बुखार-खांसी नहीं…धीरे से गिरता ऑक्सीजन लेवल और फिर चली जाती मरीजों की जान! अब ये Happy Hypoxia क्या है?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 13 मई 2021, 05:30 AM Updated: 13 मई 2021, 05:30 AM
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कोरोना महामारी की दूसरी लहर मरीजों के फेफड़ों पर असर डाल रहा है, जिसके चलते लोगों का ऑक्सीजन लेवल गिरने लगता है। सेकेंड वेव के दौरान लोगों को ऑक्सीजन की काफी जरूरत पड़ने लगी है। 

वैसे तो कोरोना के सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी और गले में खराश शामिल है। कई लोगों को ये समस्या होती है, जिसके बाद वो जांच कराते है। लेकिन कुछ मामले ऐसे भी सामने आ रहे है कि लोगों को ना तो खांसी होती है, ना बुखार और धीरे-धीरे ऑक्सीजन लेवल गिरकर 50 तक पहुंच जाता है। साथ ही ये जानलेवा भी बन जाता है। इसका वजह होता है हैप्पी हाइपोक्सिया। 

साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है इसे… 

वैसे तो इस बीमारी के नाम में हैप्पी आता है, लेकिन असल में इससे लोगों की जान ले रहा है। ये कोरोना की एक बेहद ही खतरनाक स्टेज होता है। जिसे ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है, क्योंकि कोरोना के मरीजों को पता भी नहीं होता कि वो इसकी चपेट में है। मरीजों में कोरोना का कोई लक्षण नहीं होता और धीरे ही धीरे ऑक्सीजन लेवल गिरने लगता है। 

क्या होता है हैप्पी हाइपोक्सिया? कैसे कोरोना मरीजों की ये साइलेंटी जान ले लेता? किन लक्षणों की दिखने पर सावधान हो जाना चाहिए, आइए इसके बारे में आपको बताते हैं…

जानिए कैसे बन जाता है जानलेवा?

शुरुआती स्टेज में कोरोना मरीजों को कोई लक्षण नहीं दिखता। ना बुखार, ना खांसी…इसके बाद उसके खून में ऑक्सीजन का स्तर काफी कम होने लगता है। ऑक्सीजन लेवल नीचे गिरते हुए 30 से 50 तक पहुंच जाता है और इसके बारे में पीड़ित को पता तक नहीं चलता। जानकारों के मुताबिक युवाओं की इम्यूनिटी स्टॉन्ग होती है, ऐसे में जब ऑक्सीजन लेवल गिरता है, तो उनको कुछ महसूस भी नहीं होता कि वो इस साइलेंट किलर की चपेट में आ गए हैं। 

इन लक्षणों को गलती से भी ना करें नजरअंदाज

अब आपको हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षणों के बारे में बता देते हैं। कैसे पता चले कि लोग इसकी चपेट में आ गए हैं। हैप्पी हाइपोक्सिया का प्रमुख कारण फेफड़ों में खून की नसों में थक्के जम जाना होता है। इसकी वजह से फेफड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलती। इसकी वजह से दिल, दिमाग, किडनी जैसे शरीर के प्रमुख अंग काम करना बंद कर सकते हैं।

इससे पीड़ित व्यक्ति के होठों के रंग में बदलाव होने लगता है। ये लाल से नीले पड़ने लगते हैं। साथ में त्वचा का ररंग भी बदलकर लाल या पर्पल दिखने लगता है। सिर्फ यही नहीं पसीने में भी शख्स का रंग बदला हुआ नजर आता है। लोगों का ऑक्सीजन लेवल गिरने की वजह से सांस लेने में दिक्कत होती है। 

ऑक्सीजन की कमी होने की वजह से दिमाग की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती है और दिमाग चिड़चिड़ा हो जाता है। अगर इन लक्षणों पर ध्यान दिया जाए और तुरंत ही डॉक्टर से सलाह लेकर इलाज किया जाए, तो जोखिम कम हो जाता है। ऐसे में इन सिम्टम्स को गलती से भी नजरअंदाज ना करें, नहीं तो जान पर भी खतरा आ सकता है। 

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