Share Crash: अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे वैश्विक बाजारों पर दिखने लगा है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 10 फीसदी का उछाल दर्ज किया गया है। ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। इस तेजी का भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ असर पड़ा, खासकर तेल और गैस सेक्टर में।
डाउनस्ट्रीम कंपनियों के शेयर टूटे (Share Crash)
तेल की बढ़ती कीमतों के बीच देश की प्रमुख तेल विपणन कंपनियों Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL), Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL) और Indian Oil Corporation Limited (IOC) के शेयरों में शुरुआती कारोबार में तेज गिरावट देखी गई।
सोमवार को BPCL के शेयर लगभग 6 फीसदी तक लुढ़क गए। HPCL में 5.3 फीसदी और IOC में करीब 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों की चिंता साफ दिखी, क्योंकि कच्चे तेल के महंगे होने का सीधा असर इन कंपनियों के मार्जिन पर पड़ता है।
अपस्ट्रीम कंपनियों में आई चमक
जहां एक ओर डाउनस्ट्रीम कंपनियों के शेयर दबाव में रहे, वहीं अपस्ट्रीम कंपनियों को इस माहौल में फायदा मिला। Oil and Natural Gas Corporation (ONGC) और Oil India Limited के शेयरों में करीब 5 फीसदी तक की तेजी देखी गई।
BSE पर ONGC का शेयर 5 फीसदी की बढ़त के साथ 293 रुपये के दिन के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। वहीं ऑयल इंडिया के शेयर शुरुआती कारोबार में 4.5 फीसदी उछलकर 505.50 रुपये तक पहुंच गए। साफ है कि कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से अपस्ट्रीम कंपनियों को ज्यादा फायदा मिलता है।
अपस्ट्रीम, डाउनस्ट्रीम और मिडस्ट्रीम क्या हैं?
तेल और गैस सेक्टर को काम के आधार पर तीन हिस्सों में बांटा जाता है अपस्ट्रीम, डाउनस्ट्रीम और मिडस्ट्रीम।
अपस्ट्रीम कंपनियां जमीन या समुद्र के नीचे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के भंडार खोजती हैं और उन्हें निकालती हैं।
डाउनस्ट्रीम कंपनियां कच्चे तेल को रिफाइन कर पेट्रोल, डीजल जैसे उत्पाद बनाती हैं और उन्हें ग्राहकों तक पहुंचाती हैं।
मिडस्ट्रीम कंपनियां तेल और गैस को पाइपलाइन या टैंकरों के जरिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और स्टोर करने का काम करती हैं।
अपस्ट्रीम में तेजी और डाउनस्ट्रीम में गिरावट क्यों?
जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ती है, तो अपस्ट्रीम कंपनियां अपना उत्पाद ऊंचे दाम पर बेचती हैं। उदाहरण के लिए, ब्रेंट क्रूड का 82 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना इन कंपनियों की कमाई बढ़ाने वाला है।
इसके उलट, भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अक्सर स्थिर रखने की कोशिश की जाती है। ऐसे में डाउनस्ट्रीम कंपनियां महंगे दाम पर कच्चा तेल खरीदती हैं, लेकिन खुदरा कीमतें तुरंत नहीं बढ़ा पातीं। इससे उनके मुनाफे पर दबाव पड़ता है और निवेशक शेयर बेचने लगते हैं।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर सीधे कंपनियों के बिजनेस मॉडल पर पड़ता है। मौजूदा हालात में अपस्ट्रीम कंपनियां फायदे में दिख रही हैं, जबकि डाउनस्ट्रीम कंपनियों पर दबाव बना हुआ है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी केवल सूचना के उद्देश्य से है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश करने से पहले वित्तीय विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें। यह खबर किसी भी प्रकार की निवेश सलाह नहीं है।
