Mahakumbh 2025 Shop Crisis: महाकुंभ में व्यापारियों की उम्मीदें टूटी, घाटे के बोझ तले दबे दुकानदार

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 13 Feb 2025, 12:00 AM | Updated: 13 Feb 2025, 12:00 AM

Mahakumbh 2025 Shop Crisis: “बेटी की शादी के लिए महाकुंभ में दुकान लगाई थी, लेकिन अब घर-जमीन बेचने की नौबत आ गई है।” ये कहते ही सुरेश की आंखें छलक पड़ती हैं। प्रयागराज के महाकुंभ में कारोबार के सुनहरे सपने लेकर आए हजारों व्यापारियों की कहानी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने उम्मीद की थी कि इस पवित्र आयोजन में व्यापार से अच्छा मुनाफा कमाएंगे, लेकिन सख्त प्रबंधन और गलत नीतियों के चलते उनकी उम्मीदें चकनाचूर हो गईं।

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बेटी की शादी और बढ़ता कर्ज- Mahakumbh 2025 Shop Crisis

सुरेश ने अपनी बेटी की शादी के लिए महाकुंभ में दुकान लगाने का फैसला किया। उन्होंने चार दुकानों (नं. 61, 62, 63 और 64) के लिए करीब 30 लाख का कर्ज लिया, लेकिन अब तक सिर्फ 4 लाख की ही कमाई हुई है। शादी के लिए 20-25 लाख की जरूरत है, लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि घर और जमीन बेचकर ही शादी करनी पड़ेगी। सुरेश बताते हैं कि पहले के कुंभ मेलों में अच्छा मुनाफा होता था, लेकिन इस बार व्यापार पूरी तरह से ठप हो गया है।

त्रिवेणी बाजार: सबसे पॉश मार्केट, लेकिन बिना ग्राहकों के

त्रिवेणी बाजार महाकुंभ का सबसे पॉश मार्केट माना जाता है, लेकिन यहां सन्नाटा पसरा हुआ है। ज्यादातर दुकानें खाली हैं और जहां दुकानें लगी भी हैं, वहां इक्का-दुक्का ग्राहक ही नजर आते हैं। दुकानदारों की शिकायत है कि इस बार बाजार की तरफ आने वाले रास्ते पूरी तरह से ब्लॉक कर दिए गए हैं, जिससे पब्लिक यहां तक पहुंच ही नहीं पा रही।

सुरेश कहते हैं:
“पहले कुंभ मेलों में रास्ते कुछ घंटों के लिए बंद होते थे, लेकिन बाद में खोल दिए जाते थे। इस बार रास्ते पूरी तरह से सील कर दिए गए हैं। दुकान तक सामान पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है। बाइक का पास दिया गया है, लेकिन बाइक से सामान कैसे आएगा?”

70 लाख का माल, लेकिन बिक्री सिर्फ 4-5 लाख की

सुरेश 70 लाख का माल लेकर आए थे, लेकिन अब तक सिर्फ 4-5 लाख की ही बिक्री हो पाई है।
“मेरे पास 10 लोगों का स्टाफ है, जिनकी सैलरी 20-25 हजार रुपये है। मेरा रोजाना का खर्च 90 हजार रुपये है, लेकिन कमाई सिर्फ 20-25 हजार। अब सोच नहीं पा रहा कि कैसे मैनेज करूंगा।”

सुरेश की तरह ही राकेश कुमार सोनी भी 30 सालों से कुंभ में दुकान लगा रहे हैं, लेकिन इस बार का अनुभव बेहद कड़वा रहा। उन्होंने 2.85 लाख की बोली में दुकान ली थी, लेकिन अब तक जितना लगाया, उसका 1% भी रिकवर नहीं कर पाए।

व्यापार नहीं चलने की वजहें

  1. गलत प्लानिंग और मार्ग अवरोध: इस बार व्यापारियों को उम्मीद थी कि ज्यादा श्रद्धालु आने से बिक्री बढ़ेगी, लेकिन प्रशासन ने पब्लिक को मुख्य बाजार से दूर कर दिया। लोग पैदल चलकर थक जाते हैं और सीधे घर या स्टेशन जाना चाहते हैं।
  2. अत्यधिक भीड़, लेकिन ग्राहक नहीं: इस बार महाकुंभ में रिकॉर्ड भीड़ है, लेकिन लोग बाजार तक नहीं पहुंच रहे। भीड़ इतनी ज्यादा है कि लोग स्नान के बाद आराम करने की जगह ढूंढते हैं, न कि शॉपिंग करने की।
  3. शौचालयों और सफाई की समस्या: कई दुकानों के पास ही शौचालय बना दिए गए, जिससे बदबू और गंदगी के कारण ग्राहक वहां नहीं आते।
  4. वेंडरों की अनियमितता: अवैध वेंडरों ने मुख्य बाजार को घेर लिया, जिससे त्रिवेणी बाजार जैसी पॉश जगहें नजर ही नहीं आतीं।

छोटी दुकानें, बड़े नुकसान

वरुण कलवानी और उनके दोस्त ने लखनऊ से चिकनकारी सूट और बनारसी साड़ियों की दुकान लगाई थी। उन्होंने 20-22 लाख का निवेश किया, लेकिन लागत का 10% भी नहीं निकाल पाए। आशीष पांडेय ने 2.5 लाख लगाकर दुकान ली, लेकिन इंटीरियर पर 60 हजार खर्च करने के बावजूद सिर्फ 15 हजार की बिक्री हुई।

जयपुर के जय ने सबसे महंगी दुकान 6.3 लाख में खरीदी, लेकिन अब वो सिर्फ 1 लाख में भी बिक नहीं रही। जय बताते हैं:
“मैंने घर के कागजात गिरवी रखकर दुकान ली थी, लेकिन अब पूरे माल को वापस ले जाने का भी पैसा नहीं है।”

व्यवस्था पर उठते सवाल

दुकानदारों का कहना है कि प्रशासन ने कई झूठे वादे किए:

  • CCTV, सुरक्षा गार्ड और सफाई की गारंटी दी गई थी, लेकिन कुछ भी नहीं मिला।
  • दुकानों के सामने वॉशरूम बना दिए गए, जिससे गंदगी और बदबू के कारण ग्राहक दूर रहते हैं।
  • बिजली और पानी की सही व्यवस्था नहीं है।

आगे क्या?

अब व्यापारियों की सरकार से गुहार है कि उन्हें बेस प्राइस काटकर रिफंड दिया जाए। वरुण कहते हैं:
“हम यहां ट्रेडिशनल कारीगरी को प्रमोट करने आए थे, लेकिन कोई ग्राहक ही नहीं है। प्रशासन ने मार्केट को पूरी तरह बर्बाद कर दिया।”

महाकुंभ की भव्यता और भारी भीड़ के बावजूद व्यापारियों के लिए यह सबसे बुरी कुंभ व्यापार यात्रा साबित हो रही है। अधिकांश दुकानदार अब भारी नुकसान के साथ घर लौटने की तैयारी में हैं। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इन व्यापारियों की समस्या को सुनेगा और उनके नुकसान की भरपाई करेगा या यह कुंभ सिर्फ भव्यता और भीड़ के मायाजाल में ही खो जाएगा?

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