RSS से जुड़ी पत्रिका ने एमेजॉन को धर्मांतरण के फंडिंग को लेकर बनाया निशाना

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 15 Nov 2022, 12:00 AM | Updated: 15 Nov 2022, 12:00 AM

धर्मांतरण के फंडिंग को लेकर बनाया निशाना

राष्ट्रीय सवयंसेवक संघ (RSS) से जुडी हुई एक पत्रिका ‘द ऑर्गनाइज़र’ ने अपने नए अंक में एक कवर स्टोरी छापी है जिसमें ई-कॉमर्स दिग्गज अमेज़न पर देश के पूर्वोत्तर में धर्मांतरण के लिए धन देने का आरोप लगाया गया है। इस पत्रिका के एक कवर स्टोरी में “अमेजिंग क्रॉस कनेक्शन” शीर्षक नमक एक आर्टिकल छपि है। पत्रिका ने यह आरोप लगाया कि कंपनी के “अमेरिकन बैपटिस्ट चर्च” नामक संगठन के साथ वित्तीय लेन -देन हैं, इस लेक ,इ यह भी दावा किया गया है कि, यह क्षेत्र में “धर्मांतरण मॉडल” चला रहा है। हालांकि, अमेज़न ने इन आरोपों से इनकार किया है।

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अब तक 25 हजार लोगों को ईसाई धर्म में किया परिवर्तित

पत्रिका  के अनुसार “ई-कॉमर्स की दिग्गज कंपनी अमेज़ॅन अमेरिकी बैपटिस्ट चर्च द्वारा चलाए जा रहे ईसाई रूपांतरण मॉड्यूल का वित्तपोषण कर रही है। भारत के विशाल जान संख्या को मिशनरी रूपांतरण मिशन के तहत धन  देने के लिए बहुराष्ट्रीय कंपनियों और चर्च द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग करने की बात कहु गई है”।

पत्रिका ने यह भी आरोप लगाया गया कि बैपटिस्ट चर्च भारत में All India Mission (AIM) नाम से एक मोर्चा चला रहा था। पत्रिका ने दावा किया, “यह उनका फ्रंटल संगठन है जिसने अपनी वेबसाइट पर खुले तौर पर दावा किया है कि उन्होंने पूर्वोत्तर भारत में 25 हजार लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित किया है।”

अमेज़न ने किया अपना बचाव 

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए अमेज़ॅन के एक प्रवक्ता ने कहा कि, “अमेज़ॅन इंडिया का AIM या उनके सहयोगियों के साथ कोई संबंध नहीं है और न ही अमेज़ॅनस्माइल प्रोग्राम, भारतीय अमेज़ॅन मार्केटप्लेस पर संचालित होता है। जहां इस तरह का AmazonSmile प्रोग्राम होता है, वहां ग्राहक इस तरह के चैरिटी को दान करने का विकल्प चुन सकते हैं जिसे वे कई गैर-लाभकारी संस्थाओं (Non-profit organisation) को पसंद करते हैं जो ऐसे प्रोग्राम के तहत खुद को पंजीकृत करते हैं। AmazonSmile कार्यक्रम में भाग लेने वाले किसी भी तरह के विचारों का समर्थन नहीं करता है। ”

पहले भी लग चुके हैं ऐसे आरोप 

इससे पहले भी सितंबर 2021 में, “पांचजन्य” नमक पत्रिका ने एक कवर स्टोरी प्रकाशित की जिसमें कथित भ्रष्ट प्रथाओं के लिए अमेज़ॅन की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी से की गई थी। उस पर ईसाई संगठनों को धन देने में शामिल होने का आरोप भी लगाया गया। हालांकि, इस पत्रिका का संबंध भी RSS से था। 

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