SBI Foundation Day: SBI की शुरुआत से 200 साल का सफर, नाम में बदलाव और पहला खाता खोलने की दिलचस्प कहानी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 01 Jul 2025, 12:00 AM | Updated: 01 Jul 2025, 12:00 AM

SBI Foundation Day: आज 1 जुलाई है, और यह दिन भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के फाउंडेशन डे के रूप में मनाया जाता है। एसबीआई का इतिहास 200 साल से भी ज्यादा पुराना है, और यह देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक होने के साथ-साथ भारत की सबसे मूल्यवान कंपनियों में से एक है। इसकी शुरुआत एक बेहद दिलचस्प कहानी से जुड़ी हुई है। यह बैंक उस समय अस्तित्व में आया जब भारत में ब्रिटिश शासन था, और तब इसका नाम एसबीआई नहीं बल्कि कुछ और था। आइए जानते हैं इस बैंक की यात्रा कैसे शुरू हुई और कैसे वह आज भारत के शीर्ष बैंकों में शामिल हुआ।

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SBI की नींव और प्रारंभिक साल- SBI Foundation Day

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शुरुआत 19वीं शताब्दी के पहले दशक में हुई थी, जब भारतीय उपमहाद्वीप पर ब्रिटिश शासन था। 2 जून 1806 को कोलकाता (पहले कलकत्ता) में ‘बैंक ऑफ कलकत्ता’ की स्थापना की गई। यह बैंक विशेष रूप से ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के वित्तीय कामकाज को संभालने के लिए स्थापित किया गया था। तीन साल बाद, 2 जनवरी 1809 को इस बैंक का नाम बदलकर ‘बैंक ऑफ बंगाल’ कर दिया गया।

इसके बाद बैंक का नाम और रूप लगातार बदलता रहा। जब देश में बैंकिंग सेक्टर में तेजी आई, तो 15 अप्रैल 1840 को बंबई में ‘बैंक ऑफ बॉम्बे’ की स्थापना की गई और 1 जुलाई 1843 को मद्रास (अब चेन्नई) में ‘बैंक ऑफ मद्रास’ अस्तित्व में आया। इन तीनों बैंकों का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश शासन के वित्तीय मामलों को संभालना था, लेकिन इनमें प्राइवेट सेक्टर के लोगों की रकम भी जमा रहती थी।

इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का गठन

27 जनवरी 1921 को बैंक ऑफ बंबई और बैंक ऑफ मद्रास का विलय बैंक ऑफ बंगाल में हो गया, और इस विलय के बाद ‘इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया’ का गठन हुआ। यह बैंक अंग्रेजों के शासन के तहत भारतीय बैंकिंग व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।

आजादी के बाद हुआ SBI का गठन

देश को स्वतंत्रता मिलने के बाद इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का काम जारी रहा और इसका नाम भी बदलता रहा। 1955 में, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ‘इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया’ को अधिग्रहित किया और इसके बाद इस बैंक का नाम बदलकर ‘स्टेट बैंक ऑफ इंडिया’ (SBI) कर दिया गया।

30 अप्रैल 1955 को बैंक के नाम में यह बड़ा बदलाव हुआ, और 1 जुलाई 1955 को एसबीआई की आधिकारिक रूप से स्थापना हुई। इस दिन एसबीआई का पहला बैंक अकाउंट भी खोला गया। इसके बाद धीरे-धीरे एसबीआई के अंतर्गत पूरे देश के बैंकों के शाखाएं शामिल होने लगीं। इसके तहत पहले 480 शाखाओं को एसबीआई ऑफिस में बदल दिया गया, जिनमें ब्रांच ऑफिस, सब ब्रांच ऑफिस और लोकल हेडक्वाटर शामिल थे।

विलय और वैश्विक विस्तार

1 अप्रैल 2017 को भारतीय स्टेट बैंक ने अपने पांच सहयोगी बैंकों—स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर (SBBJ), स्टेट बैंक ऑफ मैसूर (SBM), स्टेट बैंक ऑफ त्रवाणकोर (SBT), स्टेट बैंक ऑफ पटियाला (SBH), और स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद (SBH)—का विलय कर दिया। इस विलय के बाद एसबीआई वैश्विक स्तर पर उभरकर सामने आया। एसबीआई की शाखाओं की संख्या बढ़कर 22,500 हो गई और बैंक का बाजार पूंजीकरण भी बढ़कर 7.32 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

आज का एसबीआई

आज एसबीआई भारत की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल है और यह फॉर्च्यून-500 कंपनियों में से एक है। इसकी बाजार पूंजीकरण के हिसाब से एसबीआई भारतीय बैंकों में सबसे बड़ा है। एसबीआई का विकास केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हुआ है, और आज यह एक ग्लोबल बैंक के रूप में अपनी पहचान बना चुका है।

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