Ajab Gajab: झारखंड का रहस्यमय गांव, जहां ना कोई इंसान बचा, ना घर – बस रह गईं यादें और कब्रगाहें

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 12 Sep 2025, 12:00 AM | Updated: 12 Sep 2025, 12:00 AM

Ajab Gajab: झारखंड के खूंटी जिले में एक गांव है, जिसका नाम सुनकर आप चौंक सकते हैं – बिरहोर चुआं। नाम तो है, लेकिन वहां न कोई इंसान रहता है, न कोई घर दिखता है। पेड़-पौधों और हरियाली से ढका ये इलाका अब सिर्फ एक भूगोलिक निशान बनकर रह गया है। हां, अगर कुछ बचा है तो वो हैं आम के पेड़ के नीचे मौजूद कब्रगाहें, जो गवाही देती हैं कि यहां कभी लोग रहा करते थे।

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कहां है ये गांव? Ajab Gajab

बिरहोर चुआं, खूंटी जिले के रनिया प्रखंड की जयपुर पंचायत में स्थित है। सरकारी दस्तावेजों में ये गांव आज भी राजस्व ग्राम के रूप में दर्ज है। लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि यहां जनसंख्या शून्य है। न कोई घर है, न बस्ती, न खेत, न खलिहान और न ही कोई इंसान। सिर्फ जंगल और खामोशी।

कौन थे बिरहोर?

इस गांव में कभी बिरहोर समुदाय के लोग रहा करते थे। बिरहोर झारखंड की एक आदिम जनजाति है, जो पारंपरिक रूप से घुमंतू जीवन जीती थी। ये लोग जंगलों में रहकर, लकड़ी काटकर, शहद इकठ्ठा करके या छोटी-मोटी खेती करके जीवन यापन करते थे।

बिरहोर चुआं में भी दशकों पहले बिरहोर समुदाय के परिवार बसे थे। गांव का नाम भी शायद इसी वजह से पड़ा – “बिरहोर” यानी उस समुदाय के नाम पर, और “चुआं” यानी पानी का स्रोत। बताया जाता है कि वे एक छोटे से जलस्रोत (चुआं) से पीने का पानी लेते थे और उसे ही अपनी जरूरतों के लिए इस्तेमाल करते थे।

फिर अचानक सब कहां चले गए?

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि किसी को ठीक-ठीक नहीं पता कि बिरहोर चुआं के लोग कहां और क्यों चले गए। कोई रिकॉर्ड, कोई दस्तावेज, कोई आधिकारिक बयान नहीं है जो बता सके कि यह जनजाति वहां से किस वजह से गई। सिर्फ अनुमान हैं कि शायद बेहतर जीवन की तलाश में गए, या किसी बीमारी, सरकारी विस्थापन या आपसी विवाद के कारण गांव छोड़ दिया। लेकिन वे कभी लौटकर नहीं आए।

आज भी उस जगह मौजूद कब्रगाहें उनकी पुरानी मौजूदगी की चुप गवाही देती हैं।

सरकारी योजनाएं क्यों नहीं बनतीं?

चूंकि अब यहां कोई नहीं रहता, इसलिए इस गांव को प्रशासन ने बेचिरागी गांव यानी ‘निवासीविहीन’ घोषित कर रखा है। जब भी किसी योजना के लिए आंकड़े मांगे जाते हैं, तो बिरहोर चुआं के लिए हमेशा “शून्य आबादी” लिखकर रिपोर्ट भेजी जाती है। यही वजह है कि इस गांव के नाम पर कोई सरकारी योजना नहीं बनती।

सिर्फ जंगल और कब्रें बचीं

बिरहोर चुआं अब एक ऐसा नाम है, जो सरकारी कागजों में तो जीवित है, लेकिन असल में वहां जीवन का कोई निशान नहीं। पूरे 207.75 हेक्टेयर में फैला यह इलाका अब सिर्फ पेड़ों, झाड़ियों और एक दो पगडंडियों से घिरा हुआ है।

खूंटी में ऐसे और गांव भी हैं

बिरहोर चुआं अकेला ऐसा गांव नहीं है। खूंटी प्रखंड के छोटा बांडी नाम का एक और राजस्व गांव है, जिसकी हालत बिल्कुल वैसी ही है यानि 18 हेक्टेयर का इलाका, लेकिन वहां भी कोई नहीं रहता।

रनिया प्रखंड में ही चेंगरे नाम का एक गांव है, जहां सिर्फ एक परिवार रहता है। इस गांव का कुल क्षेत्रफल 87 हेक्टेयर है।

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