Gold Price Prediction: एक समय था जब आम इंसान अपनी जमा-पूंजी जोड़कर आसानी से सोना खरीद लेता था, लेकिन आज के दौर में आसमान छूती कीमतें देख यह एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए सपना बनता जा रहा है। हालांकि, वैश्विक अनिश्चितताओं और युद्ध की खबरों के बीच, पिछले कुछ समय में सोने की कीमतों में अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई से एक बड़ी गिरावट भी देखने को मिली है। तो आइए समझते हैं कि क्या डॉलर की बढ़ती ताकत सोने को फिर से आम आदमी की पहुंच में लाएगी?
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बता दें कि अमेरिका-ईरान तनाव की शुरुआत में MCX (वायदा बाजार) में सोने का भाव करीब 1,60,000 प्रति 10 ग्राम के आसपास था, लेकिन अब यह गिरकर लगभग 1,44,825 तक आ गया है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने की कीमतों में तेज गिरावट आई है और यह करीब 4,574 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया है।
क्यों घट रहा है सोने का दाम?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने का बाजार फिलहाल दो पाटों के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ जियो-पॉलिटिकल तनाव (जैसे यूएस-ईरान विवाद) है, जो सोने को ‘सेफ हेवन’ मानकर सपोर्ट देता है। लेकिन दूसरी तरफ महंगाई और ब्याज दरों का तगड़ा दबाव है। दरअसल, पश्चिम एशिया में तनाव से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे वैश्विक महंगाई का खतरा गहरा गया है। जब महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व जैसे केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ऊंचा रखते हैं। ऊँची ब्याज दरें डॉलर को और मजबूत करती हैं, जिससे सोने की चमक फीकी पड़ने लगती है क्योंकि निवेशक सोने के बजाय डॉलर और बॉन्ड्स में पैसा लगाना सुरक्षित और फायदेमंद समझते हैं।
मजबूत डॉलर भी बना बड़ी वजह
अमेरिकी डॉलर की लगातार बढ़ती ताकत ने सोने की चमक फीकी कर दी है। डॉलर इंडेक्स 95.50 से बढ़कर 100 के पार पहुंच गया है। क्योकि वैश्विक बाजार में सोने का व्यापार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर दूसरे देशों के खरीदारों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है। नतीजा-सोने की मांग कम होती है और कीमतें गिरने लगती हैं। इसके साथ ही, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड (सरकारी निवेश पर मिलने वाला ब्याज) में भी भारी उछाल आया है। सोना एक ऐसी संपत्ति है जिस पर कोई ब्याज नहीं मिलता, इसलिए निवेशक अब सोने के बजाय सुरक्षित और गारंटीड रिटर्न देने वाले बॉन्ड्स में पैसा लगाना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। यह ‘दोहरी मार’ सोने की कीमतों पर भारी दबाव बना रही है।
सेंट्रल बैंकों का सख्त रुख
दुनिया के बड़े सेंट्रल बैंक जैसे US Federal Reserve, Bank of Japan, Bank of England और Bank of Canada अब ब्याज दरों को लेकर काफी सतर्क और सख्त नजर आ रहे हैं। पहले जहां बाजार को उम्मीद थी कि 2026 में ब्याज दरों में कटौती (Rate Cut) शुरू हो जाएगी, अब महंगाई के डर से स्थिति उलट गई है। लग रहा है कि दरें ‘Higher for Longer’ यानी लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं या जरूरत पड़ने पर बढ़ भी सकती हैं। क्योकि सोने पर कोई ब्याज या डिविडेंड नहीं मिलता, इसलिए ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए सबसे बड़ा ‘विलेन’ साबित हो रही हैं और कीमतों को नीचे धकेल रही हैं।
आगे क्या रहेगा ट्रेंड?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने की कीमतों पर दबाव अभी बना रह सकता है। अगर यह गिरावट जारी रही, तो MCX पर सोना 1.25 लाख से 1.27 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर तक फिसल सकता है। वहीं, इंटरनेशनल मार्केट में कीमतें 4,200-4,250 प्रति औंस तक आने का अनुमान है। शॉर्ट टर्म की बात करें, तो सोने की ट्रेडिंग रेंज फिलहाल 1,40,000 से 1,47,000 के बीच सिमटी दिख रही है।
50 दिनों में रिकॉर्ड गिरावट
पिछले 50 दिनों का डेटा चौंकाने वाला है। सोना अपने ‘ऑल-टाइम हाई’ से करीब 48,600 प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है। 29 जनवरी को सोना 1,93,096 के ऐतिहासिक स्तर पर था, जो अब काफी नीचे आ गया है। अगर कीमतें विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक 1.25 लाख तक पहुँचती हैं, तो यह अपने पीक से लगभग 68,000 प्रति 10 ग्राम की महा-गिरावट होगी।
कुल मिलाकर अभी सोने के लिए माहौल कमजोर नजर आ रहा है। मजबूत डॉलर, ऊंची ब्याज दरें और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ये सभी फैक्टर सोने की कीमतों को दबा रहे हैं। आने वाले समय में भी सोने में भारी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है और कीमतें नीचे की ओर जा सकती हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति बेहतर साबित हो सकती है।
