कौन है ये खरगे? Himanta Biswa Sarma के विवादित बोल पर भड़की कांग्रेस, जानें कैसे शुरु हुआ पूरा विवाद

Rajni | Nedrick News India Published: 08 Apr 2026, 10:53 AM | Updated: 08 Apr 2026, 11:23 AM

Himanta Biswa Sarma: चुनाव की आहट के साथ ही सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। असम विधानसभा चुनाव के मतदान में अब कुछ ही वक्त बाकी है, और इस बीच आए राजनीतिक भूचाल ने राज्य के समीकरण बदल दिए हैं। हाल ही में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के एक बयान को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरमा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जिसे लेकर पार्टी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते ये विवाद कहां से शुरु हुआ?

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विवाद की जड़

इस पूरे विवाद की शुरुआत 5 अप्रैल 2026 को हुई, जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर विदेशी संपत्ति और तीन अलग-अलग देशों के पासपोर्ट होने का गंभीर आरोप लगाया। इन आरोपों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इन्हें ‘फेक’ और ‘AI जनित’ (Artificial Intelligence द्वारा बनाए गए) करार दिया और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।

इसी तीखी बहस के दौरान सरमा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ ‘पागल’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया, और सरमा ने खरगे की उम्र का हवाला देते हुए कहा कि “उनकी उम्र हो गई है, फिर भी वे पागल की तरह बात कर रहे हैं।

खरगे द्वारा असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच की मांग करने पर सरमा ने पलटवार करते हुए कहा, कौन है ये खरगे? क्या विदेश मंत्री तुम्हारे दामाद हैं? पहले झूठ-मूठ के कागज लाने के बजाय उनसे जाकर क्यों नहीं पूछा? जिसने इस कानूनी लड़ाई को एक बड़े राष्ट्रीय राजनीतिक विवाद में बदल दिया।

राहुल गांधी का सीधा हमला

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि खरगे जी के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा ‘बेहद अभद्र, शर्मनाक और पूरी तरह अस्वीकार्य’ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) महज एक व्यक्ति या विपक्षी दल के अध्यक्ष नहीं, बल्कि देश के एक अत्यंत वरिष्ठ और सम्मानित जननेता हैं।

राहुल गांधी के अनुसार सार्वजनिक जीवन में इतने ऊंचे पद पर बैठे व्यक्ति का अपमान करना उन करोड़ों देशवासियों के सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है, जिनका वे प्रतिनिधित्व करते हैं। बीजेपी और आरएसएस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जब भी विपक्ष का कोई नेता जनता के हक की बात करता है या सत्ता से कठिन सवाल पूछता है, तो उसे इसी तरह व्यक्तिगत रूप से अपमानित करने की कोशिश की जाती है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

प्रधानमंत्री से सीधा सवाल

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने इस पूरे मामले में सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरा है। उन्होंने प्रधानमंत्री (PM) की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर देश के एक इतने वरिष्ठ नेता और विपक्ष के मुख्य चेहरे के खिलाफ ऐसी अभद्र भाषा का इस्तेमाल होता है और प्रधानमंत्री चुप रहते हैं, तो इसे उनकी ‘मौन सहमति’ माना जाएगा।

राहुल गांधी का तर्क था कि सार्वजनिक जीवन में भाषाई मर्यादा बनाए रखना सरकार की भी जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष के शीर्ष नेतृत्व का अपमान करना केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक परंपराओं पर हमला है, और इस पर प्रधानमंत्री का मौन रहना उनकी जवाबदेही से बचने जैसा है।

कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी जताई नाराजगी

इस विवाद पर कांग्रेस (Congress) के कई बड़े नेताओं ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने कहा कि मल्लिकार्जुन खरगे जैसे बेहद वरिष्ठ और शालीन नेता के खिलाफ Himanta Biswa Sarma द्वारा किए अपमान और इस तरह की भाषा किसी भी सभ्य समाज और स्वस्थ लोकतंत्र में स्वीकार नहीं की जा सकती। वहीं जयराम रमेश ने इसे राजनीतिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में इतने ऊंचे कद वाले नेता के खिलाफ ऐसी टिप्पणी करना अलोकतांत्रिक और शर्मनाक है।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (Sukhwinder Singh Sukhu) ने भी इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर बड़ा प्रहार बताया। सुक्खू ने कहा कि 50 साल से अधिक के बेदाग राजनीतिक अनुभव रखने वाले और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पद पर आसीन नेता के खिलाफ इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणी करना सीधे तौर पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुँचाना है।

क्या कहते है राजनीतिक विश्लेषक

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदान से ठीक पहले इस तरह की तीखी बयानबाजी दरअसल मतदाताओं के बंटवारे या गोलबंदी की एक सोची-समझी चुनावी रणनीति है। विशेषज्ञों के अनुसार, जहाँ एक ओर हिमंत बिस्वा सरमा के कड़े तेवर उनके समर्थकों के बीच उन्हें एक ‘निडर नेता’ के रूप में पेश करते हैं।

वहीं कांग्रेस (Congress) इसे लोकतांत्रिक मर्यादा और विपक्ष के सम्मान पर हमले के रूप में भुनाकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि बीजेपी और प्रधानमंत्री इस पर क्या रुख अपनाते हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहरा सकता है, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज होता दिख रहा है।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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