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Valmiki Jayanti 2023: इस साल वाल्मीकि जयंती 28 अक्टूबर को, जानिए क्या है इसकी पौराणिक कथा

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News

Published: 25 Oct 2023, 12:00 AM | Updated: 25 Oct 2023, 12:00 AM

Valmiki Jayanti 2023 : पौराणिक कथा ने अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्री राम की मुलाकात महर्षि वाल्मीकि से हुई थी, सीता माता के वनवास के दौरान महर्षि वाल्मीकि में ही उन्हें आश्रय दिया था. इसके साथ ही हिन्दू धर्म में महर्षि वाल्मीकि को पहली कवि माना जाता है. क्यों कि उन्होंने लव और कुश को शिक्षा देते हुए हिन्दू धर्म की महाकाव्य पुस्तक ‘रामायण’ की रचना की थी. इसलिए हिन्दू धर्म ने इनकी जयंती काफी जोर शोर से मनाई जाती है. हिन्दू धर्म में महर्षि वाल्मीकि जयंती का विशेष महत्व है. इसी कारण इस साल महर्षि वाल्मीकि जयंती 28 अक्टूबर, 2023 को मनाई जा रही है. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि जयंती हर साल आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है. आज हम आपको महर्षि वाल्मीकि जयंती के महत्व के बारे में बताएंगे.

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वाल्मीकि जयंती का महत्व

हिन्दू धर्म में वाल्मीकि का विशेष महत्व है क्यों कि महर्षि वाल्मीकि एक महान संत होने के साथ साथ, हिन्दू धर्म का पवित्र ग्रन्थ रामचरितमानस के रचियता भी है. उन्होंने अपने जीवन में अपनी लेखनी से भगवान राम के मूल्यों को बढ़ावा दिया है. भगवान राम के विचारो और आदर्शो को भी बढ़ावा दिया था. महर्षि वाल्मीकि ने अपनी लेखनी से तपस्या के महत्व को भी समझाया था.

पौराणिक कथा ने अनुसार वनवास के दौरान भगवान श्री राम की मुलाकात महर्षि वाल्मीकि से हुई थी, सीता माता के वनवास के दौरान महर्षि वाल्मीकि में ही उन्हें आश्रय दिया था. बनवास के समय ही महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में सीता माता ने दो बच्चो लव और कुश को जन्म दिया था, लव और कुश को शिक्षा देते समय हिन्दू धर्म की महाकाव्य पुस्तक ‘रामायण’ की रचना की थी. जिसमे 240000 श्लोक और सैट कांड लिखे गए है. इसीलिए हिन्दू धर्म में महर्षि वाल्मीकि का महत्व इतना ज्यादा माना जाता है.

महर्षि वाल्मीकि के लेकर एक पौराणिक कथा यह भी है कि महर्षि वाल्मीकि अपने जीवन के प्रारभिक सालो में रत्नाकर डाकू के नाम से जाने जाते थे. कथा के अनुसार महर्षि वाल्मीकि का जन्म पुराने भारत में गंगा के किनारे एक ऋषि के घर हुआ था, बचपन में वह जंगल ले खो गए थे और रत्नाकर डाकू बन गए थे, बाद में उनकी मुलाकात महर्षि नारद से मुलाकात हुई, जिसके बाद वह रामभक्त बन गए थे. और अपना पूरा जीवन भगवान राम की भक्ति में लगा दिया था. हिन्दू धर्म के महाकाव्य रामायण के रचित महर्षि वाल्मीकि को हिन्दू धर्म में काफी महत्व दिया जाता है.

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