Varanasi News: बीएचयू और थाईलैंड का 138 साल पुराना विश्वविद्यालय मिलकर बढ़ाएंगे बौद्ध अध्ययन की परंपरा

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 02 नवम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 02 नवम्बर 2025, 05:30 AM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

Varanasi News: वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) और थाईलैंड के महाचुलालोंगकोर्नराज विद्यालय विश्वविद्यालय (MCU) के बीच जल्द ही बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में एक बड़ा शैक्षणिक समझौता होने जा रहा है। यह साझेदारी भारत और थाईलैंड के बीच बौद्ध संस्कृति, दर्शन और शिक्षा को नई दिशा देने की ओर एक अहम कदम मानी जा रही है।

और पढ़ें: Buddhist pilgrimage: नेपाल से थाईलैंड तक… लेकिन यूपी के इस शहर आए बिना अधूरी रहती है बौद्ध तीर्थ यात्रा

थाईलैंड का यह विश्वविद्यालय वर्ष 1887 में राजा महामहाचुलालोंगकोर्न (राम पंचम) द्वारा स्थापित किया गया था और इसे बौद्ध शिक्षा, शोध और विपश्यना साधना के क्षेत्र में अग्रणी संस्थानों में गिना जाता है। सोमवार को MCU का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल वाराणसी स्थित BHU के कला संकाय के पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभाग पहुंचा, जहां दोनों देशों के बीच शैक्षणिक सहयोग को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

भाषाई और सांस्कृतिक संबंधों पर हुई गहन बातचीत- Varanasi News

बैठक के दौरान भारत और थाईलैंड के बीच पालि भाषा और थेरवाद बौद्ध परंपरा के ज़रिए मौजूद गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा की गई। दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हुए कि अनुसंधान, शिक्षक एवं छात्र विनिमय, संयुक्त सम्मेलन और अनुवाद कार्यों के ज़रिए इन संबंधों को और मजबूत किया जाए। इसके लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर जल्द हस्ताक्षर किए जाएंगे।

थाईलैंड से आए प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व डॉ. फ्रमहा युत्थना सिरीवान, प्रमुख बौद्ध अध्ययन विभाग (MCU), ने किया। उनके साथ डॉ. जुतारत तोंगिंजान, फ्रा ख्रु स्रीवचिरनिमित पैरोत, फ्रा महा थना सन्नारोंग, फ्रा खजोंसक तोंसली, कांदा पर्मसोम्बत, फिम्फया वेमुत्तेपुद्धवेज, उडोम ङामबूनप्लोड और कंलयानी सेर्मसिरिविवत शामिल थीं।

BHU ने थाईलैंड के प्रयासों की सराहना की

BHU के पालि एवं बौद्ध अध्ययन विभागाध्यक्ष डॉ. अरुण कुमार यादव ने थाई प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और MCU द्वारा बौद्ध दर्शन और विपश्यना साधना के संरक्षण में निभाई जा रही भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी “वैश्विक बौद्ध अध्ययन को नई दिशा देने” का काम करेगी और भारत-थाईलैंड के बीच सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत बनाएगी।

इस मौके पर डॉ. बुद्ध घोष, भिक्षु फ्राख्रुसुथमथावच्चायि माथी और विभाग के विद्यार्थी भी उपस्थित रहे। चर्चा में दोनों देशों के बौद्ध परंपराओं की समानता, ऐतिहासिक योगदान और आधुनिक युग में बौद्ध दर्शन के महत्व पर विस्तार से विचार किया गया।

क्या होगा सहयोग का दायरा

इस MoU के तहत दोनों विश्वविद्यालय मिलकर संयुक्त शोध परियोजनाएं, प्रोफेसर और छात्र एक्सचेंज प्रोग्राम, इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस और बौद्ध ग्रंथों के अनुवाद कार्य करेंगे। इसका उद्देश्य केवल शैक्षणिक सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बौद्ध विचारधारा और थेरवाद परंपरा को विश्व स्तर पर बढ़ावा देना भी होगा।

बौद्ध अध्ययन को मिलेगी नई ऊर्जा

BHU के बौद्ध अध्ययन विभाग की समृद्ध परंपरा और MCU के 138 साल पुराने अनुभव का मेल न केवल दोनों संस्थानों के लिए लाभकारी होगा, बल्कि यह बौद्ध संस्कृति के प्रचार-प्रसार में भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

इस सहयोग के ज़रिए भारत और थाईलैंड के बीच न केवल शैक्षणिक रिश्ते मजबूत होंगे, बल्कि बुद्ध की शिक्षाओं और पालि भाषा की विरासत को भी नई अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

और पढ़ें: RBI Update: 2000 रुपये के नोटों की पूरी वापसी अब तक नहीं, RBI ने बताया कितने गुलाबी नोट अब भी हैं बाजार में

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds