UNGA Session: मोदी नहीं जाएंगे UNGA बैठक में, एस. जयशंकर करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 06 सितम्बर 2025, 05:30 AM Updated: 06 सितम्बर 2025, 05:30 AM
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UNGA Session: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस महीने न्यूयॉर्क में होने जा रही संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की बैठक में हिस्सा नहीं लेंगे। पहले की सूची में उनका नाम शामिल था और वे 26 सितंबर को जनरल असेंबली को संबोधित करने वाले थे, लेकिन अब नई संशोधित लिस्ट में विदेश मंत्री एस. जयशंकर को भारत का प्रतिनिधि बताया गया है। वे 28 सितंबर को UNGA सत्र में भाषण देंगे।

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इस बार UNGA का 80वां सत्र 9 सितंबर से शुरू हो रहा है और इसकी उच्चस्तरीय सामान्य बहस 23 से 29 सितंबर तक चलेगी। कार्यक्रम की शुरुआत ब्राजील के भाषण से होगी, इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 23 सितंबर को महासभा को संबोधित करेंगे। ये ट्रंप का दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद UN में पहला भाषण होगा। चीन, पाकिस्तान, इज़रायल और बांग्लादेश के राष्ट्राध्यक्ष 26 सितंबर को बोलेंगे।

क्यों नहीं जा रहे पीएम मोदी? UNGA Session

पहले उम्मीद की जा रही थी कि पीएम मोदी खुद इस सत्र में हिस्सा लेंगे, लेकिन अब उन्होंने अपना कार्यक्रम बदल दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उनकी यात्रा को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी, और अंतिम फैसला सत्र के करीब लिया जाना था। फिलहाल यह लगभग तय है कि मोदी इस बार भी UNGA नहीं जाएंगे, जैसे कि 2022 और 2023 में भी हुआ था। उस समय भी एस. जयशंकर ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

हालांकि, पीएम मोदी 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में ‘मोदी एंड यूएस: प्रोग्रेस टुगेदर’ नाम के एक बड़े सामुदायिक कार्यक्रम को संबोधित करेंगे, जिसमें करीब 24,000 भारतीय मूल के लोग शामिल होंगे। इसके अलावा वे 22-23 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित ‘समिट ऑफ द फ्यूचर’ में भी भाग लेंगे।

भारत-अमेरिका रिश्तों में तल्खी?

इस फैसले के समय ने सबका ध्यान खींचा है, क्योंकि भारत और अमेरिका के बीच रिश्तों में इस वक्त थोड़ा तनाव देखने को मिल रहा है। इसका कारण है अमेरिका की ओर से लगाया गया अतिरिक्त 25% टैरिफ, जो भारत द्वारा रूस से सस्ता तेल खरीदने को लेकर लगाया गया है। अमेरिका का मानना है कि भारत के इस कदम से यूक्रेन युद्ध में रूस को परोक्ष रूप से मदद मिल रही है।

हालांकि भारत का तर्क है कि रूस से सबसे ज़्यादा तेल चीन खरीद रहा है, लेकिन अमेरिका की तरफ से उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। यही बात भारत को चुभ रही है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपनी ज़रूरतों और राष्ट्रीय हितों के मुताबिक ही फैसले लेगा।

ट्रंप की बदली हुई भाषा

हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर कुछ नरम रुख अपनाते हुए कहा था कि भारत और अमेरिका के संबंध हमेशा से खास रहे हैं। उन्होंने पीएम मोदी को “अच्छा दोस्त और बेहतरीन प्रधानमंत्री” बताया, हालांकि ये भी कहा कि “जो वो इस समय कर रहे हैं, वह मुझे पसंद नहीं है।” लेकिन ट्रंप ने भरोसा दिलाया कि भारत-अमेरिका के रिश्ते मजबूत बने रहेंगे और कभी-कभी ऐसे उतार-चढ़ाव रिश्तों में आते रहते हैं।

आगे क्या?

UNGA के इस सत्र में जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक तनाव, असमानता जैसे वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होगी। भारत की ओर से विदेश मंत्री जयशंकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश की बात मजबूती से रखेंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने भारत-अमेरिका के रिश्तों की दिशा को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।

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