झूठ के सहारे चल रही योगी सरकार? नौकरी देने के नाम पर डाली फर्जी वीडियो…विवाद बढ़ा तो किया डिलीट

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 12 मार्च 2021, 05:30 AM Updated: 12 मार्च 2021, 05:30 AM
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देश में बेरोजगारी चरम पर है, जिसके कारण केंद्र की मोदी सरकार आये दिन विपक्षी पार्टियों के निशाने पर रहती है। बीजेपी शासित यूपी का आलम भी कुछ ऐसा ही है। जनसंख्या की दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में भी बेरोजगारी दर बढ़ते जा रही है। 

इन दिनों यूपी की योगी सरकार की ओर से प्रदेश में लाखों सरकारी नौकरी देने का दावा करने वाली वीडियोज सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है। लेकिन इसी बीच सीएम योगी (Yogi Adityanath) के ऑफिस की ओर से एक ऐसी वीडियो शेयर (Fake job video) की गई, जिस पर बवाल मच गया। 

देखते ही देखते यह वीडियो काफी तेजी से वायरल हो गई और योगी सरकार द्वारा किए जा रहे नौकरी के दावों की पोल खुल गई। इस मामले को लेकर विपक्षी पार्टियों ने प्रदेश की योगी सरकार पर जमकर सवाल उठाए। जिसके बाद योगी आदित्यनाथ की ऑफिस की ओर से आनन-फानन में उस ट्वीट को डिलीट कर दिया गया।

यूपी सरकार ने डाली फर्जी वीडियो

दरअसल, बीते दिन गुरुवार को सीएम योगी (Yogi Adityanath) के कार्यालय से संचालित होने वाले आधिकारिक ट्विटर अकाउंट की ओर से एक वीडियो जारी किया गया। वीडियो जारी करते हुए ट्वीट में क्या लिखा गया कि ‘सरकारी नौकरी हेतु आयोजित परीक्षाओं के समयबद्ध परिणामों एवं पारदर्शी चयन प्रक्रिया के लिए मुख्यमंत्री श्री @myyogiadityanath जी महाराज को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए श्री दुर्गेश चौधरी (Durgesh Choudhary) जी।‘

वीडियो में एक युवक ने अपना नाम दुर्गेश चौधरी (Durgesh Choudhary) बताते हुए कहा था कि सरकार के द्वारा राजस्व लेखपाल की भर्ती आई, जिसमें हमने लिखित परीक्षा दी और फिर मेरा नाम इंटरव्यू में आ गया। इंटरव्यू के बाद फाइनल रिजल्ट आया जिसके परिणाम में मैं राज्य से लेखपाल पद के लिए चयनित हो गया। 

युवक ने कहा कि इस दरमियान लिखित परीक्षा से लेकर इंटरव्यू तक पूरी निष्पक्षता के साथ सेलेक्शन किया गया था। इसके बाद दुर्गेश ने अपने कार्यकाल का अनुभव साझा करते हुए सरकारी योजनाओं को कल्याणकारी बताने के साथ उत्तर प्रदेश राज्य के मुख्यमंत्री का धन्यवाद दिया।

जानें क्या है पूरा मामला?

इस मामले में ट्विस्ट तब आया जब यह स्पष्ट हुआ कि आखिरी बार लेखपालों की भर्ती साल 2015 में हुई थी। तो ऐसे में सवाल उठने लगे कि दुर्गेश चौधरी का चयन कब और कैसे हुआ? जब लेखपाल की भर्ती शुरू हुई थी तो उस समय प्रदेश में अखिलेश सिंह यादव की सरकार थी। 2016 में भर्ती की प्रक्रिया पूरी हुई थी और बीजेपी 2017 में प्रदेश की सत्ता में आई थी।

दुर्गेश चौधरी के वीडियो को मुख्यमंत्री के ऑफिस की ओर से ट्वीट कर चार साल में चार लाख सरकारी नौकरी का दावा किया गया था। ट्वीट होते ही कई लोगों ने इस मुद्दे को पकड़ लिया। अखिलेश सरकार के समय के लेखपाल भर्ती का श्रेय लेने पर लोग योगी सरकार को ट्रोल करने लगे। मामले को बढ़ते देख योगी आदित्यनाथ की ऑफिस की ओर से ट्वीट डिलीट कर दिया गया।

‘…मुख्यमंत्री का यह स्तर?’

यूपी की सियासत में फिर से अपना पैर जमाने की कोशिश कर रही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की ओर से इस मामले पर प्रतिक्रिया दी गई। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा (Pawan Kheda) ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए योगी सरकार पर हमला बोला। 

उन्होंने कहा, ‘मुख्यमंत्री जी के आधिकारिक अकाउंट से दुर्गेश चौधरी नामक व्यक्ति का वीडियो डाला गया जिसमें उसने लेखपाल की पारदर्शी भर्ती के लिए योगी जो को धन्यवाद दिया। अब पता चला है 5 साल से लेखपाल की कोई भर्ती ही नहीं आयी है, पोल खुलते ही ट्वीट डिलीट कर दिया गया है। मुख्यमंत्री का यह स्तर?’

AAP ने बोला हमला

वहीं, दूसरी ओर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में हिस्सा लेने का ऐलान कर चुकी आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी इस मामले पर योगी सरकार को निशाने पर लिया। AAP नेता संजय सिंह (Sanjay Singh) ने ट्वीट करते हुए कहा, ‘भाजपा में ऊपर से लेकर नीचे तक झूठ बोलने वालों का जमावड़ा है। अब आदित्यनाथ जी को ही देख लीजिये एक नौजवान का फ़र्ज़ी विडीओ डाल दिया नौकरी देने का धन्यवाद भी ले लिया चारों तरफ थू-थू हुई तो वीडियो Delete करना पड़ा। क्या BJP को अब अपना नाम बदलकर “भारतीय झूठ्ठा पार्टी” रख लेना चाहिये?’

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