करना पहले से काफी आसान हो जाएगा।
मामलों की सुनवाई होगी ज्यादा व्यवस्थित
सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका एक ऐसे आधुनिक केस मैनेजमेंट सिस्टम पर काम कर रही है, जिससे अदालतों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा। साथ ही मामलों की सुनवाई की प्रक्रिया भी ज्यादा व्यवस्थित और पारदर्शी होगी।
इस पहल का मकसद न्यायिक डेटा को एक साथ जोड़ना, रिकॉर्ड्स को डिजिटल बनाना और लंबित मामलों पर बेहतर नजर रखना है। इससे न केवल सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज होगा, बल्कि दस्तावेजों का ऑनलाइन सत्यापन (Verification) भी पलक झपकते ही संभव हो सकेगा।
आम लोगों और वकीलों को भी मिलेगी सुविधा
नई डिजिटल व्यवस्था से सिर्फ अदालतों को ही नहीं, बल्कि आम लोगों, वकीलों और न्यायपालिका से जुड़े सभी लोगों को फायदा मिलेगा। केस से जुड़ी जानकारी हासिल करना आसान होगा और काम में पारदर्शिता बढ़ेगी। वकीलों को अब केस की स्टेटस रिपोर्ट या पुराने दस्तावेजों के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे, क्योंकि सब कुछ एक क्लिक पर उपलब्ध होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने लॉन्च किया AI चैटबॉट ‘सु-सहायक’
इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपनी वेबसाइट पर “सु-सहायक” (Su-Sahay) नाम का AI आधारित चैटबॉट भी लॉन्च किया है। यह चैटबॉट लोगों को सुप्रीम कोर्ट की सेवाओं तक आसान पहुंच देने और न्यायिक प्रक्रियाओं को समझने में मदद करने के लिए तैयार किया गया है।
सीजेआई ने बताया कि इसे राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के साथ मिलकर विकसित किया है। यह चैटबॉट आम नागरिकों के लिए डिजिटल माध्यम से न्याय तक पहुँच को सरल बनाने में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।
क्या करेगा ‘सु-सहायक’ चैटबॉट?
यह AI चैटबॉट लोगों को सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रियाओं, जरूरी दिशा-निर्देशों, केस फाइलिंग सिस्टम और केस से जुड़ी जानकारी समझने में मदद करेगा। वेबसाइट पर जरूरी जानकारी ढूंढना भी अब इसके जरिए आसान हो जाएगा।
इसका मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों के लिए न्यायिक सेवाओं को ज्यादा सरल और यूजर फ्रेंडली बनाना है, ताकि तकनीक के माध्यम से न्याय की पहुंच हर व्यक्ति तक आसान हो सके।
तकनीक के जरिए बदलेगी न्याय व्यवस्था
सीजेआई सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के अधिकारियों और बार सदस्यों की सराहना करते हुए कहा कि इन डिजिटल परियोजनाओं को सफल बनाने में सभी का बड़ा योगदान रहा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि आने वाले समय में भी न्यायपालिका तकनीक आधारित सुधारों पर लगातार काम करती रहेगी, ताकि देश के हर नागरिक को तेज, आसान और प्रभावी न्यायिक सेवाएं मिल सकें।




























