2021 का आखिरी चंद्रग्रहण कल: 580 साल बाद बन रहा ऐसा संयोग, जानिए भारत में कहां कहां देगा दिखाई?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 18 नवम्बर 2021, 05:30 AM Updated: 18 नवम्बर 2021, 05:30 AM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

धार्मिक और ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से देखें, तो चंद्रग्रहण की काफी ज्यादा अहमियत है। धार्मिक नजरिए से ऐसा माना जाता है कि ग्रहण लगना अशुभ है। इस साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण 19 नवंबर को लगने वाला है कार्तिक पूर्णिमा के दिन इस आखिरी चंद्र ग्रहण का योग बना है। साथ ही साथ इस दिन गंगा स्नान भी हैं।

जानिए कहां कहां देगा दिखाई?

ज्योतिष शास्त्र के हिसाब से कार्तिक पूर्णिमा के दिन लगने वाला ये चंद्र ग्रहण भारत के अधिकतर एरिया में तो देखा ही नहीं जा सकेगा। वैसे ये अरुणाचल प्रदेश और असम के कुछ हिस्सों में दिखाई दे सकता है। इसके अलावा ये आंशिक चंद्र ग्रहण उत्तर और दक्षिण अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में देखा जा सकेगा। हिंदू पंचांग के हिसाब से ये चंद्र ग्रहण वृष राशि में लगेगा, जिसकी वजह से वृष राशि वालों को खास ध्यान देना होगा। 

इतनी देर के लिए लगेगा ये चंद्र ग्रहण

ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक 19 नबंवर 2021 को जो चंद्र ग्रहण लगने वाला है वो भारतीय समय के अनुसार करीब करीब 11 बजकर 30 मिनट पर लगेगा। चंद्र ग्रहण खत्म शाम 05 बजकर 33 मिनट पर हो जाएगा। खण्डग्रास ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 26 मिनट होगी, जबकि उपच्छाया चंद्रग्रहण की कुल अवधि 5 घंटे 59 मिनट। 

 जानकारों के मुताबिक 580 सालों के बाद ऐसा होने जा रहा है, जब इतना लंबा आंशिक चंद्र ग्रहण लग रहा है। इससे पहले ऐसा हुआ था साल 1440 में 18 फरवरी को। इस दौरान सूतक नहीं लगेगा। दरअसल, ऐसी मान्यता है कि पूर्ण ग्रहण लगने पर ही सूतक नियम माने जाते हैं और आंशिक, खंडग्रास ग्रहण पर सूतक नहीं माना जाता है। सूतक काल में शुभ काम करना मना होता है और इस समय गर्भवती महिलाओं को खास ख्याल रखना होता है। 

क्यों लगता है ग्रहण?

स्वर्भानु नाम का एक दैत्य समुद्र मंथन के दौरान छल से अमृत पीने की कोशिश में लग गया और तभी चंद्रमा और सूर्य ने उसे ऐसा करते देख लिया और इस बारे में भगवान विष्णु को बता दिया। जिस पर अपने सुर्दशन चक्र से भगवान विष्णु ने इस दैत्य का सिर धड़ से अलग किया, लेकिन अमृत की कुछ बंदू गले से उतर चुकी थी जिससे सिर और धड़ दो दैत्य बन गए और हमेशा के लिए अमर हो गए। सिर राहु और धड़ केतु कहलाया। ऐसा मानते हैं कि राहु और केतु सूर्य और चंद्रमा से इसी बात का बदला लेते है और समय-समय पर उन पर ग्रहण लगाते हैं। इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा निकलती है जिसकी वजह से ग्रहण के दौरान शुभ काम नहीं करने को कहा जाता है। 

सामान्य मान्यताओं पर ये जानकारियां और सूचनाएं बेस्ड है। हम इनकी पुष्टि नहीं करते हैं। किसी भी कंक्लूजन पर पहुंचने से पहले एक्सपर्ट्स से सलाह लें।

vickynedrick@gmail.com

vickynedrick@gmail.com https://nedricknews.com

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds