Prayagraj Shailendra Success Story: प्रयागराज के शैलेंद्र का कमाल! प्रॉपर्टी बेच बनाई ऐसी तकनीक, 100cc बाइक दे रही 176KM का माइलेज

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 19 Aug 2025, 12:00 AM | Updated: 19 Aug 2025, 12:00 AM

Prayagraj Shailendra Success Story: अगर आप सोचते हैं कि पेट्रोल के बढ़ते दामों के बीच ज्यादा माइलेज पाना अब सपना बन गया है, तो ज़रा रुकिए। प्रयागराज के रहने वाले शैलेंद्र कुमार सिंह गौर ने ऐसा इंजन बना दिया है, जो इस सोच को पूरी तरह बदल सकता है। एक साधारण साइंस ग्रेजुएट होने के बावजूद शैलेंद्र ने वह कर दिखाया है, जिसे बड़े-बड़े ऑटो ब्रांड्स सालों से खोज रहे हैं जैसे कि कम खर्च, ज्यादा माइलेज और पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद टेक्नोलॉजी।

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माइलेज जो चौंका देगा- Prayagraj Shailendra Success Story

शैलेंद्र गौर का दावा है कि उनके बनाए इंजन ने एक 100cc बाइक पर 176 किलोमीटर प्रति लीटर तक का माइलेज दिया है। और यह केवल शुरुआत है। उनका मानना है कि थोड़ा और फंड मिल जाए, तो ये आंकड़ा 200 किलोमीटर प्रति लीटर से ऊपर जा सकता है। इस दावे ने ऑटो इंडस्ट्री में संभावनाओं के नए दरवाजे खोल दिए हैं।

आखिर क्या है इस इंजन में खास?

शैलेंद्र ने बताया कि उन्होंने पारंपरिक इंटरनल कंबशन (IC) इंजन में एक बुनियादी बदलाव किया है। आमतौर पर, पारंपरिक इंजन में अधिकतम थ्रस्ट 25 डिग्री पर आता है, जबकि उन्होंने इसे 60 डिग्री पर सेट किया है। इसका मतलब है कि इंजन अब ईंधन की 70% ऊर्जा का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि पहले केवल 30% ऊर्जा ही उपयोग में आती थी।

इसका नतीजा सिर्फ ज्यादा माइलेज ही नहीं है, बल्कि यह इंजन लगभग शून्य प्रदूषण भी करता है। उनके मुताबिक, बाइक के साइलेंसर का तापमान बेहद कम रहता है और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें भी लगभग नहीं के बराबर निकलती हैं।

एक इंजन, कई फ्यूल

सबसे बड़ी बात यह है कि शैलेंद्र का इंजन पेट्रोल, डीजल, CNG और एथनॉल किसी भी फ्यूल पर चल सकता है। यानी ये तकनीक फ्यूचर प्रूफ है और किसी एक ऊर्जा स्रोत पर निर्भर नहीं है।

संघर्षों से सजी सफलता की कहानी

शैलेंद्र गौर की ये यात्रा आसान नहीं थी। उन्होंने अपने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी सारी प्रॉपर्टी बेच दी। किराए के घर को ही वर्कशॉप में बदल डाला और सालों तक रिसर्च में जुटे रहे। फंड की कमी थी, लेकिन हौसला कम नहीं हुआ।

उन्होंने बताया कि MNNIT के प्रोफेसर अनुज जैन की मदद से उन्होंने इंजन की बारीकियों को समझा। 6 महीने तक रोजाना 5-6 घंटे की मेहनत के बाद ही ये इंजन तैयार हो पाया।

एक बार उन्होंने अपनी पुरानी प्रोटोटाइप 120 किमी/लीटर माइलेज के साथ एक कंपनी को दिखाई, लेकिन रिसर्च टीम ने इसे नजरअंदाज कर दिया। बाद में कंपनी के मालिक की दिलचस्पी से उन्हें समझा गया कि उनके पास वाकई में कुछ अनोखा है।

भविष्य की सोच और पेटेंट

आज शैलेंद्र गौर के नाम दो पेटेंट हैं एक डिजाइन का और एक प्रक्रिया का। वे अब और भी पेटेंट फाइल करने की तैयारी में हैं। उनका मानना है कि ये तकनीक सिर्फ बाइक या कार में नहीं, बड़े जहाजों से लेकर छोटे मोटर्स तक हर जगह इस्तेमाल हो सकती है।

अब देश की जिम्मेदारी

शैलेंद्र गौर कहते हैं, “मैंने अपना काम कर दिया है, अब ये देश और सिस्टम की जिम्मेदारी है कि इसका कैसे इस्तेमाल किया जाता है।” उन्होंने विज्ञान और टेक्नोलॉजी की दुनिया में एक ठोस विकल्प दिया है, जिसे अगर सही तरीके से अपनाया जाए, तो भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में क्रांति आ सकती है।

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