Varun Gandhi political comeback: उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से बीजेपी के पूर्व सांसद वरुण गांधी ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी और बेटी भी मौजूद थीं। वरुण गांधी ने पीएम मोदी से आशीर्वाद लिया और मार्गदर्शन प्राप्त करने की इच्छा जताई। मुलाकात की तस्वीर वरुण गांधी ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर की और लिखा कि प्रधानमंत्री के आभामंडल में पितृवत स्नेह और संरक्षण का भाव है। उन्होंने कहा कि इस मुलाकात से यह विश्वास और भी मजबूत हुआ कि मोदी देश और देशवासियों के सच्चे अभिभावक हैं।
मुलाकात पर सियासी अटकले (Varun Gandhi political comeback)
वरुण गांधी की यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब पांच राज्यों के चुनावी बिगुल बज चुके हैं। इस समय उनकी पीएम से मुलाकात को लेकर कई सियासी अटकले लग रही हैं। खासकर यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या बीजेपी के पूर्व सांसद का लंबा सियासी वनवास अब खत्म होने वाला है।
वरुण गांधी की पत्नी मूल रूप से बंगाली हैं, इस वजह से मुलाकात को पश्चिम बंगाल के चुनावी परिप्रेक्ष्य में भी जोड़ा जा रहा है। बीजेपी इस बार बंगाल में सत्ता वापसी के लिए पूरी ताकत लगा रही है और वरुण गांधी का वहां चुनाव प्रचार में इस्तेमाल किया जा सकता है।
वरुण गांधी ने पहले भी बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव रहते हुए बंगाल का प्रभारी रहकर पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने का काम किया था। उस समय उन्होंने बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष रहे राहुल सिन्हा के साथ मिलकर कार्य किया। अब जब राहुल सिन्हा को राज्यसभा भेजा जा चुका है, बीजेपी के वरिष्ठ नेता वरुण गांधी को बंगाल में फिर से सक्रिय भूमिका में ला सकते हैं।
वरुण गांधी और बीजेपी के बीच दूरी
वरुण गांधी पिछले कुछ समय से बीजेपी से नाराज रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव में पीलीभीत से उनका टिकट काट दिया गया और उनकी जगह जितिन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया गया, जो अब मोदी सरकार में मंत्री हैं।
वरुण गांधी की मां और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी को भी सुल्तानपुर से टिकट मिला था, लेकिन वे चुनाव हार गईं। इसके बाद से गांधी परिवार और बीजेपी के बीच दूरी बढ़ गई थी। वरुण गांधी अक्सर सरकार की नीतियों पर मुखर रहते थे, चाहे वह किसान मुद्दा हो या युवाओं से जुड़ी समस्याएं।
क्या खत्म हो रहा है सियासी वनवास?
प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के बाद वरुण गांधी ने तस्वीर साझा करते हुए पीएम को पिता समान बताया। इस कदम से यह संकेत मिलता है कि राजनीतिक दूरियां कम हो रही हैं।
वरुण गांधी तीन बार सांसद रह चुके हैं 2009 में पीलीभीत, 2014 में सुल्तानपुर और 2019 में फिर से पीलीभीत से चुने गए। 2024 में उनका टिकट काटा गया था। अब उनकी संगठन या सरकार में वापसी की संभावना चर्चा में है।
भविष्य की संभावनाएं
बीजेपी के संगठन में अब नए ढांचे की तैयारी चल रही है। उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और अक्टूबर में राज्यसभा के लिए 10 सीटें खाली होंगी। ऐसे में वरुण गांधी को राज्यसभा भेजने की संभावना है। इसके अलावा नए संगठन में उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है।
बीजेपी में राजनाथ सिंह के नेतृत्व में वरुण गांधी का कद सम्मानजनक था। उन्होंने पश्चिम बंगाल में पार्टी प्रभारी और महासचिव के रूप में काम किया। 2013 में नरेंद्र मोदी को पीएम उम्मीदवार बनाने के समय भी उन्होंने पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाई थी।
लेकिन अमित शाह के अध्यक्ष बनने के बाद उन्हें महासचिव पद से हटाया गया और बंगाल की जिम्मेदारी वापस ली गई। इसके बाद वे धीरे-धीरे हाशिए पर चले गए और बागी तेवर अपनाने लगे।
प्रधानमंत्री मोदी से हालिया मुलाकात के बाद यह साफ संकेत मिल रहा है कि वरुण गांधी की बीजेपी में वापसी संभव है। उनके राजनीतिक भविष्य पर अब ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। बंगाल में चुनावी रणनीति, यूपी की आगामी विधानसभा चुनाव और राज्यसभा सीटें… सब मिलकर वरुण गांधी को सक्रिय भूमिका में ला सकती हैं।
वरुण गांधी की इस मुलाकात ने बीजेपी में उनके भविष्य को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है और साफ संकेत हैं कि उनका सियासी वनवास अब धीरे-धीरे खत्म हो सकता है।
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