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Pegasus: जानिए कितना खतरनाक है यह जासूसी सॉफ्टवेयर? 2019 में फेसबुक ने दर्ज कराया था मामला

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 20 Jul 2021, 12:00 AM | Updated: 20 Jul 2021, 12:00 AM

How does Pegasus spyware Works: देश और दुनिया में इन दिनों इजरायल की कपंनी एनएसओ द्वारा निर्मित जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस काफी चर्चा में है। खबरों की मानें तो भारत में कई बड़े पत्रकार, केंद्रीय मंत्री, सुप्रीम कोर्ट के जज, चुनावी रणनीतिकार और विपक्षी पार्टियों के कई नेताओं की जासूसी की जा रही थी। 

मामला सामने आते ही देश की राजनीतिक गलियारों में हलचलें काफी तेज हो गई है। विपक्षी पार्टियां इस मामले को लेकर मोदी सरकार को निशाने पर ले रही है। इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे है कि यह सॉफ्टवेयर कितना खतरनाक है और यह कैसे काम करता है। 

मात्र 2 सालों में बढ़ी 4 गुना कमाई

इजरायल का जासूसी सॉफ्टवेयर पेगसास मोबाइन फोन में एक सामान्य व्हाट्सएप कॉल से भी पहुंच सकता है। जिसको कॉल की गई है, वह जवाब दे या न दे..उसके फोन में यह वायरस पहुंच जाएगा। बिना किसी एक्सेस के वह आपके फोन में इंस्टॉल हो जाएगा। खबरों की मानें तो यह फोन में विभिन्न लॉग एंट्री को डिलीट कर देता है जिससे इसकी मौजूदगी का पता नहीं चलता।

यह कंपनी साल 2008 में पहली बार अस्तित्व में आई। एनएसओ ने पेगसास को विकसित करने के बाद विभिन्न देशों की सरकारों को बेचना शुरु किया। रिपोर्ट्स की माने तो साल 2013 में सलाना 4 करोड़ डॉलर कमाने वाली इस कंपनी की कमाई साल 2015 तक करीब 4 गुना बढ़कर 15.5 करोड़ डॉलर हो गई। 

2019 में फेसबुक ने दर्ज कराया था मामला

खबरों की मानें तो साल 2016 में पहली बार आईफोन में इसका इस्तेमाल उजागर हुआ। जिसके बाद एपन ने तत्काल आईओएस अपडेट कर सुरक्षा खामियां दूर की। जिसके कुछ महीनों बाद एंड्रॉयड में भी यह मामले सामने आने लगे। साल 2019 में फेसबुक के सुरक्षा विशेषज्ञों ने इस खतरनाक वायरस का बड़ा खतरा बताते हुए केस दायर किया था। अब व्हाट्एप ने भारत में कई कार्यकर्ता और पत्रकारों के फोन में इसके उपयोग का खुलासा किया। इसकी कीमत काफी ज्यादा है। इसके 1 साल की सब्सक्रिप्शन की कीमत करीब 56 करोड़ से भी ज्यादा है। ऐसे में कोई आम इंसान या छोटे संगठन इसे खरीद नहीं पाते।

लगभग पूरा फोन हो जाता है हैक

फोन में इंस्टॉल होने के बाद पेगासस यूजर के मैसेज पढ़ता है। उनके फोन कॉल को ट्रैक करता है। यूजर द्वारा विभिन्न एप और उनमें उपयोग हुई जानकारी चुराता है। यह लोकेशन डाटा, वीडियो कैमरे का इस्तेमाल व फोन के साथ इस्तेमाल माइक्रोफोन से आवाज रिकार्ड करता है। खबरों की मानें तो यह पेगासस एमएमएस, ब्राउजिंग हिस्ट्री, ई-मेल, कॉन्टैक्ट को देखने के साथ-साथ स्क्रीनशॉट भी ले लेता है। इन जानकारियों को लीक कर पेगासस जासूसी करता है। साथ ही यह अगर किसी गलत फोन में इंस्टॉल हो जाए तो खुद को नष्ट करने की क्षमता भी रखता है।

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