PM Modi Israel Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दो दिवसीय दौरे पर इजरायल पहुंच चुके हैं। उन्हें एयरपोर्ट पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने स्वागत किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत और इजरायल के बीच मौजूदा रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को और गहरा करना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल रवाना होने से पहले कहा था, “हमारे देशों के बीच एक मजबूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी है।” उन्होंने अपने इजरायली समकक्ष से मुलाकात की योजना बनाई है और इजरायल की संसद ‘कनेस्सेट’ को भी संबोधित करेंगे। मोदी का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ा हुआ है और अमेरिका ईरान पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है।
पाकिस्तान में मोदी दौरे को लेकर ‘घबराहट’ (PM Modi Israel Visit)
मोदी के इजरायल दौरे को लेकर पाकिस्तान का मीडिया काफी संवेदनशील नजर आया है। पाकिस्तानी अखबार Dawn ने लिखा कि भारत और इजरायल के बीच पूर्ण कूटनीतिक संबंध 1992 में शुरू हुए थे, लेकिन 2014 के बाद मोदी के सत्ता में आने के बाद रिश्तों में नई गर्मजोशी आई।
Landed in Israel.
I am extremely honoured to be received by Prime Minister Netanyahu and Mrs. Netanyahu at the airport. I look forward to engaging in bilateral discussions and fruitful outcomes that strengthen the India-Israel friendship.@netanyahu pic.twitter.com/FYGDv0M3Xy
— Narendra Modi (@narendramodi) February 25, 2026
मोदी ने 2017 में प्रधानमंत्री के तौर पर इजरायल का पहला दौरा किया था, और अगले साल नेतन्याहू ने भी भारत का दौरा किया। Dawn ने यह भी लिखा कि मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के दौरान इजरायली ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल भारत ने अपनी डिफेंस रणनीति में किया था।
Welcome to Israel my dear friend @narendramodi 🇮🇱🙏🇮🇳 pic.twitter.com/AnRtceD9Ci
— Benjamin Netanyahu – בנימין נתניהו (@netanyahu) February 25, 2026
पाकिस्तानी मीडिया का यह भी कहना है कि मोदी का दौरा उनके लिए “खतरे की घंटी” है। जियो न्यूज के ‘कैपिटल टॉक’ शो में कहा गया कि नेतन्याहू का बयान, जिसमें उन्होंने कट्टर शिया और सुन्नी ताकतों के खिलाफ गठबंधन बनाने की बात कही, पाकिस्तान के लिए चिंता का विषय है।
नेतन्याहू का ‘हेक्सागन गठबंधन’
इजरायली पीएम ने 22 फरवरी को कैबिनेट बैठक में एक गठबंधन का प्रस्ताव रखा, जिसमें भारत, ग्रीस, साइप्रस, कुछ अरब और अफ्रीकी देश शामिल होंगे। उनका मकसद था उन देशों को एक साथ लाना जो कट्टरपंथी ताकतों का मुकाबला करने में सहयोग कर सकें। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि यह गठबंधन सुरक्षा, खुफिया जानकारी और रक्षा सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
पाकिस्तानी विश्लेषकों ने इसे एंटी-मुस्लिम गठबंधन करार दिया है और कहा कि भारत के शामिल होने से पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं में इजाफा हुआ है। पाकिस्तान की पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने कहा कि इस दौरे से पाकिस्तान की स्थिति और जटिल हो गई है, क्योंकि देश ने अब तक इजरायल को मान्यता नहीं दी है।
भारत-इजरायल रिश्तों का व्यापार और रक्षा पहलू
भारत और इजरायल के संबंध केवल रणनीतिक नहीं हैं, बल्कि व्यापार और रक्षा में भी गहरे हैं। 1992 में दोनों देशों का व्यापार 200 मिलियन डॉलर था, जो 2024 में बढ़कर 6.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया। भारत इजरायल को मोती, कीमती पत्थर, ऑटोमोटिव डीजल, रसायन, मशीनरी और विद्युत उपकरण का निर्यात करता है, जबकि आयात में पेट्रोलियम, रासायनिक मशीनरी और परिवहन उपकरण शामिल हैं।
WATCH LIVE: Prime Minister Benjamin Netanyahu and his wife welcome Indian Prime Minister Narendra Modi to Israel, in an official ceremony at Ben Gurion Airport. 🇮🇱🇮🇳 https://t.co/FhaaOSpn6a
— Prime Minister of Israel (@IsraeliPM) February 25, 2026
विशेषज्ञ कबीर तनेजा ने बताया कि मोदी की यात्रा मुख्य रूप से आवश्यकता पर आधारित है। भारत को आधुनिक रक्षा तकनीक की जरूरत है और इजरायल इस क्षेत्र में प्रमुख साझेदार है। इसके अलावा, मध्य-पूर्व में स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए अहम हैं।
Welcome to Israel my dear friend @narendramodi 🇮🇱🙏🇮🇳 pic.twitter.com/AnRtceD9Ci
— Benjamin Netanyahu – בנימין נתניהו (@netanyahu) February 25, 2026
भारत का संतुलित रुख
मोदी का यह दौरा भारत की विदेश नीति की परीक्षा भी है। भारत को इजरायल के साथ साझेदारी को गहरा करना है, लेकिन अरब देशों और फिलिस्तीन के साथ संतुलन भी बनाए रखना है। भारत ने हाल ही में वेस्ट बैंक में इजरायली गतिविधियों की आलोचना वाले प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें 100 से ज्यादा देशों ने हस्ताक्षर किए।
It is indeed a historic visit to Israel. I’m confident it will add new momentum to the bilateral friendship between our nations. https://t.co/3dZpsf4Tqt
— Narendra Modi (@narendramodi) February 25, 2026
विशेषज्ञ हर्ष वी. पंत के अनुसार, यह यात्रा दिखाएगी कि भारत इजरायल के साथ प्रतिबद्ध है, लेकिन मध्य-पूर्व की संवेदनशीलताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी प्राथमिकताओं का संतुलन भी बनाए रखता है।
वैश्विक मीडिया की प्रतिक्रिया
कतर आधारित चैनल अल-जजीरा ने लिखा कि मोदी का दौरा इजरायल को यह दिखाने का अवसर है कि भारत ग्लोबल साउथ में एक सम्मानित और लोकप्रिय नेता है। भारत ने फिलिस्तीन की स्थापना का समर्थन किया है, लेकिन इजरायल के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी गहरा किया है।
Welcome back to Israel, Prime Minister @narendramodi!
A historic visit underway.
🇮🇱🤝🇮🇳 pic.twitter.com/Q7F8VtN12G— Prime Minister of Israel (@IsraeliPM) February 25, 2026
बीबीसी के अनुसार, भारत ने लंबे समय से फिलिस्तीन की ओर से युद्धविराम और मानवीय सहायता की अपील की है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों में तुरंत समर्थन देने में थोड़ा समय लिया। विशेषज्ञों का कहना है कि मोदी का दौरा भारत की विदेश नीति को परखने का अवसर है, और यह दिखाएगा कि वह इजरायल और अरब देशों के बीच संतुलन बनाए रख सकता है।
