Holika Dahan 2026: हिंदू धर्म में रंगों की होली खेलने से पहले होलिका दहन करने की परंपरा है। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद अगले दिन रंगों वाली होली खेली जाती है। जैसे होली के रंगों का अपना महत्व है, वैसे ही होलिका की अग्नि का भी धार्मिक और पौराणिक महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु के परम भक्त प्रहलाद को जलाने की कोशिश करने वाली होलिका स्वयं अग्नि में भस्म हो गई थी।
तभी से अधर्म पर धर्म की विजय के रूप में यह पर्व मनाया जाता है। यह पर्व भक्तों के लिए आस्था और परंपरा से जुड़ा हुआ है। लेकिन साल 2026 में होलिका दहन के दिन भद्रा और चंद्र ग्रहण एक साथ पड़ने की वजह से लोगों के मन में भ्रम और चिंता बनी हुई है कि आखिर होलिका दहन कब किया जाए।
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होलिका दहन 2026 का शुभ मुहूर्त
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भद्रा काल और ग्रहण का सूतक काल दोनों ही समय शुभ कार्यों के लिए वर्जित माने जाते हैं। ऐसे में सही मुहूर्त का ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। पंचांग के अनुसार बताया जा रहा है कि होलिका दहन का शुभ समय शाम 06:47 बजे से रात 08:50 बजे तक रहेगा। इस दौरान कुल अवधि लगभग 2 घंटे 28 मिनट की होगी, जिसमें बिना किसी दोष के होलिका दहन किया जा सकता है।
चंद्र ग्रहण और सूतक काल का प्रभाव
भारतीय समय के अनुसार 3 मार्च 2026 को चंद्र ग्रहण का प्रभाव चंद्रोदय के साथ शाम 06:26 बजे से दिखाई देगा और 06:46 बजे समाप्त हो जाएगा। हालांकि ग्रहण की अन्य अवस्थाएं दोपहर 02:16 बजे से शुरू होंगी, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में सूतक काल का विशेष महत्व होता है।
मान्यता है कि इस दिन सूतक काल सुबह 09:39 बजे से शाम 06:46 बजे तक रहेगा। इसलिए इस अवधि में पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठान करने से बचना चाहिए। ग्रहण समाप्त होने के बाद ही होलिका दहन करना उचित रहेगा।
भद्रा का समय
होलिका दहन में भद्रा का विचार करना जरूरी माना जाता है, क्योंकि भद्रा मुख में दहन अशुभ फल दे सकता है। इस साल भद्रा 4 मार्च की रात 01:25 बजे से 04:30 बजे तक रहेगी। यानी शाम के समय भद्रा का कोई दोष नहीं है।
सबसे सही समय क्या रहेगा
इन सभी गणनाओं को देखते हुए होलिका दहन का सबसे सटीक और शुभ समय ग्रहण समाप्ति के बाद 06:47 बजे से 08:50 बजे तक रहेगा। इस समय होलिका दहन करने से किसी भी प्रकार का दोष नहीं माना जाएगा।
दोष से बचने के सरल उपाय
• ग्रहण काल में “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” का मानसिक जाप करते रहें
• ग्रहण समाप्त होने के बाद घर में गंगाजल का छिड़काव करें
• शुद्ध मुहूर्त में होलिका पूजन करें
• होलिका की अग्नि में अनाज और नारियल अर्पित करना शुभ माना जाता है
धार्मिक मान्यता है कि इन नियमों का पालन करने से नकारात्मकता दूर होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।
