Ghaziabad: उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्रीय बिजली मंत्रालय ने हाल ही में (अप्रैल 2026) यह स्पष्ट किया है कि स्मार्ट मीटरों (Smart Meter) को प्रीपेड मोड में बदलना पूरी तरह से उपभोक्ताओं की लिखित सहमति पर निर्भर है। लेकिन इस स्पष्टीकरण के बावजूद, गाजियाबाद सहित प्रदेश के कई जिलों से बिना सूचना के मीटर प्रीपेड करने और खातों में गलत जानकारी दर्ज होने की तमाम शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे हज़ारों उपभोक्ताओं की बिजली अचानक गुल हो गई है।
क्या है पूरा मामला
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि गाजियाबाद (Ghaziabad) और पूरे उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग द्वारा स्मार्ट मीटरों (Smart Meter) को जबरन प्रीपेड मोड में बदलने और उसके कारण होने वाली तकनीकी समस्याओं से जुड़ा है। मुख्य विवाद यह है कि उपभोक्ताओं को सूचित किए बिना उनके पुराने पोस्टपेड कनेक्शन को मोबाइल की तरह “रिचार्ज” (प्रीपेड) आधारित बना दिया गया है। नियमों (CEA Guidelines) के अनुसार, किसी भी मीटर को प्रीपेड करने के लिए उपभोक्ता की लिखित सहमति अनिवार्य है।
Ghaziabad सहित पूरे यूपी में लगभग 70 लाख उपभोक्ताओं के मीटर उनकी जानकारी के बिना प्रीपेड मोड में बदल दिए गए। खातों में गलत नंबर दर्ज होने के कारण उपभोक्ताओं को बैलेंस कम होने या बिजली कटने के SMS अलर्ट नहीं मिले। जब बैलेंस ‘नेगेटिव’ हुआ, तो सिस्टम ने बिना किसी पूर्व चेतावनी के स्वचालित रूप से (Automatically) बिजली काट दी।
कई उपभोक्ताओं का बैलेंस अचानक हजारों रुपये ‘नेगेटिव’ हो गया (जैसे 2,000 बकाया)। बिजली चालू करने के लिए उन्हें पहले पुराने बकाया को शून्य करना पड़ा और फिर भविष्य के लिए अतिरिक्त बैलेंस डालना पड़ा, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ गया। रिचार्ज करने के बाद भी सर्वर डाउन होने के कारण घंटों तक बिजली बहाल नहीं हुई।
लाखों मीटर, लेकिन बढ़ती परेशानी
जिले में अब तक करीब 2.80 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। इनमें से 2.30 लाख से ज्यादा कनेक्शन प्रीपेड में बदले जा चुके हैं। लेकिन ज्यादातर लोगों का कहना है कि उन्हें इस बदलाव के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया।
नियमों की अनदेखी और अधिकारों का हनन
मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के तहत उपभोक्ता को यह चुनने का कानूनी अधिकार है कि वह प्रीपेड कनेक्शन चाहता है या पोस्टपेड। हाल ही में केंद्रीय बिजली मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी लोकसभा में साफ किया था कि प्रीपेड मीटर केवल उपभोक्ता की लिखित सहमति (Written Consent) पर ही लगाए जा सकते हैं।
विभाग के आंकड़े बताते हैं कि Ghaziabad में लगभग 2.80 लाख में से 2.30 लाख (करीब 82%) स्मार्ट मीटरों (Smart Meter) को प्रीपेड मोड में बदल दिया गया है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता की मर्जी के बिना यह व्यवस्था थोपना पूरी तरह अवैध है और नियमों का खुला उल्लंघन है।
ओटीपी का खेल और उपभोक्ता के साथ धोखाधड़ी
उपभोक्ताओं का गंभीर आरोप है कि मीटर लगाते समय बिजली कर्मियों ने सिस्टम में उपभोक्ता के बजाय अपने मोबाइल नंबर दर्ज कर दिए। इसके बाद, विभाग के सर्वर से आए ओटीपी (OTP) को खुद ही इस्तेमाल कर उपभोक्ता की फर्जी सहमति (Virtual Consent) दिखाकर मीटर को प्रीपेड मोड में बदल दिया गया।
इस बड़े खेल का खुलासा तब हुआ जब अचानक लोगों के घरों की बिजली गुल हो गई। रिचार्ज खत्म होने पर जब उपभोक्ताओं ने विभाग से संपर्क किया, तब उन्हें पता चला कि उनका कनेक्शन उनकी मर्जी के बिना न केवल प्रीपेड हो चुका है, बल्कि खाते में दर्ज मोबाइल नंबर भी उनका नहीं है।
बिना चेतावनी गुल हो रही बिजली
सबसे बड़ी और गंभीर समस्या मोबाइल नंबरों के गलत डेटा को लेकर सामने आ रही है। कई उपभोक्ताओं के मीटर के साथ जो नंबर लिंक हैं, वे या तो बिजली विभाग के कर्मियों के हैं या फिर पूरी तरह गलत। इस लापरवाही का सीधा असर यह हो रहा है कि उपभोक्ताओं को न तो लो-बैलेंस (Low Balance) का अलर्ट मिलता है और न ही रिचार्ज खत्म होने की कोई सूचना। नतीजा बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक बिजली गुल हो जाती है। इसके बाद उपभोक्ता को यह समझने में ही घंटों लग जाते हैं कि बिजली फॉल्ट की वजह से कटी है या बैलेंस खत्म होने के कारण।
ऑफिस के चक्कर काटने को मजबूर
जब बिजली कटती है, तब उपभोक्ता शिकायत लेकर बिजली दफ्तर पहुंचते हैं। लेकिन वहां भी उन्हें सही जवाब नहीं मिल रहा। मोबाइल नंबर ठीक कराने और जानकारी लेने के लिए लोगों को बार-बार ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
नियमों पर उठे सवाल
एक तरफ सरकारी दिशा-निर्देशों में स्पष्ट कहा गया है कि स्मार्ट मीटर (Smart Meter) लगाना और उसे प्रीपेड मोड में बदलना पूरी तरह उपभोक्ता की सहमति पर निर्भर है। वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि बिना किसी लिखित सूचना या सहमति के चुपचाप पोस्टपेड से प्रीपेड में बदलाव किया जा रहा है। विभागीय लापरवाही और ओटीपी के इस खेल ने पूरी स्मार्ट मीटर योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब उपभोक्ता यह पूछ रहे हैं कि जब नियम उनकी मर्जी को सर्वोपरि बताते हैं, तो विभाग अपनी मनमर्जी क्यों थोप रहा है?
विभाग का क्या कहना है?
बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस समस्या और मोबाइल नंबरों की गड़बड़ी की जानकारी मिली है। विभाग के अनुसार, जिन कनेक्शनों में एक से अधिक मोबाइल नंबर दर्ज हैं या गलत डेटा फीड है, उनकी सूची (List) तैयार की जा रही है। जल्द ही एक विशेष अभियान चलाकर उपभोक्ताओं से संपर्क किया जाएगा और उनके सही मोबाइल नंबर अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि उन्हें एसएमएस अलर्ट समय पर मिल सकें।





























