UP electricity news: होली से पहले घरों में छाया अंधेरा, उत्तर प्रदेश (UP) में पावर कट के कारण हजारों घर अंधेरे में डूब गए हैं। सवाल यह है कि क्या त्योहारों के समय भी लोगों को ऐसी बुनियादी समस्याओं से जूझना पड़ेगा? वहीं, एक बड़ा सवाल यह भी उठता है कि क्या हर कमी के लिए केवल प्रशासन को दोष देना सही है, या जिम्मेदारी उपभोक्ताओं की भी बनती है? आइए, इस लेख के जरिए विस्तार से जानते हैं कि आखिर इस बिजली कटौती की असली वजह क्या है। होली का त्योहार दहलीज पर है, लेकिन उत्तर प्रदेश के हजारों घरों की बत्तियां गुल हो गई हैं।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर में बैलेंस
इसकी मुख्य वजह है बिजली बिल का भारी बकाया और स्मार्ट प्रीपेड मीटर (Smart Prepaid Meter) में बैलेंस का ‘नेगेटिव’ होना। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बकाया वसूली अभियान के तहत प्रदेश भर में लगभग 76,785 स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट दिए गए हैं। हालांकि मामला इतना सीधा भी नहीं है। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कहना है कि कई लोगों का बैलेंस पॉजिटिव था, फिर भी उनकी बिजली काट दी गई। यानी लोगों ने मीटर रिचार्ज कराया, लेकिन सिस्टम में बैलेंस अपडेट नहीं हुआ और खाते में रकम माइनस दिखने लगी।
सबसे ज्यादा परेशानी कहां?
परिषद के मुताबिक सबसे ज्यादा शिकायतें नोएडा और गाजियाबाद से आई हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने समय से रिचार्ज किया, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी की वजह से बिजली सप्लाई बंद कर दी गई। त्योहार के समय अचानक बिजली कटने से घरों में तैयारियां प्रभावित हो गईं।
परिषद ने क्या कहा?
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि त्योहार से ठीक पहले इतनी सख्ती करना सही नहीं है। उनका कहना है कि पहले सिस्टम की खामियां दूर की जानी चाहिए थीं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जन्माष्टमी के समय भी प्रीपेड मीटर को लेकर दिक्कतें सामने आई थीं और तब योजना को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा था। परिषद का आरोप है कि बिना उपभोक्ता की सहमति के मीटर को प्रीपेड मोड में बदलना कानून के खिलाफ है।
आगे क्या होगा?
9 मार्च से बिजली दरों को लेकर नियामक आयोग में सुनवाई शुरू होने वाली है। इस दौरान स्मार्ट मीटर की लागत उपभोक्ताओं से वसूलने के प्रस्ताव पर भी चर्चा होगी। परिषद ने साफ कर दिया है कि वह इसका विरोध करेगी। परिषद का कहना है कि केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए 18,885 करोड़ रुपये मंजूर किए थे, लेकिन पावर कॉरपोरेशन ने 27,342 करोड़ रुपये का टेंडर जारी किया। ऐसे में अतिरिक्त बोझ उपभोक्ताओं पर डालना गलत होगा। साथ ही यह भी कहा गया है कि जब उपभोक्ताओं पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये बकाया है, तो बिजली दरें बढ़ाने की बजाय कम करने पर विचार होना चाहिए।
कुल मिलाकर होली जैसे बड़े त्योहार से ठीक पहले हजारों घरों की बिजली कटना बड़ा मुद्दा बन गया है। एक तरफ बकाया बिल की सख्ती है, तो दूसरी तरफ तकनीकी गड़बड़ी और उपभोक्ताओं की शिकायतें। अब सबकी नजर नियामक आयोग की सुनवाई और सरकार के अगले कदम पर टिकी है।
