क्यों काशी के 'कोतवाल' कहलाए जाते हैं बाबा भैरवनाथ? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प कहानी…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 01 Dec 2021, 12:00 AM | Updated: 01 Dec 2021, 12:00 AM
उत्तर प्रदेश के काशी यानी वाराणसी में वैसे तो एक से एक मंदिर हैं, लेकिन इनमें बाबा भैरवनाथ का मंदिर काफी ज्यादा फेमस हैं। वैसे तो काशी को शिव की नगरी कहते हैं लेकिन यहां बाबा भैरवनाथ कोतवाल के तौर पर जाने जाते हैं। 

माना जाता है कि बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने जो भक्त आते हैं उनको भैरवनाथ के दर्शन करना बेहद जरूरी होता है, नहीं तो बाबा विश्वनाथ के दर्शन को अधूरे माना जाता है। आइए जानते हैं बाबा भैरवनाथ मंदिर के बारे में हम कई रहस्यमयी और अनोखी बातें, जिसके बारे में शायद आपको ना मालूम हो… 
– क्या आप जानते हैं कि बाजीराव पेशवा ने साल 1715 में इस बाबा भैरवनाथ के मंदिर को दोबारा बनवाया था।
– वास्तुशास्त्र के हिसाब से देखें तो ये मंदिर आज भी जस का तस है। जिसकी बनावट में किसी भी तरह का चेंज नहीं है। मंदिर की बनावट तंत्र शैली पर बेस्ड हैं। 
– इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि ईशानकोण पर तंत्र साधना करने की ये अहम जगह हैं। कहते हैं कि बाबा भैरवनाथ काशी के कोतवाल भी हैं। कुछ कथाओं पर गौर करें तो काल भैरव ने ब्रह्म हत्या के पाप से खुद को मुक्ति के लिए यहीं काशी में रहकर घोर तपस्या की, जिसके बाद शिवजी ने काल को आशीर्वाद देते हुए कहा कि तुम इस नगर के कोतवाल कहे जाओगे और तबसे ही काल भैरव इसी काशी की रखवाली में लग गए और जिस जगह पर बाबा भैरव ने तपस्या की वहीं पर काल भैरव का मंदिर है।
– धार्मिक मान्यताएं कुछ ऐसी भी हैं कि काशी में मृत्यु देने से पहले काल भैरव से यमराज को अनुमति लेनी होती है। भैरव की अनुमति के बिना यमराज भी काशी में कुछ नहीं कर सकते हैं।
– इस मंदिर को लेकर एक बात और कही जाती है कि मुगल शासक औरंगजेब के राज में जब काशी के बाबा विश्वनाथ मंदिर को तोड़ा गया तो कालभैरव का मंदिर पूरी तरह अछूता रहा। जब इस मंदिर को तोड़ने के लिए औरंगजेब के सैनिक वहां गए तो एकाएक पागल कुत्तों का एक पूरा ग्रुप निकल आया कहीं से और जिन जिन सैनिकों को इन कुत्तों ने काटा वो सभी पागल हो गए और अपने ही साथियों को काटने लगे। यहां तक कि  बादशाह को भी अपनी जान हाथ में लेकर भागना पड़ा। यहां तक की उसने अपने पागल सैनिकों को मरवा दिया कि कही वो उसे ही न काट दें। 
– चलिए शास्त्रों की भी बात कर लेते हैं। बाबा भैरव की सवारी कुत्ता है और कहते हैं कि कुत्ते भैरवजी की सेना थी ऐसे में जब औरंगजेब के सैनिक मंदिर तोड़ने पहुंची तो पागल कुत्ते आ गए। और इस तरह से मंदिर की महिमा दूर-दूर तक फैल गई।

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