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Afghanistan Crisis: CAA पर मोदी का विरोध, अब अफगानी मुस्लिमों को भी नहीं अपना रहे पड़ोसी देश

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 18 Aug 2021, 12:00 AM | Updated: 18 Aug 2021, 12:00 AM

अफगानिस्तान पर आतंकी संगठन तालिबान ने कब्जा जमा लिया है। अफगानी सरकार तालिबान के आगे नतमष्तक हो गई है और पूरे अफगानिस्तान में अब तालिबान का प्रभुत्व हो गया है। महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। रुस, पाकिस्तान, चीन और तुर्की समेत तमाम देशों ने अफगानिस्तान में तालिबान को समर्थन भी दे दिया है। 

अमेरिका जैसे मजबूत देश के समर्थन के बावजूद अफगानिस्तान में तालिबान अपने मंसूबों को पूरा करने में कामयाब हो गया। अफगान पर तालिबान के कब्जे ने कई देशों की चिंता बढ़ा दी है। तालिबान के कब्जे के बाद अफगानिस्तान से विचलित करने वाली तस्वीरें सामने आ रही है। एयरपोर्ट पर भेड़-बकरियों की तरह इंसानों के प्लेन में लदने, किसी तरह चढ़ने की कोशिश, बीच हवा में प्लेन से गिरने की तस्वीरें…सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। 

लोग वहां से कैसे भी निकलने की कोशिशों में लगे है। वहीं, अफगानिस्तान के पड़ोसी देश अफगानी लोगों के लिए अपने दरवाजे बंद किए बैठे है। सीएए पर भारत सरकार का विरोध करने वाला तुर्की ईरान के साथ लगती अपनी सीमा पर तेजी से कंक्रीट की दीवार खड़ी कर दी है ताकि अफगानिस्तान के शरणार्थी ईरान के रास्ते उसके यहां दाखिल न हो सकें। यहां तक कि अन्य मुस्लिम देश ईरान, यूएई, बांग्लादेश, मलेशिया और पाकिस्तान ने भी सीएए का विरोध किया था लेकिन अब अफगानी शरणार्थियों को शरण देने में ये पीछे दिख रहे हैं।

तुर्की का दोहरा चरित्र

खुद को मुस्लिमों का हितैषी बताने वाला तुर्की और वहां के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन..जो मौजूदा समय में इस्लामिक देशों के नेता बनने की कोशिश कर रहे हैं…अफगानिस्तान में उत्तपन्न हुई ऐसी स्थिति के बावजूद तुर्की तालिबान का समर्थन करता दिख रहा है। अफगानी नागरिक जो जल्द से जल्द अफगानिस्तान से बाहर निकलना चाहते है लेकिन न तो तुर्की ने, न ही ईरान ने इन असहाय लोगों के लिए हाथ बढ़ाया है। 

सीएए प्रदर्शन के बीच दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने कहा था कि वर्तमान में भारत एक ऐसा देश बन गया है, जहां नरसंहारों को अंजाम दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत में हिंदुओं द्वारा मुस्लिमों का नरसंहार किया जा रहा है।

बांग्लादेश ने किया था सीएए का विरोध

बांग्लादेश ने भी सीएए का विरोध किया था। बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मेमन ने कहा था कि इससे भारत की सेक्युलर छवि को नुकसान पहुंचेगा। भारत ऐतिहासिक तौर पर एक सहिष्णु देश रहा है, जिसका धर्मनिरपेक्षता में यकीन रहा है लेकिन अगर वे इस रास्ते से भटकते हैं तो उनकी ऐतिहासिक छवि कमजोर पड़ जाएगी।

पाकिस्तान ने जताया था विरोध

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने सीएए को लेकर कहा था कि भारत में नागरिकता संशोधन कानून से मची उथल-पुथल को लेकर पाकिस्तान के पक्ष का अंदाजा दिल्ली में हो रही हिंसा से लगाया जा सकता है। अगर स्थितियां खराब होती हैं तो क्षेत्र की अशांति दुनिया पर असर डाल सकती है। भारत को अपने व्यवहार और नीतियों की समीक्षा करनी चाहिए।

भारत ने उठाया है बड़ा कदम

वहीं, दूसरी ओर अब जब अफगानिस्तान के शरणार्थियों को शरण की जरुरत है, जब वह तालिबानी साये के भीतर जीना नहीं चाहते और दूसरे देशों में शरण लेना चाहते हैं तो उनके पड़ोंसियों ने ही दरवाजा बंद कर लिया है। 

लेकिन अनेकता में एकता और सर्वधर्म संभाव की राह पर चलने वाला भारत अफगानिस्तानी शरणार्थियों के लिए रहनुमा बन कर सामने आया है।भारत ने अफगानिस्तान से अपने नागरिकों के साथ-साथ अफगानी लोगों को भी एयरलिफ्ट किया है। 

भारत ने भले ही अफगानिस्तान में अपने दूतावास को बंद कर दिया है, सभी स्टाफ को वापस बुला लिया है लेकिन संकट की इस घड़ी में अफगानिस्तान के लोगों के लिए ई-वीजा का विकल्प जारी रखा है। यानी कि अफगानिस्तान से आने वाला कोई भी नागरिक मौजूदा समय में ई-वीजा लेकर भारत में शरण ले सकता है।

भारत सरकार का अफगानी नागरिकों के लिए ई-वीजा का प्रावधान सीएए के तहत बिल्कुल नहीं है। क्योंकि सीएए 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में शरण ले चुके लोगों के लिए था।

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