जेल में कैदी कैसे काटते है अपना दिन? मिलती हैं क्या-क्या सुविधाएं? जान लें इसके बारे में…

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 23 Jan 2021, 12:00 AM | Updated: 23 Jan 2021, 12:00 AM

भारत में जेल की जिंदगी कैसी होती है ये हर किसी के लिए एक बड़ा सवाल है। जेल का जीवन के बारे में हम सोचने लगते हैं कि मेहनत की जिदगी, यातना से भरा जीवन। एक सेल में झुंड के झुंड कैदी लेकिन असल में जेल की जिंदगी होती है कैसी आइए इस बारे में आपको हम बताते हैं।

आज भी अधिकांश जेलों में बंदियों को वक्त और जिम्मेदारी बताने के लिए घंटे की गूंज उठाया जा रहा है। हर साठ मिनट बाद घंटे बाजाए जाते हैं ताकि कैदियों को उनकी जिम्मेदारी बता होती रहे। सुबह से शाम तक चार बार घंटे बजाया जाता है लेकिन हर बार अलग अलग कारणों से बजायी जाती है।

कैदियों की दिनचर्या शुरू करवाने वाला पहला घंटा सुबह पांच बजे गूंजता है। जिससे कैदी नित्य क्रिया के बाद सात बजे प्रार्थना सभा में इकट्ठा होते हैं और फिर बंदियों को काम पर भेज दिया जाता है। 11 बजे कैदियों काम लौटते है और खाना खाकर फिर दोपहर में एक बजे कैदियों को अपने हिस्से का काम तेज करने को कहा जाता है।

अगर बात तिहाड़ जेल में कैदियों की जिंदगी की करें तो तिहाड़ जेल में भी कैदियों का रूटीन सुबह 5 बजे से रात 8 बजे तक कैदियों का एक रूटीन फिक्स है। यहां सभी कैदी सुबह 5 बजे उठते है और फिर साढ़े पांच बजे उनकी खुले में गिनती की जाती है। फिर आधे घंटे के बाद यहां भी हर एक कैदी प्रार्थना करने के लिए इकट्ठा होते हैं और उसी बीच चाय बांटी जाती हैं।

जिन कैदियों की कोर्ट में सुनवायी होती है उन्हें साढ़े 6 बजे जेल से कोर्ट ले जाया जाता है। 7 बजे फोन पर कैदियों को उनके परिवार वालों से बात करवाई जाती है। साढ़े 7 बजे कैदी बैरक, जेल परिसर के साथ साथ अपने कपड़ों को साफ करते हैं।

8 से 11 बजे का समय कैदियों का पढ़ने का वक्त होता है जिसमें उन्हें हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, पंजाबी और बांग्ला भाषा सिखायी जाती है फिर 9 बजते ही परिजनों से मुलाकात करवाने का समय आ जाता है। साढ़े 11 में कैदियों के बीच खाना बंटा जाता है। 12 से 3 बजे तक कैदियों की गिनती की जाती है फिर जेल में उन्हें बंद किया जाता है।

3 बजे कैदियों के बीच फिर से चाय बांटी जाती है। 4 बजे का वक्त कैदियों को कानूनी सलाह देने का होता है और 4 से 6 बजे तक खेलने का समय होता है और उनके टीवी देखने का वक्त भी यही होता है। 6 बजे उन्हें खाना बंटा जाता है और साढ़े 6 बजे शाम की प्रार्थना की जाती है। 7 बजे एक बार फिर कैदियों की काउंटिंग की जाती है। 8 बजे तक हर कैदी को बैरक में बंद किया जाता है।

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