Sikhism in Bangladesh: 16 दिसंबर 1971, ये वो तारीख है जब भारत के कारण एशिया के नक्शे में बड़ा बदलाव आ गया। और एक और नए आजाद देश को मान्यता मिली। जी हां ये देश था बांग्लादेश। जो कि पूर्वी पाकिस्तान से बांग्लादेश बना था। भारत ने पाकिस्तान की बांधी गुलामी की न केवल बेड़ियां खोली थी बल्कि बांग्लादेश के करीब एक करोड़ शरणार्थियों को भी भारत में शरण दी थी, जिसमें सभी धर्मों के लोग थे.. लेकिन सबसे ज्यादास असर हिंदुओ और सिखों पर देखने को मिला था।
कभी लाखों की सिख आबादी वाले बंग्लादेश में एक नहीं दो दो सिख गुरुओ की निशानियां मौजूद है, लेकिन फिर भी सिखों को यहां संघर्ष करना पड़ रहा है। अपने इस लेख में हम बांग्लादेश में सिख धर्म के फलने फूलने और मौजूद समय में वहां रहने वाले सिखों की स्थिति को लेकर चर्चा करेंगे। साथ ही कैसे सिख अपनी धरोहर को बचाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ रहे है।
बांग्लादेश के बारे में
16 दिसंबर को हर साल मुक्ति दिवस के रूप में मनाने वाले बांग्लादेश को पहली बार भारत ने ही अलग देश के रूप में मान्यता दी थी। 15 अगस्त 1947 को जब भारत को आजादी मिली थी तब एक तरफ पंजाब का हिस्सा पश्चिमी पाकिस्तान बना था औऱ बंगाल का हिस्सा पूर्वी पाकिस्तान.. लेकिन पाकिस्तान की सेना पूर्वी पाकिस्तान को गुलाम की तरह मानते थे, जिसके कारण वहां अस्थिरता हुई थी.. नतीजा भारत की मदद से पूर्वी पाकिस्तान को आजाद कराया गया.. मौजूदा समय में भारत और बांग्लादेश 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा सांझा करता है।
भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा
जिसमें भारत के असम, पश्चिम बंगाल, मिजोरम, मेघालय और त्रिपुरा राज्य की सीमा बांग्लादेश से मिलती है। बांग्लादेश का गठन 16 दिसंबर 1971 को हुआ था, तब से ही ये भारत के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा और विदेश नीति को मजबूती देने में अहम भूमिका निभा रहा है। इतना ही नहीं चीन की ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ नीति का मुकाबला करने में बांग्लादेशा भारत की सबसे बड़ी ताकत है। भारत और बांग्लादेश का इतिहात संस्कृति और विरासत.. सभी एक दूसरे के साथ साझा ही है.. वर्तमान में बाग्लादेश एक इस्लामिक देश है, जिसका अधिकारिक नाम बांग्लादेश जनवादी गणराज्य है।
बांग्लादेश में सिखों की स्थिति काफी ख़राब
जो कि दक्षिण एशिया का एक देश है, इसके तीन तरफ से भारत की सीमा है तो वहीं दक्षिण में बंगाल की खाड़ी है, और दक्षिण पूर्व में म्यांमार देश है। बांग्लादेश का क्षेत्रफल 148,460 वर्ग किलोमीटर है, तो वहीं इसकी आबादी 2023 के जनसंख्या गणना के बाद 17 करोड़ 14 लाख 66 हजार 990 के आपसपास थी। जो कि दुनिया की आठवी सबसे आबादी वाला देश कहलाता है। बांग्लादेश में करीब 91.04 प्रतिशत आबादी इस्लाम को मानने वाली है, साथ ही 7.90 प्रतिशत हिंदू धर्म को मानती है, तो वहीं मात्र 0.12 प्रतिशत आबादी ही है जो सिख धर्म के अंतर्गत आती है। हालांकि आज के समय में बांग्लादेश में सिखों की स्थिति काफी खराब है। और पाकिस्तान की ही तरह यहां भी सिख धरोहरो का संरक्षण नहीं होता। जिससे यहां की कट्टरपंथी विचारधारा साफ रूप से प्रदर्शित होती है।
Sikhism इन बांग्लादेश
जब आप बांग्लादेश में सिखों के बारे में बात करते है तो आपको एहसास होगा कि एक वक्त पर बांग्लादेश का देश सिखो के लिए कितना खास होगा। यहां पर न केवल प्रथम आदि गुरु ने कई यात्राएं की थी बल्कि उनके ही पद चिह्न पर चलते हुए नौवे गुरु गुरु तेग बहादुर के भी पवन चरण इस धरती पर पड़े थे। यहां गुरु साहिब ने सच्चा सौदा का संदेश दिया था। अंधविश्वास और पाखंड से जकड़े लोगों को सिक्खी का सही मतलब समझाया था। इतना ही नहीं ये धरती अग्रहरि सिखो का धरती है।
गुरुद्वारा संगत टोला – Gurdwara Sangat Tola
आपको जानकर हैरानी होती कि आजादी के समय बंगाल में करीब 1 लाख सिख रहा करते थे। जिसमें बंटवारे के बाद करीब 70 प्रतिशत आबादी ने भारत के बजाये बंग्लादेश को चुना था.. वहां मौजूद सबसे प्रसिद्ध गुरुद्वारा ढाका का गुरुद्वारा नानक शाही है.. जो असल में प्रथम गुरु गुरु नानक देव जी के ढाका की यात्रा का प्रतीक है। इसके अलावा गुरुद्वारा संगत टोला भी मौजूद है। ये गुरुद्वारा नौवे गुरु तेग बहादुर के उन 2 सालो के प्रवास के याद में मौजूद है जब 1666 से लेकर 1668 तक वो यहां रहे थे, यहां उन्होंने केवल सिख धर्म का प्रचार ही नहीं किया था, बल्कि पानी के कुएं खुदवायें, और गरीब संगत के लिए लंगर शुरु किये थे।
गुरुद्वारे से कभी टैक्स न लेने का एलान
गुरु साहिब की इस यात्रा की एक निशानी गुरु साहिब के एक तस्वीर के रूप में गुरुद्वारा संगत साहिब में रखी हुई है। ये स्थान पूर्वी भारत में सिख धर्म के प्रचार का मुख्य केंद्र बन गया था। इतना ही नहीं गुरु साहिब से प्रभावित होकर मुगल गर्वनर शाइस्ता खान ने गुरु साहिब के पवित्र निवास स्थान की याद में बने गुरुद्वारे से कभी टैक्स न लेने का एलान किया था। वैसे तो आजादी के वक्त यहां सिखों की अच्छी खासी आबादी थी लेकिन मौजूदा समय में अलग अलग रिपोर्ट्स के अनुसार बांग्लादेश में करीब 41 हजार सिख अभ भी रहते है।
जो स्थाई रूप से नहीं रहते है..बल्कि ज्यादातर शरणार्थी के रूप में रहते है। वहीं बांग्लादेश गुरुद्वारा प्रबंधन बोर्ड यहां के सिखों के हितो की रक्षा करता है। ज्यादातर सिख यहां भारतीय उच्चायोग और व्यापार के काम से जुड़े है। मौजूदा समय में सिखों की स्थिति बांग्लादेश में कुछ अच्छी नहीं है.. सरकार की तरफ से भी उन्हें मदद नहीं दी जाती है.. लेकिन वहां के सिख लगातार अपनी धरोहरों को बचाने की लड़ाई ल़ड़ रहे है। जिसमें भारत की सरकार भी उन्हें सपोर्ट कर रही है।





























