डॉ भीमराव अंबेडकर अंग्रेजों को भारत से क्यों जाने नहीं देना चाहते थे ? यहां समझिए

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Published: 13 Oct 2023, 12:00 AM | Updated: 13 Oct 2023, 12:00 AM

अंग्रेजो के जाने से क्यों डरते थे बाबा साहेब ? क्यों अंग्रेजों के जाने से थे डॉ भीमराव अंबेडकर? ऐसे क्या कारण रहे होंगे जिसके चलते बाबा साहेब ने नहीं लिया था भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग ?

सभी महान इंसानों के दो तरह के फोल्लोवेर्स होते है, पहले वे होते है जो उनके गुणगान गाते है दूसरे वो होते है जो उनके ऊपर ऊँगली उठाते है. ऐसे ही बाबा साहेब के साथ भी होता है. कुछ लोग ऐसे है जो बाबा साहेब को अच्छा बताते है, उनका गुणगान करते है और कुछ ऐसे भी इंसान है जो बाबा साहेब के खिलाफ बोलते है, कहते है कि बाबा साहेब ने आजादी की लड़ाई में कोई भागीदारी नहीं निभाई थी. आज हम आपको इसके पीछे के कारणों से वाखिफ करवाएंगे, कि क्यों बाबा साहेब ने भारत छोड़ो आन्दोलन में भाग नहीं लिया था? बाबा साहेब नहीं चाहते थे कि भारत को एकदम से आदाजी मिल जाएं. बाबा साहेब जो अपने समय के महान समाज सुधार रहे है, वे क्यों अंग्रेजो के जाने से डरते थे?

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अंग्रेजों के जाने से दुखी क्यों थे डॉ भीमराव अंबेडकर?

बाबा साहेब की जीवनी पर फ्रेंच राजनीति विज्ञानी क्रिस्तोफ ने एक पुस्तक लिखी थी. उस किताब के मुताबिक, बाबा साहेब अंग्रेजो के जाने से डरते थे, क्यों कि जिस समय भारत में भारत छोड़ो आन्दोलन चल रहा था. उसी समय दुनिया विश्व युद्ध से जूझ रही थी. पूरी दुनिया ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान और जर्मनी की क्रूरता देखी थी. बाबा साहेब को यह पता था कि जापान और जर्मनी का फांसीवाद अंग्रेजो से कहीं ज्यादा खतनाक है, अगर उस समय अंग्रेज भारत को छोड़ कर चलते जाते तो भारत पर फांसीवाद का खतरा मंडरा सकता था. जिसके चलते बाबा साहेब को अंग्रेजो के जाने का दुःख था. इसकी दूसरी तरफ भारत में भरत छोडो आन्दोलन चल रहा था, जिसमे बाबा साहेब ने हिस्सा लेने से इंकार कर दिया था. उस समय बाबा साहेब अंग्रेजो की वायसराय काउंसिल के सदस्य थे, जिसके चलते लोगो को लगा कि बाबा साहेब अंग्रेजो की तरफ से बोलते है.

बाबा साहेब नहीं चाहते थे कि आजादी एकदम से मिले

हम आपको बता दे कि बाबा साहेब नहीं चाहते थे कि भारत को अंग्रेजो से आजादी एक दम से मिल जाये. बाबा साहेब अंग्रेजो की वायसराय काउंसिल के सदस्य होने के नाते उन्होंने भारत के लोगो के लिए बहुत काम किया था, साथ ही सेना में दलितों को भी भर्ती होने का अधिकार दिला दिया था. बाबा साहेब ने अनुसार अंग्रेजो के राज में दलितों को उनके अधिकार दिलाये जा सकते है इसीलिए बाबा साहेब नहीं कहते थे कि भारत से अंग्रेज एकदम से चले जाये, जिसके चलते बाबा साहेब धीरे धीरे आजादी मिलने के पक्षधर थे.

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