40 लाख की विदेश नौकरी भी नहीं दे पाई सुकून UK में ड्रीम लाइफ से तंग आकर भारत लौटा युवक | UK job story India return

Nandani | Nedrick News UK Published: 13 Apr 2026, 04:06 PM | Updated: 13 Apr 2026, 04:06 PM

UK job story India return: आज के दौर में विदेश में नौकरी करना लाखों युवाओं का सपना बन चुका है। यूके, अमेरिका और यूरोप जैसे देशों में काम करना अक्सर बेहतर भविष्य, ऊंची सैलरी और शानदार लाइफस्टाइल से जोड़ा जाता है। यही वजह है कि हर साल बड़ी संख्या में युवा इन देशों का रुख करते हैं।

लेकिन इस चमकदार तस्वीर के पीछे एक ऐसी सच्चाई भी छिपी होती है, जिसके बारे में कम ही लोग खुलकर बात करते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक कहानी ने इसी हकीकत को सामने ला दिया है।

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शानदार सैलरी, फिर भी अधूरापन | UK job story India return

यह कहानी है फिजियोथेरेपिस्ट मानव शाह की, जिन्हें यूके में करीब 40 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी मिली थी। शुरुआत में सब कुछ बिल्कुल सपने जैसा लग रहा था अच्छी कमाई, बेहतर सुविधाएं और एक इंटरनेशनल करियर। लेकिन वक्त के साथ यह ‘ड्रीम जॉब’ उन्हें वैसी खुशी नहीं दे पाई, जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी। उन्होंने महसूस किया कि पैसा होने के बावजूद उनके अंदर एक खालीपन बढ़ता जा रहा है।

 

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‘जेल’ जैसी लगने लगी जिंदगी

मानव शाह ने अपनी कहानी में बताया कि धीरे-धीरे उनकी नौकरी एक बंधन जैसी लगने लगी थी। रोज़ाना 9 से 5 की रूटीन ने उन्हें मानसिक रूप से थका दिया था। उनके शब्दों में, यह लाइफस्टाइल बाहर से जितनी आकर्षक दिखती है, अंदर से उतनी ही सीमित और दबाव भरी हो सकती है। उन्हें ऐसा महसूस होने लगा था जैसे वे किसी तय दायरे में कैद हो गए हों जहां पैसा तो है, लेकिन आजादी नहीं।

अकेलापन बना सबसे बड़ी चुनौती

विदेश में रहने का सबसे मुश्किल हिस्सा उनके लिए अकेलापन साबित हुआ। परिवार, दोस्त और अपनेपन से दूर रहना उनके लिए आसान नहीं था। उन्होंने महसूस किया कि अपनों के साथ बिताया गया समय किसी भी बड़ी सैलरी से ज्यादा मायने रखता है। यही एहसास धीरे-धीरे उनके फैसले को प्रभावित करने लगा।

एंटरप्रेन्योर बनने का सपना

मानव के मन में शुरू से ही कुछ अपना करने का सपना था। लेकिन विदेश की नौकरी में वह इस दिशा में कदम नहीं बढ़ा पा रहे थे। आखिरकार उन्होंने एक बड़ा और जोखिम भरा फैसला लिया उन्होंने अपनी हाई-पेइंग जॉब छोड़कर भारत लौटने का निर्णय किया, ताकि अपने तरीके से करियर बना सकें और अपने सपनों को जी सकें।

भारत में मिला संतुलन

भारत लौटने के बाद मानव शाह ने महसूस किया कि यहां जीवन ज्यादा संतुलित है। खर्च कम होने की वजह से बचत भी बेहतर हो पाती है और मानसिक शांति भी ज्यादा मिलती है। उनके मुताबिक, भारत में रहने से उन्हें अपने लोगों के करीब रहने का मौका मिला, जो उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है।

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं

जैसे ही मानव शाह की यह कहानी सोशल मीडिया पर सामने आई, इसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। कई यूजर्स ने माना कि पैसा ही सब कुछ नहीं होता और जिंदगी में संतुलन और मानसिक शांति ज्यादा जरूरी है। वहीं, कुछ लोगों ने उनके फैसले की सराहना करते हुए कहा कि अपने मन की सुनना सबसे बड़ी बहादुरी है।

क्या सच में विदेश ही बेहतर है?

मानव शाह की कहानी एक अहम सवाल खड़ा करती है क्या विदेश में नौकरी करना ही सफलता की असली पहचान है? यह कहानी बताती है कि हर चमकती चीज सोना नहीं होती। करियर और पैसों के साथ-साथ मानसिक संतुलन, आजादी और अपनों का साथ भी उतना ही जरूरी है।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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