IAS Rinku Singh Resignation: उत्तर प्रदेश के जाने-माने IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने मंगलवार (31 मार्च) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। राही ने अपने इस्तीफे में मुख्य वजह लंबा समय तक पोस्टिंग न मिलना और जनसेवा का अवसर न मिलना बताया है। उनके इस्तीफे की खबर के बाद परिवार और समाज में भी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
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भाभी नीलम सिंह राही का बयान| IAS Rinku Singh Resignation
रिंकू सिंह राही की भाभी नीलम सिंह राही ने कहा कि उनके अनुसार रिंकू ने जो भी कदम उठाया, सही किया है। उन्होंने कहा कि एक IAS अधिकारी को उसके पद के मुताबिक काम मिलना चाहिए, चाहे वह फील्ड में हो या किसी अन्य जगह। नीलम ने आगे कहा कि रिंकू इस पद के पूरी तरह लायक हैं। उन्होंने बताया कि रिंकू ने 7 गोलियां खाने के बाद भी परिवार की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य को निभाया और ऐसे व्यक्ति को काम मिलना ही चाहिए।
नीलम ने रिंकू की ईमानदारी और समाज के प्रति समर्पण की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि रिंकू घर में अपनी परेशानियों और फैसलों को निजी रखते हैं और किसी को झंझट में नहीं डालना चाहते। उनके अनुसार, रिंकू समाज की सेवा करना चाहते हैं और उन्हें सही अवसर मिलना चाहिए।
पिता सौदान सिंह राही का रुख
रिंकू के पिता सौदान सिंह राही ने कहा कि उनका बेटा देशभक्त, ईमानदार और मेहनती अधिकारी है। उन्होंने याद दिलाया कि 2009 में समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए रिंकू ने मुजफ्फरनगर में 100 करोड़ रुपये के घोटाले का पर्दाफाश किया। इस दौरान उन्हें 7 गोलियां लगी थीं, जिसमें उनकी एक आंख भी चली गई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बाद में IAS की परीक्षा पास की।
सौदान सिंह राही ने कहा कि उनके बेटे ने हमेशा देशहित में ही निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि मेहनती और ईमानदार लोग हमेशा बैंक बैलेंस के मोहताज नहीं होते। उन्होंने यह भी कहा कि रिंकू के इस्तीफे पर आयोग और राष्ट्रपति सही फैसला लेंगे।
रिंकू सिंह राही के आरोप
रिंकू सिंह राही, जो यूपी कैडर के 2022 बैच के IAS अधिकारी हैं, ने अपने विस्तृत इस्तीफा पत्र में आरोप लगाया कि उन्हें काम करने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने लिखा कि संवैधानिक व्यवस्था के समानांतर एक अलग सिस्टम चल रहा है। SDM रहते हुए कार्रवाई करने के बाद उन्हें साइडलाइन किया गया। राही ने कहा कि उन्हें वेतन तो मिल रहा था, लेकिन जनसेवा का मौका नहीं मिला।
राही ने अपने इस्तीफे को एक नैतिक निर्णय बताया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2009 में घोटाला उजागर करने के बाद उन्हें 7 गोलियां लगी थीं, लेकिन उनकी जान बच गई।
सरकारी पोस्टिंग और विवाद
शाहजहांपुर में वकीलों के एक प्रदर्शन के दौरान उनका उठक-बैठक वाला वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद सरकार ने उन्हें अटैच कर दिया, लेकिन तब से राही को कोई स्थायी पोस्टिंग नहीं मिली। सूत्रों के मुताबिक, रिंकू अकेले नहीं हैं, बल्कि कई अन्य अधिकारियों को भी साइडलाइन करके रखा गया है।
इस पूरी घटना ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना दिया है। रिंकू सिंह राही की ईमानदारी, साहस और देशभक्ति की छवि उनके समर्थकों और समाज में लगातार बनी हुई है। उनका इस्तीफा केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि प्रशासनिक न्याय और अवसरों की कमी पर एक बड़ा संदेश भी माना जा रहा है।
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