IIT Baba Abhay Singh Wedding: प्रयागराज के महाकुंभ 2025 में सुर्खियों में आए हरियाणा के IITian बाबा अभय सिंह लंबे समय बाद अपने पैतृक शहर झज्जर लौटे। लेकिन इस बार वह अकेले नहीं थे। उनके साथ उनकी पत्नी प्रतीका भी थीं। जी हां, IITian बाबा ने दो महीने पहले गुपचुप तरीके से शादी रचाई थी। इस खबर के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनके फॉलोअर्स उनकी पत्नी और उनके काम के बारे में जानने के लिए उत्साहित हो गए हैं।
IITian बाबा की पत्नी हैं इंजीनियर | IIT Baba Abhay Singh Wedding
बाबा अभय सिंह की पत्नी प्रतीका बेंगलुरु की रहने वाली हैं और उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। दोनों की दोस्ती एक साल पहले शुरू हुई थी, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई। इसके बाद फरवरी 2026 में मंदिर में सात फेरे लेकर दोनों ने जीवनसाथी बनकर एक-दूसरे को अपना लिया। बाबा अभय सिंह ने कहा कि शादी के बाद उनकी जिंदगी में नई खुशियों की शुरुआत हुई है।
झज्जर में हुआ जोरदार स्वागत
पहली बार झज्जर लौटते समय बाबा अभय सिंह और प्रतीका को उनके परिवार और गांववालों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। शादी के बाद पहली बार ससुराल आई बहू प्रतीका ने सिर पर मंगल कलश रखकर प्रवेश किया। बाबा अभय सिंह उनके पीछे पल्लू पकड़कर चल रहे थे। उनके माता-पिता ने नए जोड़े का तिलक किया और आरती उतारकर घर में स्वागत किया।
शादी के पीछे का सफर और मुलाकात
आईआईटी बॉम्बे से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में बीटेक करने वाले अभय सिंह ने बताया कि उनकी और प्रतीका की पहली मुलाकात साल 2025 में महाशिवरात्रि महोत्सव के दौरान कोयंबटूर के आश्रम में हुई थी। बाबा का कहना है कि दोनों का दृष्टिकोण और जीवन का विजन मेल खाता है। यही वजह रही कि दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई और शादी का फैसला लिया गया।
फ्यूचर प्लान: ‘श्री यूनिवर्सिटी’
शादी के बाद अब दोनों मिलकर ‘श्री यूनिवर्सिटी’ बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं। यह यूनिवर्सिटी साधना और ज्ञान के संगम पर केंद्रित होगी। बाबा अभय सिंह के अनुसार, यहां आने वाले लोग विभिन्न प्रकार की साधनाएं सीखेंगे और अध्यात्मिक शोध में शामिल होंगे। यूनिवर्सिटी में धर्म, योग और साधना से जुड़ी हर सुविधा उपलब्ध होगी। बाबा और प्रतीका फिलहाल हिमाचल प्रदेश में रहकर इसकी योजना पर काम कर रहे हैं।
कौन हैं IITian बाबा?
IITian बाबा उर्फ अभय सिंह ने महाकुंभ 2025 में अपनी अनूठी शैली और विचारों से दुनिया का ध्यान खींचा था। आईआईटी बॉम्बे से पढ़ाई के बाद उन्होंने कनाडा में जॉब भी की, लेकिन बाद में उनका रुझान धर्म और अध्यात्म की ओर बढ़ गया। इसके बाद उन्होंने जॉब छोड़कर भारत लौटकर साधना और शिक्षा के क्षेत्र में काम करना शुरू किया।

























