तेल के रास्ते पर टैक्स गेम! ईरान ओमान होंगे मालामाल लेकिन भारत के लिए क्या है खास? Strait Of Hormuz Reopening

Nandani | Nedrick News Iran Published: 08 Apr 2026, 11:56 AM | Updated: 08 Apr 2026, 11:56 AM

Strait Of Hormuz Reopening: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान जिस एक मुद्दे ने पूरी दुनिया की धड़कनें तेज कर दी थीं, वह था स्ट्रेट ऑफ होर्मुज। यह वही अहम समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का करीब 20 फीसदी तेल गुजरता है। ऐसे में जब दोनों देशों के बीच सीजफायर की घोषणा हुई, तो सबसे बड़ा सवाल यही उठा—आखिर होर्मुज का क्या होगा?

अब इस पर स्थिति कुछ हद तक साफ हो गई है। ईरान ने दो हफ्तों के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का फैसला किया है। इससे उन देशों को बड़ी राहत मिली है, जिनके जहाज इस रूट पर फंसे हुए थे।

और पढ़ें: होर्मुज से लेकर प्रतिबंध तक… सीज़फायर पर ईरान की 10 मांगों ने अमेरिका को घेरा! Iran-US Ceasefire

दो हफ्ते का सीजफायर, जहाजों को राहत | Strait Of Hormuz Reopening

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित दो हफ्तों के युद्धविराम के बाद ईरान भी इस अवधि में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करेगा। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी इस सीजफायर को मंजूरी दे दी है। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि शुक्रवार को अमेरिका के साथ बातचीत होगी। हालांकि, ईरान ने साफ किया है कि यह युद्ध का अंत नहीं है, बल्कि सिर्फ एक अस्थायी कदम है।

फिलहाल के लिए सबसे बड़ी राहत उन जहाजों को मिली है, जो होर्मुज के पास रुके हुए थे और आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे थे।

होर्मुज में आवाजाही कैसे होगी नियंत्रित?

सीजफायर के साथ ही इस जलमार्ग में व्यवस्था को लेकर भी एक प्लान सामने आया है। इसका मकसद है कि जहाजों की आवाजाही को व्यवस्थित और सुरक्षित बनाया जा सके।

  • स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित आवागमन के लिए एक विशेष प्रोटोकॉल तैयार करने की बात कही गई है।
  • इस व्यवस्था के तहत ईरान की नियंत्रण भूमिका को भी मान्यता दी जाएगी।
  • ईरान चाहता है कि इस क्षेत्र में उसकी आर्थिक और रणनीतिक अहमियत को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया जाए।

यानी आने वाले समय में यह जलमार्ग पहले जैसा पूरी तरह खुला और स्वतंत्र नहीं रहेगा, बल्कि एक नियंत्रित रास्ते की तरह काम कर सकता है।

ईरान-ओमान का टोल प्लान क्या है?

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा टोल टैक्स को लेकर हो रही है। खबर है कि फिलहाल ईरान जिन जहाजों को गुजरने की अनुमति दे रहा है, उनसे प्रति जहाज करीब 20 लाख अमेरिकी डॉलर वसूले जा रहे हैं। हालांकि, किन देशों से यह शुल्क लिया गया है, इसकी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले समय में ओमान भी इस व्यवस्था में शामिल हो सकता है। यानी ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूल सकते हैं।

अगर ऐसा होता है, तो यह जलमार्ग अब एक “मुक्त अंतरराष्ट्रीय रूट” नहीं रहेगा। इससे दुनिया के अन्य रणनीतिक समुद्री रास्तों पर भी असर पड़ सकता है, जहां कंट्रोल करने वाले देश टोल लगाने की मांग कर सकते हैं। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि टोल से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल वह युद्ध के बाद अपने देश के पुनर्निर्माण में करेगा। वहीं ओमान इस राशि का क्या करेगा, यह अभी साफ नहीं है।

टोल से कितनी कमाई कर सकता है ईरान?

होर्मुज पर टोल लगाने की योजना ईरान के लिए बड़ा आर्थिक मौका बन सकती है। रिपोर्ट्स के अनुसार, युद्ध के दौरान ही कुछ जहाजों से 10 से 15 मिलियन डॉलर तक का टोल वसूला गया। अगर प्रति जहाज 2 मिलियन डॉलर का शुल्क तय होता है, तो ईरान सालाना 70 से 80 अरब डॉलर तक कमा सकता है। कुछ अनुमानों में यह आंकड़ा 100 अरब डॉलर सालाना तक पहुंचने की बात कही जा रही है। यह मॉडल कुछ हद तक मिस्र की स्वेज नहर जैसा हो सकता है, जहां से टोल के जरिए भारी कमाई होती है।

भारत के लिए क्या मायने हैं?

जहां एक तरफ दुनिया के कई देशों के लिए होर्मुज चिंता का कारण बना हुआ था, वहीं भारत के लिए स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही। भारत के ईरान और ओमान दोनों के साथ अच्छे संबंध हैं, जिसका फायदा साफ नजर आया। तनाव के दौरान भी भारत के जहाजों की आवाजाही पूरी तरह नहीं रुकी। सरकारी जानकारी के मुताबिक, हाल ही में भारत के 8 जहाज होर्मुज से गुजरे और उन्हें कोई टोल नहीं देना पड़ा।

अगर भविष्य में ईरान और ओमान मिलकर कोई नई व्यवस्था लागू करते हैं, तब भी भारत को राहत मिलने की उम्मीद है। संभव है कि भारत को टैक्स में छूट मिले या उसके जहाजों के लिए नियम आसान बनाए जाएं।

अभी राहत, आगे अनिश्चितता

फिलहाल दो हफ्तों के सीजफायर और सुरक्षित आवाजाही के फैसले से वैश्विक स्तर पर थोड़ी राहत जरूर मिली है। लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत और होर्मुज को लेकर बनने वाली नई नीतियां तय करेंगी कि यह अहम जलमार्ग भविष्य में कितना खुला और कितना नियंत्रित रहेगा।

दुनिया की ऊर्जा सप्लाई काफी हद तक इसी रास्ते पर निर्भर है, ऐसे में यहां होने वाला हर फैसला वैश्विक अर्थव्यवस्था पर सीधा असर डाल सकता है।

और पढ़ें: अमेरिकी पायलट को बचाने का मिशन भारी पड़ा? 5 कमांडो की मौत और ईरान ने कहा – ऑपरेशन फेल | America Pilot Rescue Operation

Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds