क्या है धारा 188 और आप इससे कैसे बच सकते हैं?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 25 Apr 2023, 12:00 AM | Updated: 25 Apr 2023, 12:00 AM

IPC Section 188 – भारत में साल 2020 में कोरोना (Corona) महामारी के दौरान धारा 188  का जिक्र हुआ और इस कोरोना महामारी के दौरान कई लोगों पर धारा 188 के तहत मामले भी दर्ज हुए. वहीं इस बीच इस पोस्ट के जरिये हम आपको इस बात की जानकारी देने जा रहे हैं कि धारा 188  है क्या और इस धारा 188  के तहत सजा और जुर्माने का क्या प्रावधान है.

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जानिए क्या है धारा 188

जानकारी के अनुसार, भारत सरकार ने कोरोना (Corona) महामारी से लड़ने के लिए लॉकडाउन की घोषणा की थी और ये घोषणा महामारी एक्ट यानी Epidemic Diseases Act, 1897 के तहत की गई थी. वहीं इस एक्ट के अनुसार, अगर कोई शख्स लॉक डाउन या उसके दौरान सरकार के निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 188 के तहत कानूनी कार्रवाई किए जाने का प्रावधान है.

क्या है सजा और जुर्माने का प्रावधान

वहीं इस महामारी एक्ट के सेक्शन 3 के अनुसार अगर कोई इस कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है या सरकारी निर्देशों व नियमों को तोड़ता है, तो उसे दंडित किया जा सकता है. किसी सरकारी कर्मचारी के ऐसा करने पर भी यह धारा लगाई जा सकती है.वहीं इस मामले में इस कानून का उल्लंघन करने या कानून व्यवस्था को तोड़ने पर दोषी को कम से कम एक महीने की जेल या 200 रुपये जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है. वहीं दूसरा- अगर आपके द्वारा सरकार के आदेश का उल्लंघन किए जाने से मानव जीवन, स्वास्थ्य या सुरक्षा, आदि को खतरा होता है, तो आपको कम से कम 6 महीने की जेल या 1000 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा दी जा सकती है।

IPC Section 188

जानकारी के लिए बता दें, यह धारा भारत की सेना पर लागू नहीं होती है. पहले आईपीसी जम्मू एवं कश्मीर में भी लागू नहीं होती थी. लेकिन धारा 370 हटने के बाद वहां भी आईपीसी लागू हो गई. इससे पहले वहां रणबीर दंड संहिता (RPC) लागू होती थी. वहीं क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC 1973) के पहले शेड्यूल के अनुसार, दोनों ही स्थिति में जमानत मिल सकती है और कार्रवाई किसी भी मैजिस्ट्रेट द्वारा की जा सकती है.

ब्रिटिश ने शुरू की थी IPC

ये धारा ब्रिटिश कालीन भारत के पहले कानून आयोग की सिफारिश पर आईपीसी 1860 में अस्तित्व में आई थी और इसके बाद इसे भारतीय दंड संहिता के तौर पर 1 जनवरी 1862 को लागू किया गया था. मौजूदा दंड संहिता को हम सभी भारतीय दंड संहिता 1860 के नाम से जानते हैं. इसका खाका लॉर्ड मेकाले ने तैयार किया था. बाद में समय-समय पर इसमें कई तरह के बदलाव किए किये जाते रहे हैं.

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