"मेरे पिता ने मेरी जान लेने की कोशिश की", जातिवादी हिंसा की दिल दहलाने वाली कहानी…
बीसवीं सदी में आकर भी आज भले ही देश ने आर्थिक और तकनीकी रूप से मजबूती बना ली है, एक राष्ट्र के तौर पर भले ही एक अलग पहचान बनी ली हो लेकिन जब बात देश में जाति व्यवस्था पर आती है तो उसकी कुरीतियों पर अंकुश के नाम पर मात्र संविधान का एक टुकड़ा...
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