Iran-US Ceasefire: दो हफ्तों के सीज़फायर के बाद अब ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। दोनों देशों के बीच नई बातचीत की शुरुआत 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में होने जा रही है। यह बातचीत ऐसे समय हो रही है जब हालिया तनाव के बाद दोनों पक्ष किसी ठोस समझौते की दिशा में बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
पाकिस्तान बना मध्यस्थ, 10 बिंदुओं का प्रस्ताव केंद्र में |Iran-US Ceasefire
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान अहम भूमिका निभा रहा है। ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को 10 बिंदुओं वाला एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है, जिसे अब बातचीत का आधार माना जा रहा है। इन प्रस्तावों में सबसे अहम मुद्दे हैं अहिंसा के प्रति प्रतिबद्धता, होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण बनाए रखना, यूरेनियम संवर्धन की अनुमति, और सभी तरह के प्रतिबंधों को हटाने की मांग। इसके अलावा ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े प्रस्तावों को खत्म करने, मुआवजे की मांग और क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं की वापसी जैसे बड़े मुद्दे भी उठाए हैं।
होर्मुज स्ट्रेट और प्रतिबंध बने सबसे बड़े मुद्दे
बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट सबसे अहम विषयों में शामिल है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ईरान चाहता है कि इस पर उसका नियंत्रण बना रहे, जबकि अमेरिका इस क्षेत्र में स्वतंत्र आवागमन की गारंटी चाहता है। इसके साथ ही आर्थिक प्रतिबंधों का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में है। ईरान ने सभी प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंध हटाने की मांग रखी है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था को राहत मिल सके।
सीज़फायर, लेकिन तनाव अब भी कायम
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने साफ किया है कि बातचीत का मतलब यह नहीं है कि जमीन पर तनाव पूरी तरह खत्म हो गया है। उनका कहना है कि यह सीज़फायर स्थायी शांति नहीं, बल्कि एक अस्थायी कदम है।
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि उनके “हाथ अभी भी ट्रिगर पर हैं” और किसी भी गलती का जवाब दिया जाएगा।
अमेरिका की शर्त और चीन की भूमिका
वहीं, व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, सीज़फायर पूरी तरह तभी लागू माना जाएगा जब ईरान होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोल देगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में चीन ने भी अहम भूमिका निभाई है। बताया जा रहा है कि चीन ने आखिरी समय में हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को तनाव कम करने और बातचीत की राह अपनाने के लिए प्रेरित किया।
15 दिन तक चल सकती है बातचीत
इस्लामाबाद में शुरू होने वाली यह बातचीत करीब 15 दिनों तक चल सकती है। अगर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है, तो इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा है कि अगर ईरान पर हमले बंद होते हैं, तो वे भी अपने हमले रोक देंगे। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सीज़फायर के दौरान होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जाएगा।
पाकिस्तान को मिला श्रेय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सीज़फायर को लागू कराने में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की है। खास तौर पर शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर को इसके लिए धन्यवाद दिया गया है।
आगे क्या?
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह बातचीत स्थायी शांति की दिशा में कोई ठोस कदम साबित होगी या फिर यह सिर्फ अस्थायी राहत बनकर रह जाएगी। फिलहाल, दोनों देशों के बीच बातचीत की यह पहल एक उम्मीद जरूर जगा रही है, लेकिन हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं कहे जा सकते।



























