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वाराणसी: गंगा की लहरों में सी-प्लेन उतरने में अब मार्च तक लगा ब्रेक, इस वजह से हो रही देरी

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 20 Jan 2022, 12:00 AM | Updated: 20 Jan 2022, 12:00 AM

वाराणसी (Varanasi) में कुछ नया होने जा रहा है। दरअसल, वहां गंगा में ‘सी प्लेन’ (Sea Plane Ganga) के उड़ान भरने की उम्मीद अब भी बरकरार है। मार्च के बाद इसे लेकर काम में तेजी लाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। जिले में इसके लिए जो गठित सात सदस्यीय टीम है उसका इस संबंध में कहना है कि काम होना तो तय है पर अब काम आचार संहिता के खत्म हो जाने के बाद ही होगा। आचार संहिता (Code of Conduct) अगर नहीं लगी रहती तो इसका उद्घाटन का काम दिसंबर के महीने में ही हो जाता। 

खैर, गंगा पर जलयान, जलपोत, रो पैक्स पहले ही चल रहे हैं। नावें सीएनजी से संचालित हो रही हैं। सी प्लेन उड़ाने की तैयारी तो है पर इसी दौरान महत्वाकांक्षी परियोजना श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के नए रूप के लोकार्पण की तैयारी के कारण इसको रोका गया। दूसरी तरफ डीएम की ओर से गठित सात सदस्यीय टीम की तरफ से सी प्लेन उड़ान बाबत सौंपी गयी फिजिबिलिटी रिपोर्ट शासन के पास अगस्त में भेज दिया गया था। इसमें कहा गया है कि बनारस से सी प्लेन संचालन को लेकर कोई तकनीकी बाधा नहीं है। काशी से सी प्लेन संचालन के बाद पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा वहीं रोजगार के कई द्वार खुलेंगे। काशी की इकोनॉमी को इससे रफ्तार मिलने की भी मिलेगी।

मथुरा, प्रयागराज और अयोध्या के लिए होगा बेहतर

सी प्लेन के उड़ान से बनारस की आर्थिक स्थिति तो बेहतर होगी ही साथ ही पर्यटन की राह सुगम होगी। सी प्लेन काशी से मथुरा-अयोध्या और प्रयागराज तक उड़ाया जाएगा। रूट वगैरह तय भी कर लिया गया है। 

प्लेन संचालन के को लेकर जो गठित सात सदस्यीय कमेटी है उसमें गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई, पीडब्ल्यूडी, प्रभागीय वनाधिकारी, बंधी प्रखंड, संभागीय परिवहन अधिकारी, पर्यटन व वीडीए के अधिकारियों को शामिल हैं। टीम ने सी प्लेन उड़ान को लेकर अध्ययन किया था और फिर फिजिबिलिटी रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी। कमेटी ने सी प्लेन के उड़ान को लेकर किसी भी तरह के तकनीकी बाधा नहीं होने की बात कही है। बताया जा रहा है कि शासन ने सहमति दे दी है।

सी प्लेन की खासियत को जान लेते हैं-

-400 किलोमीटर की दूरी एक घंटे में तय करेगी।

-प्लेन पानी और जमीन दोनों ही जगहों से उड़ान भरने और लैंड करने में सक्षम है। 

-उड़ान भरने और लैंड को एक किलोमीटर की सीमा बगैर बाधा के जरूरत पड़ती है।

-कमेटी की रिपोर्ट के हिसाब से अनुसार बनारस में खिड़किया घाट, राजघाट और सामने घाट के बीच, इसके अलावा सामने घाट से विश्वसुंदरी पुल के बीच ऐसा खाली जगह मैंजूद है। 

-प्लेन में एक साथ करीब करीब 10 से 15 लोग बैठ पाएंगे। 

-पानी से उड़ान भरने के लिए फ्लोटिंग जेट्टी की जरूरत होती है। यह काफी हल्का होता है और इस कारण कम ईंधन खर्च होता है।

– 400 किलोमीटर तक की यात्रा एक व्यक्ति करीब 15 सौ रुपये चुकाकर कर पाएगा। 

– गुजरात में अक्टूबर 2020 में देश में पहली सी प्लेन सेवा शुरू हुई अहमदाबाद के साबरमती रिवर फ्रंट से केवडिया के बीच।

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