Kerala News: डांस टीचर को सात वर्षीय छात्र के साथ यौन शोषण के मामले में 52 साल की सजा, कोर्ट ने दिखाया सख्त रवैया

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 29 जून 2025, 05:30 AM Updated: 29 जून 2025, 05:30 AM
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Kerala News: केरल के तिरुवनंतपुरम में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया, जिसने समाज और कानून व्यवस्था दोनों को झकझोर कर रख दिया। एक नृत्य शिक्षक, जिसे बच्चों का मार्गदर्शक और रोल मॉडल माना जाता है, उसने अपने ही सात वर्षीय छात्र का बार-बार यौन शोषण कर मानवता को शर्मसार कर दिया। शनिवार को त्वरित विशेष पॉक्सो अदालत ने इस मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी डांस टीचर सुनील कुमार को 52 साल जेल की सजा सुनाई है।

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20 साल की प्रभावी सजा और भारी जुर्माना- Kerala News

हालांकि कुल सजा 52 साल की है, लेकिन अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इसका मतलब है कि आरोपी को वास्तविक तौर पर 20 साल तक जेल में रहना होगा। इसके अलावा उस पर 3.25 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि यदि यह जुर्माना वसूल हो जाता है तो उसे पीड़ित बच्चे को मुआवजे के तौर पर दिया जाए।

कैसे हुआ मामले का खुलासा?

घटना 2017 से 2019 के बीच की है जब पीड़ित बच्चा डांस क्लास के लिए सुनील कुमार के पास जाया करता था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उसी दौरान आरोपी ने कई बार नाबालिग बच्चे के साथ अप्राकृतिक यौन संबंध बनाए। यह कृत्य एकांत कमरे में होता था, जहाँ वह डांस सिखाने का बहाना बनाकर बच्चे को ले जाता था।

शुरुआत में बच्चा डर और धमकियों के कारण किसी से कुछ नहीं कह सका। लेकिन जब उसके माता-पिता ने यह फैसला किया कि अब उसके छोटे भाई को भी उसी टीचर के पास डांस सिखाने भेजा जाएगा, तब जाकर बच्चे ने साहस जुटाया और अपने साथ हुई घटना का खुलासा किया। उसके बाद परिवार ने तत्काल स्थानीय पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई।

अभियोजन की भूमिका और कोर्ट का रुख

विशेष लोक अभियोजक आर.एस. विजय मोहन ने अदालत को बताया कि कैसे आरोपी ने अपने पद और बच्चे की मासूमियत का फायदा उठाते हुए उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया। अभियोजन पक्ष ने ठोस साक्ष्य और पीड़ित के बयान के आधार पर मजबूत केस तैयार किया, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया।

जज अंजू मीरा बिड़ला ने फैसला सुनाते हुए कहा कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों में किसी भी तरह की ढील नहीं दी जा सकती। उन्होंने इसे ‘घृणित अपराध’ बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में कड़ी सजा ही समाज में एक सख्त संदेश दे सकती है।

सामाजिक चेतावनी

इस मामले ने पूरे समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम अपने बच्चों को सुरक्षित माहौल दे पा रहे हैं? जब एक शिक्षक ही शोषण करने लगे तो बच्चों का भरोसा किस पर टिकेगा? यह घटना न सिर्फ कानून के लिए चुनौती थी, बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है।

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