Global Demand for BrahMos: भारत के ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम का बढ़ता प्रभाव, कई देशों ने खरीदारी के लिए किया संपर्क

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 16 मई 2025, 05:30 AM Updated: 16 मई 2025, 05:30 AM
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Global Demand for BrahMos: भारत के लिए ऑपरेशन सिंदूर ने ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम को वैश्विक सुर्खियों में ला दिया है। इस क्रूज मिसाइल का भारतीय सेना ने पाकिस्तान पर हमले के दौरान बेहद प्रभावी ढंग से उपयोग किया। यह पहली बार था जब ब्रह्मोस मिसाइल का युद्ध में उपयोग किया गया। हालांकि भारत ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की, पाकिस्तान ने इस तथ्य की पुष्टि की है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में ब्रह्मोस मिसाइल की एक नई सुविधा का उद्घाटन करते हुए इस मिसाइल प्रणाली की बढ़ती ताकत पर जोर दिया।

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ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने के लिए आगे आए कई देश- Global Demand for BrahMos

भारत की ब्रह्मोस मिसाइल की बढ़ती मांग को देखते हुए कई देश इसके खरीदारी के लिए उत्सुक हैं। फिलीपींस, इंडोनेशिया, वियतनाम, मलेशिया, और अन्य देशों ने इस मिसाइल प्रणाली में रुचि दिखाई है।

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फिलीपींस: भारत का पहला बड़ा रक्षा निर्यात

भारत और फिलीपींस के बीच ब्रह्मोस मिसाइलों का एक ऐतिहासिक सौदा हुआ था, जिसे भारत का पहला बड़ा रक्षा निर्यात माना गया। जनवरी 2022 में दोनों देशों ने लगभग 375 मिलियन डॉलर के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे। इस सौदे के तहत, भारत को फिलीपींस को तीन कोस्टल डिफेंस बैटरियां आपूर्ति करनी थीं। फिलीपींस को पहली बैटरी अप्रैल 2024 में और दूसरी बैटरी अप्रैल 2025 में भेजी जाएगी। रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी बैटरी इस बार एक जहाज में भेजी गई है, जबकि पहली बैटरी भारतीय वायुसेना के विमान में भेजी गई थी।

इंडोनेशिया: 450 मिलियन डॉलर का सौदा

इंडोनेशिया भी ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीदारी पर विचार कर रहा है। भारत और इंडोनेशिया के बीच पिछले एक दशक से इस सौदे पर बातचीत चल रही थी, और अब यह लगभग 450 मिलियन डॉलर का सौदा पूरा होने की कगार पर है। इस सौदे के अंतर्गत, इंडोनेशिया क्रूज मिसाइल के उन्नत संस्करण की मांग कर रहा है।

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वियतनाम, मलेशिया और अन्य देशों की रुचि

वियतनाम भारत के साथ 700 मिलियन डॉलर के सौदे के तहत अपनी सेना और नौसेना के लिए ब्रह्मोस मिसाइलें चाहता है। मलेशिया भी अपने सुखोई Su-30MKM लड़ाकू विमानों और केदाह श्रेणी के युद्धपोतों के लिए ब्रह्मोस मिसाइलों की खरीदारी की योजना बना रहा है। इसके अलावा, थाईलैंड, सिंगापुर, ब्रुनेई, ब्राज़ील, चिली, अर्जेंटीना, वेनेजुएला, मिस्र, सऊदी अरब, यूएई, कतर, और ओमान ने भी ब्रह्मोस मिसाइल के विभिन्न संस्करणों में रुचि दिखाई है।

ब्रह्मोस मिसाइल: तकनीकी विशेषताएँ और सामर्थ्य

ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल भारत के रक्षा शस्त्रागार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह मिसाइल भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और रूस के NPO मशीनोस्ट्रोयेनिया द्वारा संयुक्त रूप से बनाई गई है। ब्रह्मोस मिसाइल को विभिन्न प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है, जैसे कि पनडुब्बियाँ, जहाज, विमान, और जमीन से। इसकी रेंज लगभग 300 किलोमीटर तक है और यह 200 से 300 किलो वजन का वारहेड ले जाने में सक्षम है। मिसाइल 2.8 मैक की गति से उड़ती है, जो ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज है। वर्तमान में इसके लगभग 83 प्रतिशत घटक स्वदेशी हैं, जो भारत से ही प्राप्त होते हैं।

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