Sikhism cardinal sins: अभी हाल ही में पंजाब के सीएम भगवंत मान ने पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी करने को लेकर कानून को सख्त करते हुए एक बिल पास किया है जिसके मुताबिक अब से जो पवित्र ग्रंथ साहिब की अपमान करेगा उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई जायेगी, साथ ही उस पर 25 हजार रूपय का जुर्माना भी लगाया जायेगा। ये फैसला इस बात का सबूत है कि सिख धर्म में पवित्र ग्रंथ साहिब का अपमान न केवल एक पाप है बल्कि कानून भी अपराध है.. सिख गुरुओ ने सिखों को वाकई में कैसे जीवन जीना है, कैसे उनकी दिनचर्या होनी चाहिए, धर्म की रक्षा के लिए उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं.. सबकुछ अपने अनुयायियो को बताया है।
उनके पंच ककार को धारण करना.. केशों का न कटवाना, गुरबाणी का पाठ करना और सुनना.. जैसे कई नियम है.. जो उन्हें सतकर्म की राह पर जाने के लिए प्रेरित करते है.. लेकिन क्या आपने सोचा है कि सिख धर्म में सबसे बड़ा पाप क्या है… आखिर सिख संगतो को क्या नहीं करना चाहिए जो गुरुओ की बाणियों के खिलाफ है.. जिसके लिए सिख गुरुओं ने भी मनुष्य के लिए वर्जित बताया है। अपने इस लेख में हम जानेंगे कि क्या है सिख धर्म का सबसे बड़ा पाप।
सिख धर्म में सबसे बड़ा पाप क्या है? – Sikhism cardinal sins
दरअसल सिख धर्म के हर एक गुरु ने धर्म के रास्ते पर चलते हुए मानवता की सेवा का संदेश दिया है। उन्होंने सिखों के लिए संगत सेवा को परम धर्म बताया है। तो वहीं 11वें गुरु श्री गुरु ग्रंथ साहिब में सिखों के लिए हर एक सवाल का जवाब मौजूद है। इसमें ये भी बताया गया है कि सच्चे सिख को क्या क्या नहीं करना चाहिए जो कि गंभीर वर्जित पाप की श्रैणी में आते है… सिखधर्म में गंभीर वर्जित कार्य को बज्र कुरुहत कहा जाता है। जिसमें मुख्य रूप से 4 पापो को शामिल किया गया है।
1.. दाढ़ी और सिर के केशों का कत्ल करना – यानि की जो सिख है उन्हें हर हाल में अपने केशों की रक्षा करनी ही होगी.. वो न तो अपनी दाढ़ी सेव करा सकते है और न ही अपने सिर के बालो को कटवा सकते है। दशम गुरू श्री गोबिंद सिंह जी के पंच ककारो में केश एक अहम ककार है। जो सिख धर्म की पहचान का एक बड़ा साक्ष्य है।
व्याभिचार Sikhism cardinal sins
2, व्याभिचार..अपने जीवनसाथी के साथ धोखेबाजी करना- सिख धर्म में साफ बताया गया है कि आप अपने साथी से भले ही कितने समय तक कितनी भी दूर रहे लेकिन आपको अपने साथी के साथ ईमानदार रहना ही होगी.. अगर किसी ने धोखेबाजी की, बेवफाई की तो वो बड़े पाप का भागी होगा। सिख धर्म कहता है कि अपने जीवनसाथी के अलावा न तो आपको किसी की तरफ देखना है और न ही उसके लिए विकृत सोच रखनी है। ये श्री गुरु ग्रंथ में बतायें महापाप में गिना जाता है।
तंबाकू का सेवन (Tobacco) – Sikhism cardinal sins
3, तंबाकू का सेवन करना- पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अनुसार सिख धर्म में तंबाकू और किसी भी तरह का नशा करना पूरी तरह से व्रजित है। दसवे गुरु ने 1699 में खालसा के स्थापना के वक्त ही तंबाकू को शामित और अशुद्ध कह कर गैर कानूनी घोषित कर दिया था। खासकर अमृतधारी खालसा को तो सख्ती से हिदायत दी गई है कि वो तंबाकू का सेवन न करें, क्योंकि ये व्यक्ति को अशुद्ध औऱ अपवित्र कर देता है, इसे मति भ्रष्ट हो जाती है.. जो उन्हें गुरु के सानिध्य से दूर ले जाता है। कहा जाता है कि दशवी पातशाही की घोड़े ने भी तंबाकू से खेत के पास से गुजरने से इंकार कर दिया था, जो प्रमाण है कि तंबाकू अपवित्र चीज है।
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4, हलाल मांस का सेवन- सिख धर्म में हर एक सिख के लिए हलाल मांस खाना वर्जित है। हालांकि सिख धर्म में झटके से मारे गए जानवर का मांस खाया जा सकता है.. सिख धर्म कहता है कि किसी को एक बार में मार देने से उसकी आत्मा तड़पती नही है लेकिन हलाल का मांस जानवर को तड़पा तड़पा कर मार कर बनाया जाता है, जो पूरी तरह से निषेध है। सिख धर्म किसी को भी अपने मजे के लिए तड़पाने की इजाजत नहीं देता है। इसीलिए हलाल का मांस भी पूरी तरह से वज्रित है।
इन प्रमुख पापो के अलावा गुरु साहिबानो की बाणियों को मानने के बजाये उनकी अवहेलना करना, पवित्र श्री गुरु ग्रंथ साहिब का अपमान करना, गुरुओं के ज्ञान की अवहेलना और निंदा करना भी सिख धर्म में पाप की श्रैणी में रखा गया है। सिख गुरुओ ने सदैव व्यक्ति को सच्चा सिख बनने के लिए कामवासना, गुस्सा, लालच, मोह और घमंड से खुद को दूर रखने की सलाह दी है। ये पांच कमियां व्यक्ति को उनके गुरु से, इक ओंकार से दूर ले कर चले जाते है, जो व्यक्ति के पतन का कारण बनता है। सिख धर्म बताता है कि एक सच्चा सिख बनने के लिए व्यक्ति को इन पापो से दूर रहना चाहिए.. तभी गुरु के सानिध्य को प्राप्त किया जा सकता है। आपको हमारी ये वीडि कैसी लगी हमें कमेंट करके जरू बतायें।




























