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बाबा साहेब भीम राव अंबेडकर की ये 5 किताबें जिन्हें जरूर पढ़ना चाहिए.

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 05 Oct 2022, 12:00 AM | Updated: 05 Oct 2022, 12:00 AM

अंबेडकर को कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने बताया विश्व का नंबर एक स्कॉलर

आपने बहुत सारी किताबें पढ़ी होंगी और अगर बहुत नहीं भी पढ़ी होगी तो थोड़ी बहुत तो जरूर पढ़ी होगी। पढ़ने के साथ-साथ अनेक विद्वानों ने बहुत सारी किताबें भी लिखी होगी। जब किताबों की बात हो तो हमारे संविधान निर्माता कैसे पीछे रह सकते हैं। हाँ हम बात कररहे है संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ भीम राव अम्बेडकर की। अंबेडकर ने भी बहुत सारी किताबें लिखी हैं। डॉ अंबेडकर को कोलंबिया यूनिवर्सिटी ने विश्व का नंबर एक स्कॉलर घोषित किया था। डॉ अंबेडकर, पूरे विश्व में अपनी किताबों और डिग्रियों के लिए जाने जाते हैं। अंबेडकर के निजी पुस्तकालय “राजगृह” में 50,000 से भी अधिक पुस्तकें थी और यह दुनिया की सबसे बड़ी निजी लाइब्रेरी थी। डॉ अंबेडकर को आधुनिक भारत के सबसे ओजस्वी लेखकों में गिना जाता है, विश्व के लगभग हर देश में उनके प्रशंसक मौजूद हैं। डॉ . भीमराव आंबेडकर को हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, फ्रेंच, पाली, जर्मन, मराठी, पर्शियन और गुजराती जैसी 9 भाषाओं का ज्ञान था। अम्बेडकर ने अपने विचारों को कई किताबों में उतारा, वहीं उनके जीवन पर भी कई किताबें लिखी गईंl वैसे तो अंबेडकर ने बहुत सारी पुस्तकें लिखी हैं, पर आज हम उनके द्वारा लिखी गई कुछ मशहूर पुष्तकों के बारे में बात करेंगे।

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Annihilation of Caste-1936 (जाति का उन्मूलन 1936)

जाति का उन्मूलन किताब मूल रूप से अम्बेडकर द्वारा 1936 में लिखा गया एक भाषण था। इस किताब को बाद में, एक निबंध के रूप में विकसित किया गया और अंबेडकर ने इसे स्वयं प्रकाशित किया था। निबंध में, अम्बेडकर ने हिंदू धर्म को पुरुष प्रधान हैं और महिला हितों से घृणा और दमन फैलाने वाला बताते हुए, इसकी जाति व्यवस्था और इसके धार्मिक ग्रंथों की आलोचना की थी। उन्होंने तर्क दिया कि अंतर-जातीय भोजन और अंतर-जातीय विवाह जाति व्यवस्था को खत्म करने के लिए पर्याप्त नहीं है, लेकिन यह ‘जाति व्यवस्था’ को ख़त्म करने का असली तरीका बन सकता है’।

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Who Were the Shudras? 1946 (शूद्र कौन थे? 1946)

अंबेडकर के इस किताब में शूद्र वर्ण की उत्पत्ति की चर्चा की है। अंबेडकर ने इस पुस्तक को भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता और जाति सुधारक ज्योतिराव फुले को समर्पित किया था। अंबेडकर ने हिंदू धार्मिक ग्रंथों जैसे कि ऋग्वेद, महाभारत और अन्य वैदिक धर्मग्रंथों का संदर्भ देते हुए जाति व्यवस्था की कई बातों को उल्लेखित किया है। उनके अनुसार शूद्र मूल रूप से आर्य थे और क्षत्रिय वर्ण का हिस्सा थे। अम्बेडकर ने इस किताब में आर्यन जाति के सिद्धांतों पर भी चर्चा भी की है।

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The Problem of the Rupee: Its Origin and Its Solution -1923 ( रुपए की समस्या: इसका मूल और इसका समाधान (1923)

बाबा साहेब की यह किताब आजादी से पहले भारत में पैसों से जुड़ी सवालों और समस्याओं को उठाती है। इन्हीं सवालों और समस्याओं के आधार पर भारतीय रिजर्व बैंक का सृजन हुआ था। यह किताब 1923 से भारतीय मुद्रा और बैंकिंग के इतिहास के बारे में बताती है।

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Caste in India-1917 (भारत में जातियां-1917)

असल में यह किताब बाबा साहेब अम्बेडकर द्वारा न्यूयॉर्क में मानवशास्त्रीय समारोह में पढ़ा गया एक पेपर था, जिसमें अंबेडकर ने एक सामाजिक घटना पर एक प्रस्तुति दी थी, जो ब्राह्मणों की रणनीति से निकली हुई मानी जाती हैl इस पेपर को किताब का रूप देते हुए अंबेडकर ने इसमें विवाह व्यवस्था और इसका अनुकरण करने के वाले अन्य समूहों के बारे में लिखा है।

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The Buddha and His Dhamma-1957 (द बुद्धा एंड हिज़ धम्मा 1957)

यह अम्बेडकर की अंतिम किताब थी। बुद्ध की तरफ तो सभी खींचे चले जाते हैं पर अंबेडकर जैसे पढ़े लिखे लोग भी बुद्ध से इतने प्रभावित थे की उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया था। अंबेडकर की यह किताब बुद्ध के जीवन और बौद्ध धर्म पर प्रकाश डालती हैl इस पुस्तक में उनके द्वारा उठाए गए बुद्ध से जुड़े विचार विमर्श, चार आर्य सत्य, आत्मा के सिद्धांत, कर्म और पुनर्जन्म, और अंतत भिक्षु बनने की कहानी है। द बुद्धा एंड हिज़ धम्मा अंबेडकर की आखरी किताब थी, ये किताब पांडुलिपि में लिखी गई है।

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