Banke Bihari Temple Railing Controversy: विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह दर्शन व्यवस्था या भीड़ नियंत्रण नहीं, बल्कि मंदिर परिसर में स्टील रेलिंग लगाने का ठेका है। आरोप है कि यह ठेका एक मुस्लिम फर्म को दिया गया है। जैसे ही यह बात सामने आई, ब्रजभूमि के साधु-संतों और हिंदूवादी संगठनों ने इसका खुलकर विरोध शुरू कर दिया। हालात बिगड़ते देख जिला प्रशासन और मंदिर कमेटी को सामने आकर पूरे मामले पर सफाई देनी पड़ी।
साधु-संतों का विरोध, सीएम को लिखा पत्र (Banke Bihari Temple Railing Controversy)
इस विवाद में सबसे सख्त प्रतिक्रिया श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी महाराज की तरफ से आई है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर इस फैसले को सनातन परंपराओं के खिलाफ बताया है। फलाहारी महाराज का कहना है कि ब्रजभूमि केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, जहां हर फैसला सोच-समझकर लिया जाना चाहिए।
Seers in UP’s Mathura have begun protesting against contract for installing steel railings inside banke Bihari temple allegedly awarded to a Muslim contactor. pic.twitter.com/TQSfGT8yU9
— Piyush Rai (@Benarasiyaa) February 3, 2026
‘ब्रज की पवित्रता से कोई समझौता नहीं’
फलाहारी महाराज ने बयान में कहा कि जिस भूमि पर भगवान श्रीकृष्ण ने रास लीला की, जहां बांके बिहारी आज भी विराजमान हैं, वहां सनातन धर्म के विरोधियों को काम देना ब्रजवासियों को मंजूर नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे फैसलों से धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं और इसका विरोध स्वाभाविक है।
पहचान छिपाकर ठेका लेने का आरोप
फलाहारी महाराज ने आरोप लगाया कि ‘कनिका कंस्ट्रक्शन’ नाम की फर्म के मालिक सलीम अहमद ने अपनी पहचान छिपाकर यह ठेका हासिल किया। उन्होंने मांग की कि इस ठेके को तुरंत रद्द किया जाए और किसी सनातनी ठेकेदार को काम सौंपा जाए। उनका कहना है कि जब सनातन समाज में ही हजारों योग्य ठेकेदार मौजूद हैं, तो फिर बाहरी और विवादित पृष्ठभूमि वाली फर्म को यह जिम्मेदारी क्यों दी गई।
सोशल मीडिया पर भी उठे सवाल
यह मामला सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैल गया। कई हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर सवाल उठाए। संदीप पहल जैसे एक्टिविस्ट्स ने हरिद्वार की हर की पौड़ी का उदाहरण देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर ऐसे फैसलों में विशेष सावधानी बरती जानी चाहिए।
प्रशासन की सफाई, मंदिर बजट से नहीं हुआ खर्च
विवाद बढ़ने के बाद अपर जिलाधिकारी पंकज वर्मा ने मीडिया से बातचीत में स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि यह ठेका मंदिर के बजट से नहीं दिया गया है। उनके मुताबिक, जिन बैंकों में मंदिर की धनराशि जमा है, उन्हीं बैंकों ने अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी यानी CSR फंड के तहत रेलिंग लगवाने का प्रस्ताव दिया था।
कोटेशन के आधार पर हुआ चयन
ADM के अनुसार, बैंक द्वारा कोटेशन मंगाए गए थे, जिसके बाद मेरठ की फर्म ‘कनिका कंस्ट्रक्शन’ को चुना गया। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल इस फर्म का संचालन ‘रंजन’ नामक व्यक्ति कर रहे हैं, जबकि मौके पर काम की निगरानी फील्ड मैनेजर रुपेश शर्मा कर रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि रेलिंग लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका है।
मंदिर कमेटी की अपील, सौहार्द बनाए रखने पर जोर
मंदिर की हाई-पावर्ड कमेटी के सदस्य शैलेन्द्र गोस्वामी ने भी विवाद पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि ठेका पूरी तरह नियमों और टेंडर प्रक्रिया के तहत दिया गया है। साथ ही उन्होंने ब्रज की परंपरा का हवाला देते हुए कहा कि यह भूमि हमेशा से सांप्रदायिक सौहार्द की प्रतीक रही है। उन्होंने याद दिलाया कि इतिहास में मुगल सम्राट अकबर भी स्वामी हरिदास का संगीत सुनने आए थे।
